May 2020 Archives - Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India https://www.astrologyofmylife.com/category/blog-post-2020/may-2020/ Best Astrologer and Vastu Consultant at Pitampura Delhi - Acharya Dr. MSD Arya, Astrologer, Numerologist, Vastu Consultant, Gems Suggestions, best vastu consultant, moksha mukti, Best Astrologer, Astrology, Lal Kitab, Numerology, Horoscope, Matchmaking Astrologer, Astro SHop, Acharya Arya, Astro Arya, Astro arjuna, BlackMagic, hindu Panchang, Rashifal, Love, vashikaran, Thantrik, Raghava Bhatt, Moksha Mukti Jyotish and vastu Sansthan Delhi INdia Thu, 22 Feb 2024 06:55:40 +0000 en-GB hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 https://www.astrologyofmylife.com/wp-content/uploads/2024/02/cropped-Moksha-Mukti-logo-latest-32x32.png May 2020 Archives - Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India https://www.astrologyofmylife.com/category/blog-post-2020/may-2020/ 32 32 विभिन्न धर्मों में पाप-पुण्य को लेकर मान्यताओं की तुलना https://www.astrologyofmylife.com/comparison-of-beliefs-about-sin-and-virtue-in-different-religions/ https://www.astrologyofmylife.com/comparison-of-beliefs-about-sin-and-virtue-in-different-religions/#respond Sat, 30 May 2020 08:48:48 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=16708 विभिन्न धर्मों में पाप-पुण्य को लेकर मान्यताओं की तुलना ईसाइयत- हर व्यक्ति जन्म से पापी हैं क्यूंकि सृष्टि के आदि में हव्वा (Eve) और आदम (Adam) ने बाइबिल के ईश्वर के आदेश की अवमानना की थी। इसलिए ईश्वर ने हव्वा को शाप देकर पापी करार दिया था। इस पाप से बचाने वाला केवल एक मात्र …
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विभिन्न धर्मों में पाप-पुण्य को लेकर मान्यताओं की तुलना

  1. ईसाइयत- हर व्यक्ति जन्म से पापी हैं क्यूंकि सृष्टि के आदि में हव्वा (Eve) और आदम (Adam) ने बाइबिल के ईश्वर के आदेश की अवमानना की थी। इसलिए ईश्वर ने हव्वा को शाप देकर पापी करार दिया था। इस पाप से बचाने वाला केवल एक मात्र ईसा मसीह है क्यूंकि वह पापों को क्षमा करने वाला है। इसलिए केवल ईसा मसीह पर विश्वास लाने वाला ही स्वर्ग का अधिकारी होगा। इसलिए ईसा मसीह को मानो और अपने पाप से मुक्ति प्राप्त करो। क्यूंकि केवल ईसा मसीह ही मुक्ति प्रदाता है।पापों को करने से रोकने के स्थान पर ईसा मसीह पर विश्वास को अधिक महत्व दिया गया हैं। यह मान्यता एक पाखंड के समान दिखती हैं कि अगर कोई व्यक्ति कोई भी पाप कर्म न करे मगर ईसा मसीह पर विश्वास न करे तो भी वह नरक में जायेगा क्यूंकि वह जन्म से पापी हैं।

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  1. इस्लाम- पाप न करने के लिए कुछ आयतों के माध्यम से सन्देश अवश्य दिया गया है। मगर पाप को न करने से अधिक महत्व इस्लाम की मान्यताओं को दिया गया हैं। मुस्लिम समाज के लिए आचरण से अधिक महत्वपूर्ण मान्यताएं हैं। जैसे ईद की दिन निर्दोष पशुओं की हत्या करना उनके लिए पाप नहीं हैं क्यूंकि यह इस्लामिक मान्यता हैं। जैसे जिहाद के नाम पर निर्दोषों को मारना भी पाप नहीं हैं, अपितु पुण्य का कार्य हैं क्यूंकि इसके परिणाम स्वरुप जन्नत और हूरों के भोग की प्राप्ति होगी। क़ुरान के ईश्वर अल्लाह से अधिक महत्वपूर्ण पैगम्बर मुहम्मद साहिब प्रतीत होते हैं। यह मान्यता है, यह विश्वास है। इस्लाम में पाप-पुण्य कर्म से अधिक मान्यताओं को महत्व उसे धर्म नहीं अपितु मत सिद्ध करता हैं।

