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कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?

रजस्वला स्त्री मासिक धर्म, एक स्त्री की पहचान है, यह उसे पूर्ण स्त्रीत्व प्रदान करता है। लेकिन फिर भी हमारे समाज में रजस्वला स्त्री को अपवित्र माना जाता है। महीने के जिन दिनों में वह मासिक चक्र के अंतर्गत आती है, उसे किसी भी पवित्र कार्य में शामिल नहीं होने दिया जाता, उसे किसी भी धार्मिक स्थल पर जाने की मनाही होती है। लेकिन विडंबना देखिए कि एक ओर तो हमारा समाज रजस्वला स्त्री को अपवित्र मानता है वहीं दूसरी ओर मासिक धर्म के दौरान कामाख्या देवी को सबसे पवित्र होने का दर्जा देता है।

तांत्रिक सिद्धियां

यह मंदिर तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त करने के लिए प्रसिद्ध है। यहां तारा, धूमवती, भैरवी, कमला, बगलामुखी आदि तंत्र देवियों की मूर्तियां स्थापित हैं।

Prashna Kundli by Acharya Arya

 

पुन: निर्माण

इस मंदिर को सोलहवीं शताब्दी में नष्ट कर दिया गया था लेकिन बाद में कूच बिहार के राजा नर नारायण ने सत्रहवीं शताब्दी में इसका पुन: निर्माण करवाया था।

कामाख्या शक्तिपीठ (कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?)

नीलांचल पर्वत के बीचो-बीच स्थित कामाख्या मंदिर गुवाहाटी से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर प्रसिद्ध 108 शक्तिपीठों में से एक है। माना जाता है कि पिता द्वारा किए जा रहे यज्ञ की अग्नि में कूदकर सती के आत्मदाह करने के बाद जब महादेव उनके शव को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने उनके क्रोध को शांत करने के लिए अपना सुदर्शन चक्र छोड़कर सती के शव के टुकड़े कर दिए थे। उस समय जहां सती की योनि और गर्भ आकर गिरे थे, आज उस स्थान पर कामाख्या मंदिर स्थित है।

Horoscope

 

कामदेव का पौरुष

इसके अलावा इस मंदिर को लेकर एक और कथा चर्चित है। कहा जाता है कि एक बार जब काम के देवता कामदेव ने अपना पुरुषत्व खो दिया था तब इस स्थान पर रखे सती के गर्भ और योनि की सहायता से ही उन्हें अपना पुरुषत्व हासिल हुआ था। एक और कथा यह कहती है कि इस स्थान पर ही शिव और पार्वती के बीच प्रेम की शुरुआत हुई थी। संस्कृत भाषा में प्रेम को काम कहा जाता है, जिससे कामाख्या नाम पड़ा।

अधूरी सीढ़ियां (कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?)

इस मंदिर के पास मौजूद सीढ़ियां अधूरी हैं, इसके पीछे भी एक कथा मौजूद है। कहा जाता है एक नरका नाम का राक्षस देवी कामाख्या की सुंदरता पर मोहित होकर उनसे विवाह करना चाहता था। परंतु देवी कामाख्या ने उसके सामने एक शर्त रख दी।

kamakhya Devi - acharya arya - puja

कामाख्या देवी से विवाह

कामाख्या देवी ने नरका से कहा कि अगर वह एक ही रात में नीलांचल पर्वत से मंदिर तक सीढ़ियां बना पाएगा तो ही वह उससे विवाह करेंगी। नरका ने देवी की बात मान ली और सीढ़ियां बनाने लगा। देवी को लगा कि नरका इस कार्य को पूरा कर लेगा इसलिए उन्होंने एक तरकीब निकाली। उन्होंने एक कौवे को मुर्गा बनाकर उसे भोर से पहले ही बांग देने को कहा। नरका को लगा कि वह शर्त पूरी नहीं कर पाया है, परंतु जब उसे हकीकत का पता चला तो वह उस मुर्गे को मारने दौड़ा और उसकी बलि दे दी। जिस स्थान पर मुर्गे की बलि दी गई उसे कुकुराकता नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की सीढ़ियां आज भी अधूरी हैं।

मासिक चक्र (कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?)