 

  1. वेदों में मनुष्य और ईश्वर के मध्य न कोई मुक्तिदाता हैं, न कोई मध्यस्थ हैं। मनुष्य और ईश्वर का सीधा सम्बन्ध हैं। मान्यता या विश्वास से अधिक सत्यता एवं यथार्थ को महत्व दिया गया हैं। सम्पूर्ण वेदों में अनेक मंत्र मनुष्य को पाप कर्म न करने एवं केवल पुण्य कर्म करे का सन्देश देते हैं। वेद पाप क्षमा होना नहीं मानता। क्यूंकि कर्मफल सिद्धांत के अनुसार जो जैसा कर्म करेगा वैसा फल प्राप्त करेगा। पाप क्षमा होने से मनुष्य कभी पाप क्षमा करना नहीं छोड़ेगा अपितु भय मुक्त होकर ओर अधिक पापी बनेगा। वेद मनुष्य को पाप कर्मों का त्याग करने के लिए संकल्प करने का सन्देश देते हैं। संकल्प को प्रबल बनाने के लिए वेद ईश्वर कि स्तुति प्रार्थना एवं उपासना कर आध्यात्मिक उन्नति करने का विधान बताते हैं। जितना जितना मनुष्य उन्नति करता जायेगा, पाप आचरण से विमुख होता जायेगा। उतना उतना उसके कर्म पुण्य मार्ग को प्रशस्त करेंगे। वैदिक विचारधारा में मनुष्य के कर्म सर्वोपरि है न की मान्यता, विश्वास अथवा मध्यस्ता। व्यवहारिक, क्रियात्मक एवं प्रयोगात्मक दृष्टि से केवल वेदों की कर्मफल व्यवस्था सत्य के सबसे निकट हैं।

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वेद में पाप निवारण के लिए अनेक मंत्र दिए गए हैं जिनमें मनुष्य ईश्वर से ऐसी मति, ऐसी बुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना करता हैं जिससे वह केवल और केवल सत्य मार्ग पर चलता रहे और पाप कर्म से सर्वथा दूर रहे। मनुष्य इन मन्त्रों का अनुष्ठान करते हुए यह संकल्प लेता हैं की वह पाप कर्म से सदा दूर रहेगा।

 

आइये इन मन्त्रों को ग्रहण कर, उनका चिंतन मनन कर, उन्हें अपने जीवन में शाश्वत करे जिससे हमारा जीवन सफल हो जाये

 

  1. प्राणी जगत का रक्षक, प्रकृष्ट ज्ञान वाला प्रभु हमें पाप से छुडाये- अथर्वेद ४/२३/१

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2. हे सर्वव्यापक प्रभु जैसे मनुष्य नौका द्वारा नदी को पार कर जाते हैं, वैसे ही आप हमें द्वेष रुपी नदी से पार कीजिये. हमारा पाप हमसे पृथक होकर दग्ध हो जाये- अथर्ववेद ४/३३/७

 

3. हे ज्ञान स्वरुप परमेश्वर हम विद्वान तेरे ही बन जाएँ. हमारा पाप तेरी कृपा से सर्वथा नष्ट कर दे- ऋग्वेद १/९७/४

 

  1. हे मित्रावरुणो अर्थात अध्यापकों उपदेशकों आपके नेतृत्व में अर्थात आपकी कृपा से गड्डे की तरह गिराने वाले पापों से में सर्वथा दूर हो जाऊ- ऋग्वेद २/२७/५

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5.हे ज्ञानस्वरूप प्रभु आप हमे अज्ञान को दूर रख पाप को दूर करों- ऋग्वेद ४/११/६

 

6.इस शुद्ध बुद्धि से हम भगवान के भक्त बनें और पाप से बिलकुल परे चले जाएँ- ऋग्वेद ७/१५/१३