कामाख्या देवी को ‘बहते रक्त की देवी’ भी कहा जाता है, इसके पीछे मान्यता यह है कि यह देवी का एकमात्र ऐसा स्वरूप है जो नियमानुसार प्रतिवर्ष मासिक धर्म के चक्र में आता है। सुनकर आपको अटपटा लग सकता है लेकिन कामाख्या देवी के भक्तों का मानना है कि हर साल जून के महीने में कामाख्या देवी रजस्वला होती हैं और उनके बहते रक्त से पूरी ब्रह्मपुत्र नदी का रंग लाल हो जाता है।
निषेध है मंदिर में प्रवेश
इस दौरान तीन दिनों तक यह मंदिर बंद हो जाता है लेकिन मंदिर के आसपास ‘अम्बूवाची पर्व’ मनाया जाता है। इस दौरान देश-विदेश से सैलानियों के साथ तांत्रिक, अघोरी साधु और पुजारी इस मेले में शामिल होने आते हैं। शक्ति के उपासक, तांत्रिक और साधक नीलांचल पर्वत की विभिन्न गुफाओं में बैठकर साधना कर सिद्धियां प्राप्त करने की कोशिश करते हैं।

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

 

वाममार्गी (कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?)

कामाख्या मंदिर को वाममार्ग साधना के लिए सर्वोच्च पीठ का दर्जा दिया गया है। ऐसा माना जाता है कि मछन्दरनाथ, गोरखनाथ, लोनाचमारी, ईस्माइलजोगी आदि जितने भी महान तंत्र साधक रहे हैं वे सभी इस स्थान पर साधना करते थे, यहीं उन्होंने अपनी साधना पूर्ण की थी।

भक्तों और स्थानीय लोगों का मानना है कि अम्बूवाची पर्व के दौरान कामाख्या देवी के गर्भगृह के दरवाजे अपने आप ही बंद हो जाते हैं और उनका दर्शन करना निषेध माना जाता है। पौराणिक दस्तावेजों में भी कहा गया है कि इन तीन दिनों में कामाख्या देवी रजस्वला होती हैं और उनकी योनि से रक्त प्रवाहित होता है।

तंत्र साधनाओं में रजस्वला स्त्री और उसके रक्त का विशेष महत्व होता है इसलिए यह पर्व या कामाख्या देवी के रजस्वला होने का यह समय तंत्र साधकों और अघोरियों के लिए सुनहरा काल होता है।

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योनि के वस्त्र (कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?)

इस पर्व की शुरुआत से पूर्व गर्भगृह स्थित योनि के आकार में स्थित शिलाखंड, जिसे महामुद्रा कहा जाता है, को सफेद वस्त्र पहनाए जाते हैं, जो पूरी तरह रक्त से भीग जाते हैं। पर्व संपन्न होने के बाद पुजारियों द्वारा यह वस्त्र भक्तों में वितरित कर दिए जाते हैं।

बहुत से तांत्रिक, साधु, ज्योतिषी ऐसे भी होते हैं जो यहां से वस्त्र ले जाकर उसे छोटा-छोटा फाड़कर मनमाने दामों पर उन वस्त्रों को कमिया वस्त्र या कमिया सिंदूर का नाम देकर बेचते हैं।

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आस्था का विषय

देवी के रजस्वला होने की बात पूरी तरह आस्था से जुड़ी है। इस मानसिकता से इतर सोचने वाले बहुत से लोगों का कहना है कि पर्व के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी में प्रचुर मात्रा में सिंदूर डाला जाता है, जिसकी वजह से नदी लाल हो जाती है। कुछ तो यह भी कहते हैं कि यह नदी बेजुबान जानवरों की बलि के दौरान उनके बहते हुए रक्त से लाल होती है। इस मंदिर में कभी मादा पशु की बलि नहीं दी जाती।
सामान्य स्त्री और देवी
खैर, तथ्य चाहे जो भी हो परंतु माहवारी काल के दौरान कामाख्या देवी की आराधना कर कहीं ना कहीं हम स्त्रीत्व की आराधना करते हैं। हम स्त्री, जिसे ‘जननी’ कहा जाता है, उसका भी सम्मान करते हैं। लेकिन जब बात व्यवहारिकता की, एक सामान्य स्त्री की आती है तो हमारा व्यवहार पूरी तरह क्यों बदल जाता है?