 

7.हे प्रभु तू पाप से हमारी रक्षा कर , पाप की कामना करने वाले व्यक्ति से भी दिन रात निरंतर हमारी रक्षा कर – ऋग्वेद ७/१५/१५

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8.हे मित्रा वरुणो आपके बताये हुए सत्य मार्ग से चलकर नौका से नदी की तरह पापरूपी नदी को तैर जाएँ- ऋग्वेद ७/६५/३

 

9.हे सर्वज्ञ प्रभु आप मेरी सदा रक्षा करे मुझे कभी पाप की इच्छा रखने वाले दुष्ट बुद्धि वाले मनुष्य की संगती में मत पड़ने दे.- ऋग्वेद ८/७१/७

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10.निष्पापता की उत्सुकता इस सभी मन्त्रों में प्रकट की गयी हैं. प्रभु का सर्वव्यापकता तथा सर्वज्ञान गुण पाप दूर करने में सहायक होता हैं. सर्वव्यापक प्रभु हमारे द्वारा कहीं भी किये गए पाप कर्म को जान लेते हैं और यह प्रभु की न्याय व्यस्था ही हैं की किसी भी मनुष्य द्वारा किया गया पाप कर्म उसे दण्डित करने का हेतु बनता हैं. जो जैसा करेगा वैसा भरेगा का सिद्धांत स्पष्ट रूप से ईश्वर की कर्म फल व्यस्था को सिद्ध करता हैं. मनुष्य कर्म करने के लिए स्वतंत्र हैं और उसका फल पाने के लिए परतंत्र हैं, परतंत्रता का अर्थ ईश्वर का गुलाम अथवा मनुष्य द्वारा किये जाने वाले कर्मों में बध्यता नहीं हैं अपितु पुण्य कर्म का फल सुख और पाप कर्म का फल दुःख हैं. इसलिए वेद भगवान अपने सन्देश द्वारा समस्त मानव जाति को पाप कर्म से दूर रहने का सन्देश दे रहे हैं.

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11.हे प्रभु! आप सर्वव्यापक और सर्वज्ञाता हैं .आपकी सर्वव्यापकता तथा सर्वज्ञता को जानकर हम कभी पाप में प्रवित न हो- ऋग्वेद १/१७/८

 

  1. हे ज्ञान के स्वामिन! जिसकी तुम रक्षा करते हो उसके पास कहीं से भी पाप नहीं फाटक सकता और न दुःख आ सकता हैं- ऋग्वेद २/२३/५

 

Gemstone Suggestion

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गांधारी के शाप को हंसते-हंसते स्वीकार करलिया श्री कृष्ण ने https://www.astrologyofmylife.com/shri-krishna-accepted-gandhari-curse-with-laughter/ https://www.astrologyofmylife.com/shri-krishna-accepted-gandhari-curse-with-laughter/#respond Sat, 30 May 2020 07:58:26 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=16704 गांधारी के शाप को हंसते-हंसते स्वीकार करलिया श्री कृष्ण ने महाभारत युद्ध के पश्चात् जब श्रीकृष्ण सहित सभी पांडव गांधारी से मिलने गए, तब पुत्रशोक में विह्वल गांधारी ने आंखों की पट्टी के भीतर से ही राजा युधिष्ठिर के पैरों की अंगुलियों के अग्रभाग को एक क्षण के लिए देखा। इतने देखने मात्र से ही …
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गांधारी के शाप को हंसते-हंसते स्वीकार करलिया श्री कृष्ण ने

महाभारत युद्ध के पश्चात् जब श्रीकृष्ण सहित सभी पांडव गांधारी से मिलने गए, तब पुत्रशोक में विह्वल गांधारी ने आंखों की पट्टी के भीतर से ही राजा युधिष्ठिर के पैरों की अंगुलियों के अग्रभाग को एक क्षण के लिए देखा। इतने देखने मात्र से ही युधिष्ठिर के पैरों के नाखून काले पड़ गए। गांधारीजी यह बात अच्छी तरह से जानती थीं कि महाभारत का पूरा युद्ध जिस योद्धा के बलबूते पर लड़ा गया है और जिसके कारण पाण्डवों को विजय मिली है, वह श्रीकृष्ण ही हैं। अत: गांधारीजी का सारा क्रोध्र श्रीकृष्ण पर ही केन्द्रित हो गया। वे श्रीकृष्ण को सम्बोधित करती हुई कहती हैं–

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‘मधुसूदन! माधव! जनार्दन! कमलनयन! तुम शक्तिशाली थे, तुममें महान बल है, तुम्हारे पास बहुत-से सैनिक थे, दोनों पक्षों से अपनी बात मनवा लेने की सामर्थ्य तुममें थी, तुमने वेदशास्त्र और महात्माओं की बात सुनी और जानी हैं, यह सब होते हुए भी तुमने स्वेच्छा से कुरुवंश के नाश की उपेक्षा की; जानबूझकर इस वंश का नाश होने दिया। यह तुम्हारा महान दोष है, अत: तुम इसका फल प्राप्त करो।’ .

इतना सब सुनकर भी श्रीकृष्ण शान्त, गम्भीर और मौन रहे। गांधारी के क्रोध ने प्रचण्डरूप धारण कर लिया और वे नागिन की भांति फुफकार कर बोली–

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‘चक्रगदाधर! मैंने पति की सेवा से जो कुछ भी तप प्राप्त किया है, उस तपोबल से तुम्हें शाप दे रही हूँ–आज से छत्तीसवां वर्ष आने पर तुम्हारा समस्त परिवार आपस में लड़कर मर जाएगा। तुम सबकी आंखों से ओझल होकर अनाथ के समान वन में घूमोगे और किसी निन्दित उपाय से मृत्यु को प्राप्त होगे। इन भरतवंश की स्त्रियों के जैसे तुम्हारे कुल की स्त्रियां भी इसी तरह सगे-सम्बन्धियों की लाशों पर गिरेंगी।’

ऐसा घोर शाप सुनकर भला कौन न भय से कांप उठता, परन्तु श्रीकृष्ण ने उसी गम्भीर मुस्कान के साथ कहा–‘मैं जानता हूँ, ऐसा ही होने वाला है। वृष्णिकुल का संहारक मेरे अतिरिक्त और हो भी कौन सकता है? यादवों को देव, दानव और मनुष्य तो मार नहीं सकते, अत: वे आपस में ही लड़कर नष्ट होंगे।’

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

शाप सुनकर भी भगवान श्रीकृष्ण गांधारी से कहते हैं–’उठो! शोक मत करो। प्रतिदिन युद्ध के लिए जाने से पूर्व जब तुम्हारा पुत्र दुर्योधन तुमसे आशीर्वाद लेने आता था और कहता था कि मां मैं युद्ध के लिए जा रहा हूँ, तुम मेरे कल्याण के लिए आशीर्वाद दो, तब तुम सदा यही उत्तर देती थीं ‘यतो धर्मस्ततो जय:’ अर्थात् धर्म की जय हो।’

यह कहकर समत्वयोगी श्रीकृष्ण निर्विकार भाव से खड़े रहे और गांधारी मौन हो गयीं।

Prashna Kundli by Acharya Arya

प्रसंग का सार

〰〰🌼〰〰

इस प्रसंग का सार यही है कि सुख-दु:ख को मेहमान समझकर स्वागत करें। दु:ख में विचलित न होकर धैर्य के साथ उसका सामना करें। क्योंकि वाल्मीकिरामायण में कहा गया है–‘दुर्लभं हि सदा सुखम्।’ अर्थात् सदा सुख मिले यह दुर्लभ है।