कामाख्या सिन्दूर असली में छोटे छोटे पत्थरोँ के रूप में होता है, जो की माँ कामाख्या मंदिर से प्राप्त होता है, प्रसाद के रूप में वहां से और भी माँ कामाख्या की चीज़ें प्राप्त होती है जिनमे कामाख्या वस्त्र, कामाख्या कड़ा और कामाख्या यन्त्र भी मिलता है पर सभी लोगो को नहीं.
सारे भक्तो को सिर्फ दो ही चीज़ें दी जाती है जब मंदिर का द्वार खुलता है और वो दो चीज़ें कामाख्या सिन्दूर और वस्त्र होती है कामाख्या सिन्दूर को लोग कामिया सिन्दूर भी कहते है और कामाख्या वस्त्र को लोग अम्बुबाची वस्त्र भी कहते है।
और ये दोनों चीज़ें सिर्फ अम्बुबाची मेला के दौरान ही वितरित की जाती है, तीन दिन के लिए मंदिर का द्वार बंद कर दिया जाता है और फिर जब मंदिर का द्वार खुलता है तो प्रसाद के रूप में सिन्दूर और वस्त्र वितरित किया जाता है।
अम्बुबाची मेला हर साल जून के महीने में मनाया जाता है, क्योकि जहा पर मंदिर स्थित है उस ग्राम का नाम अम्बुबाची है इसलिए इस मेले का नाम अम्बुबाची मेला है और ये मंदिर नीलांचल पर्वत पर स्थित है हर साल लाखो करोडो भक्त माँ कामाख्या का आशीर्वाद लेने यहाँ आते है और अपनी मनोकामनाओ को पूर्ण करते है।

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(कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?)

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Married Life with Zodiac Sign – Acharya Dr M S Dhiman https://www.astrologyofmylife.com/married-life-with-zodiac-sign-acharya-dr-m-s-dhiman/ https://www.astrologyofmylife.com/married-life-with-zodiac-sign-acharya-dr-m-s-dhiman/#respond Sat, 04 Jul 2020 11:34:41 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17201 12 राशि 12 टिप्स, ऐसे बनाएं, अपने वैवाहिक जीवन को रोमांटिक वैवाहिक संबंधों में खुशहाली मुख्‍य रूप से शुक्र और बृहस्‍पति की स्थिति पर निर्भर करती है। कि आपका पार्टनर आपसे प्‍यार करता है या नहीं और आपकी लव लाइफ में रोमांस है या नहीं, ये सब बातें शुक्र की स्थिति पर निर्भर करती हैं। मुख्‍य …
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12 राशि 12 टिप्स, ऐसे बनाएं, अपने वैवाहिक जीवन को रोमांटिक

वैवाहिक संबंधों में खुशहाली मुख्‍य रूप से शुक्र और बृहस्‍पति की स्थिति पर निर्भर करती है। कि आपका पार्टनर आपसे प्‍यार करता है या नहीं और आपकी लव लाइफ में रोमांस है या नहीं, ये सब बातें शुक्र की स्थिति पर निर्भर करती हैं। मुख्‍य रूप से पति और पत्‍नी दोनों की ग्रह स्थिति और राशियों से तय होता है कि उनका वैवाहिक जीवन कितना सुखदायी रहेगा। आज हम आपको बता रहे हैं वैवाहिक जीवन को खुशहाल बनाने के लिए राशि के अनुसार टिप्‍स…

Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya

1:- मेष राशि:- अग्नि तत्‍व के कारक वाली इस राशि के लोग स्‍वभाव से थोड़े से उग्र माने जाते हैं और इन्‍हें गुस्‍सा थोड़ा जल्‍दी आ जाता है। इनका वैवाहिक जीवन आम तौर पर अच्‍छा होता है और इनका लाइफ पार्टनर ईमानदार होने के साथ-साथ समझदार भी होता है। आपको कन्‍या राशि के पार्टनर से बचना चाहिए। वैवाहिक जीवन की खुशहाली के लिए आप स्‍फटिक की माला को धारण कर सकते हैं।

2:- वृषभ राशि:- वृषभ राशि वालों का वैवाहिक जीवन ठीकठाक ही चलता है। पार्टनर और इनके बीच संबंधों न तो बहुत अधिक गर्माहट रहती है और न ही बहुत अधिक तल्‍खी। अगर आप अभी तक पार्टनर की तलाश में हैं तो धनु राशि से दूर रहते हुए अन्‍य राशियों के पार्टनर के बारे में विचार कर सकते हैं। आपको रोमांटिक लव लाइफ और सुखमय वैवाहिक जीवन के लिए हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए।