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Three Eclipses in a Month – Sum of Suffering – Rebellion – Economic Problem – Natural Disaster https://www.astrologyofmylife.com/three-eclipses-in-a-month-sum-of-suffering-rebellion-economic-problem-natural-disaster/ https://www.astrologyofmylife.com/three-eclipses-in-a-month-sum-of-suffering-rebellion-economic-problem-natural-disaster/#respond Thu, 28 May 2020 06:43:12 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=16693 5 जून से 5 जुलाई 2020 के बीच मे तीन ग्रहण है एक महीने में तीन ग्रहण दो चंद्रग्रहण एक सूर्यग्रहण जब कभी एक महीने में तीन से ज्यादा ग्रहण आ जाये तो एक चिंता का विषय बनता है किसी महीने में दो से अधिक ग्रहण पड़े और उन पर पाप ग्रहों का प्रभाव रहा …
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5 जून से 5 जुलाई 2020 के बीच मे तीन ग्रहण है एक महीने में

तीन ग्रहण दो चंद्रग्रहण एक सूर्यग्रहण जब कभी एक महीने में तीन से ज्यादा ग्रहण आ जाये तो एक चिंता का विषय बनता है

किसी महीने में दो से अधिक ग्रहण पड़े और उन पर पाप ग्रहों का प्रभाव रहा है तो बुरा ही होता है। ऐसे में राजा को कष्ट, सेना में विद्रोह, आर्थिक समस्या जैसी स्थिति निर्मित होती है। इस साल 6 जून से 5 जुलाई के बीच तीन ग्रहण लगने जा रहे हैं, जिनमें से दो ग्रहण भारत में दिखाई देंगे। यानी 30 दिनों की अंदर 3 बड़े ग्रहण लगेंगे। 21 जून को मिथुन राशि और मृगशिरा नक्षत्र में लगने वाला सूर्य ग्रहण ज्यादा संवेदनशील है।

5 जून 2020 चंद्रग्रहण प्रारंभ रात 11:15 मिनिट समाप्ति 6 जून सुबह 2:34 चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पूर्व लग जाता है. इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. ग्रहण के समाप्त होते ही सूतक काल भी समाप्त हो जाता है. इसके बाद ही कोई भी शुभ कार्य करना चाहिए.

जिसमे शुक्र वक्री और अस्त रहेगा गुरु शनि वक्री रहेंगे तो तीन ग्रह वक्री रहेंगे, जिसके कारण जिसके प्रभाव भारत की अर्थव्यवस्था पर होगा। शेयर_बाजार से जुड़े हुए लोग सावधान रहें। यह ग्रहण वृश्चिक राशि पर बहुत बुरा प्रभाव डालेगा। किसी ख्यातिप्राप्त व्यक्ति की रहस्यात्मक मौत। परिवार वालो के साथ वाद विवाद का सामना करना पड़ेगा तो वृश्चिक राशि वाले सावधान।

21 जून 2020 सूर्य ग्रहण एक साथ छ ग्रह वक्री रहेंगे बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु यह छह ग्रह 21 जून 2020 को वक्री रहेंगे। इन छह ग्रह का वक्री होना यानी एक बहुत बड़ा तहलका मचाने वाला है।

कंकणाकृति सूर्य ग्रहण 21 जून को होगा। 21 जून को आषाढ़ मास की अमावस्या, मृगशिरा नक्षत्र, मिथुन राशि में होने वाला यह सूर्य ग्रहण 12 मिनिट तक भारत, बंगलादेश, भूटान, श्रीलंका के कुछ शहरों में दिखाई देगा। मिथुन राशि के जातकों को इस दौरान काफी सावधानी बरतने की जरूरत होगी। शास्त्रों के अनुसार, एक माह के मध्य दो या दो से अधिक ग्रहण पड़ जाए तो राजा को कष्ट, सेना में विद्रोह, आर्थिक समस्या जैसी स्थिति निर्मित होती है। संहिता ग्रंथों में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि यह स्थिति आषाढ़ माह में बने, तो आजीविका पर मार होती है।

ज्योतिष के नजरिये से 21 जून को लगने वाला सूर्य ग्रहण काफी उथल-पुथल लाने वाला हो सकता है। ग्रहण के समय मंगल मीन राशि में बैठकर सूर्य, बुध, चंद्रमा और राहु पर दृष्टि डालेगा, जो अशुभ संकेत दे रहा है। ग्रहण काल में ही शनि, बुध, गुरु और शुक्र जैसे महत्वपूर्ण ग्रह वक्री हो गए हैं। मानव सभ्यता, पर्यावरण संबंधित बड़ी क्षति होने की आशंका बन रही है। ज्योतिष शास्त्र में उल्लेख है कि जब बड़े ग्रह वक्री होते हैं, तो विश्व में महान प्राकृतिक आपदाएं आने की आशंका बढ़ जाती है। इसके साथ ही 30 दिनों में दो या दो से ज्यादा ग्रहण होना भी जनता के लिए कई मुसीबतों को लाने वाला समय रहा है।

5 जुलाई 2020 चंद्रग्रहण एक  बहुत बड़ा परिवर्तन मंगल का राशि परिवर्तन सूर्य का राशि परिवर्तन गुरु धनु राशि मे वापस, लेकिन वक्री रहेंगे। शुक्र मार्गी  प्राकृतिक आपदाएं आयेगी। विश्वयुद्ध होगा, वैश्विक_शक्तियां लड़ने को हावी होगी। किसी  ख्यातिप्राप्त  यशस्वी  कीर्तिमान राजनीतिज्ञ नेता की हत्या होगी । कुछ जगह पर आपसी लड़ाईया होगी। जलप्रलय का खतरा हम सभी पर मंडरा रहा है।

21 जून को सूर्य ग्रहण सुबह 9 बजकर 15 मिनट पर लगेगा. यह सूर्य ग्रहण दोपहर 3 बजकर 3 मिनट तक रहेगा. सूर्य ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से 12 घंटे पूर्व लग जाता है. इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. ग्रहण के समाप्त होते ही सूतक काल भी समाप्त हो जाता है. इसके बाद ही कोई भी शुभ कार्य करना चाहिए.

5 जुलाई को चंद्र ग्रहण सुबह 08 बजकर 37 मिनट से 11 बजकर 22 मिनट तक
कहां दिखाई देगा: अमेरिका, दक्षिण पूर्व यूरोप और अफ्रीका  का सूतक काल ग्रहण से 9 घंटे पूर्व लग जाता है. इस दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं. ग्रहण के समाप्त होते ही सूतक काल भी समाप्त हो जाता है. इसके बाद ही कोई भी शुभ कार्य करना चाहिए.

पांच जून को साल का दूसरा चंद्र ग्रहण, 21 जून को सूर्य ग्रहण और फिर पांच जुलाई को फिर से चंद्र ग्रहण लगेगा। इनमें से दो ग्रहण भारत में दिखाई देंगे। 5 जून को लगने वाला चंद्र ग्रहण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और भारत में दिखाई देगा। 21 जून को लगने वाला ग्रहण भारत के साथ ही एशिया के कई इलाकों, यूरोप और अफ्रीका में दिखाई देगा। फिर पांच जुलाई को लगने वाला ग्रहण अफ्रीका और अमेरिका में नजर आएगा। ये ग्रहण भारत में नहीं दिखाई देगा।
प्राकृतिक आपदाओं जैसे अत्याधिक वर्षा, समुद्री चक्रवात, तूफान, महामारी आदि से जन धन की हानि होने का खतरा है। भारत, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश को जून के अंतिम माह और जुलाई में भयंकर वर्षा से जूझना पड़ सकता है। इस वर्ष मंगल जल तत्व की मीन राशि में पांच माह तक बैठेंगे। ऐसे में वर्षा काल में असामान्य रूप से अत्याधिक वर्षा होगी और महामारी का भय रहेगा। शनि, मंगल और गुरु इन तीनों ग्रहों के प्रभाव से विश्व में आर्थिक मंदी का असर साल भर बना रहेगा।

यह तीन ग्रहण के कारण उथल पुथल मचजायेगी !! इसीलिए सभी जप तप ध्यान मे लग जाए – ओर परमात्मा से प्राथना करे की – भारत भूमि पर इसका प्रभाव कम से कम हो ।

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