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

3:- मिथुन राशि:- मिथुन राशि के लोग स्‍वभाव से थोड़े से चंचल होते हैं, लेकिन इनका वैवाहिक जीवन साधारण होता है और थोड़े बहुत उतार-चढ़ाव के साथ इनकी लाइफ में सब कुछ ठीकठाक ही चलता है। हालांकि मिथुन राशि के लोगों का मन जल्‍द ही एक चीज से भर जाने के कारण इनकी शादीशुदा जिंदगी में कभीकभार इस वजह से समस्‍या आ सकती है। वृश्चिक राशि वालों से शादी करने से बचना चाहिए और शादी के बाद खुशहाली के लिए सूर्य को हल्‍दी मिलाकर जल चढ़ाना चाहिए।

4:-कर्क राशि:- कर्क राशि के लोगों को वैवाहिक जीवन में थोड़ी बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। पार्टनर के साथ इनके विचार मेल नहीं खाते हैं और इस वजह से इनके बीच कहासुनी हो जाती है। आपको कन्‍या राशि के लोगों से शादी करने से बचना चाहिए। शनिदेव की उपासना करने से आपको खुशी प्राप्‍त होगी।

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5:-सिंह राशि:- सूर्य के स्‍वामित्‍व वाली इस राशि के लोगों का वैवाहिक जीवन शुरू में थोड़ा कठिनाइयों से भरा होता है और बाद में धीरे-धीरे सब कुछ सही होने लगता है। शुरू में पार्टनर से इनकी नहीं पटती और बाद में दोनों के बीच एक प्रकार की समझ बन जाने के कारण जिंदगी आराम से कटती है। इनको मकर राशि के लोगों से शादी नहीं करनी चाहिए।

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6:-कन्‍या राशि:- इनका वैवाहिक जीवन शुरू में थोड़ा सा खराब हो सकता है, लेकिन बाद में इनके अपने ही प्रयासों से सब कुछ सही होने लगता है। माना जाता है कि कन्‍या राशि वालों के पार्टनर उनसे प्‍यार तो बहुत करते हैं, लेकिन उन्‍हें अधिक टाइम नहीं दे पाते हैं। इनको कर्क ओर मेष राशि वालों से विवाह नहीं करना चाहिए। सोमवार को शिवजी की पूजा इन्‍हें लाभ दायक रहेगी।

7:-तुला राशि:- शुक्र के स्‍वामित्‍व वाली तुला राशि के लोगों का वैवाहिक जीवन आसान नहीं होता है। दरअसल इस राशि के लोगों को अपने जीवन में आजादी और मस्‍ती के साथ रहना पसंद होता है। ऐसे में पार्टनर के साथ तालमेल बैठाना इनके लिए आसान नहीं होता है। इन्‍हें मीन राशि के लोगों से शादी नहीं करनी चाहिए। ऊं दुर्गाय नम: का जप करने से इन्‍हें लाभ होगा।

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8:-वृश्चिक राशि:- बात करें अगर वृश्चिक राशि के लोगों के वैवाहिक जीवन की तो यह औसत ही होता है। कहने को तो इनकी मैरिड लाइफ में लड़ाई-झगड़े नहीं होते, लेकिन रोमांस को लेकर भी खासा उत्‍साह नहीं देखने को मिलता। इनको मिथुन राशि के पार्टनर से विवाह नहीं करना चाहिए। सुखी वैवाहिक जीवन के लिए इन्‍हें हीरा या फिर स्‍फटिक धारण करना चाहिए।

9:- धनु राशि:- इनकी शादी में सब कुछ शानदार चलता है। हालांकि पार्टनर के साथ कभी-कभी मतभेद होते हैं, लेकिन दोनों के बीच प्‍यार उससे ज्‍यादा होता है। इनको वृषभ राशि वालों से शादी नहीं करनी चाहिए। तुलसी के नीचे रोजाना दीपक जलाने से आपको हर प्रकार के लाभ होंगे।

Horoscope

10:- मकर राशि:- इनके वैवाहिक जीवन की सबसे खास बात यह होती है कि पार्टनर के साथ इनका झगड़ा बहुत होता है, लेकिन दोनों के बीच प्‍यार बहुत होता है। बहुत देर तक पार्टनर से बात किए बिना ये रह नहीं पाते हैं। इनको सिंह राशि वालों से दूर रहना चाहिए। शिवजी की उपासना इनके लिए लाभदायी है।

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11:-कुंभ राशि:- कुंभ राशि के जातकों का अपने पार्टनर से बहुत झगड़ा होता है। जीवन में प्रेम तो होता है, लेकिन आपसी सामंजस्‍य की भारी कमी होने के कारण ये पार्टनर के साथ सुख से नहीं रह पाते हैं। इनको कर्क राशि वालों से दूर रहना चाहिए। वैवाहिक जीवन में खुशहाली के लिए आपको सूर्य की उपासना रोजाना करनी चाहिए।

12:-मीन राशि:- मीन राशि वालों का वैवाहिक जीवन आराम से कटता है। इनका पार्टनर भी बहुत समझदार होता है जो कि धैर्य के साथ इनकी बातों को सुनता है। हालांकि कई बार धन की कमी के कारण इनके जीवन में परेशानी आती है। इन्‍हें तुला राशि वालों से शादी करने से बचना चाहिए। आपको सुख प्राप्‍त करने के लिए अक्‍सर पौधरोपण करते रहना चाहिए…….!!

Gemstone Suggestion

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Detailed story of Lord Sri Jagannath Ji https://www.astrologyofmylife.com/detailed-story-of-lord-sri-jagannath-ji/ https://www.astrologyofmylife.com/detailed-story-of-lord-sri-jagannath-ji/#respond Fri, 03 Jul 2020 19:07:49 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17188 एक बार भगवान श्री कृष्ण सो रहे थे और निद्रावस्था में उनके मुख से राधा जी का नाम निकला. पटरानियों को लगा कि वह प्रभु की इतनी सेवा करती है परंतु प्रभु सबसे ज्यादा राधा जी का ही स्मरण रहता है। रुक्मिणी जी एवं अन्य रानियों ने रोहिणी जी से राधा रानी व श्री कृष्ण …
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एक बार भगवान श्री कृष्ण सो रहे थे और निद्रावस्था में उनके मुख से राधा जी का नाम निकला. पटरानियों को लगा कि वह प्रभु की इतनी सेवा करती है परंतु प्रभु सबसे ज्यादा राधा जी का ही स्मरण रहता है।

रुक्मिणी जी एवं अन्य रानियों ने रोहिणी जी से राधा रानी व श्री कृष्ण के प्रेम व ब्रज-लीलाओं का वर्णन करने की प्रार्थना की. माता ने कथा सुनाने की हामी तो भर दी लेकिन यह भी कहा कि श्री कृष्ण व बलराम को इसकी भनक न मिले।

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तय हुआ कि सभी रानियों को रोहिणी जी एक गुप्त स्थान पर कथा सुनाएंगी. वहां कोई और न आए इसके लिए सुभद्रा जी को पहरा देने के लिए मना लिया गया।

सुभद्रा जी को आदेश हुआ कि स्वयं श्री कृष्ण या बलराम भी आएं तो उन्हें भी अंदर न आने देना. माता ने कथा सुनानी आरम्भ की. सुभद्रा द्वार पर तैनात थी. थोड़ी देर में श्री कृष्ण एवं बलराम वहां आ पहुंचे. सुभद्रा ने अन्दर जाने से रोक लिया।

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इससे भगवान श्री कृष्ण को कुछ संदेह हुआ. वह बाहर से ही अपनी सूक्ष्म शक्ति द्वारा अन्दर की माता द्वारा वर्णित ब्रज लीलाओं को आनंद लेकर सुनने लगे. बलराम जी भी कथा का आनंद लेने लगे।

कथा सुनते-सुनते श्री कृष्ण, बलराम व सुभद्रा के हृदय में ब्रज के प्रति अद्भुत प्रेम भाव उत्पन्न हुआ. उस भाव में उनके पैर-हाथ सिकुड़ने लगे जैसे बाल्य काल में थे. तीनों राधा जी की कथा में ऐसे विभोर हुए कि मूर्ति के समान जड़ प्रतीत होने लगे।

बड़े ध्यान पूर्वक देखने पर भी उनके हाथ-पैर दिखाई नहीं देते थे. सुदर्शन ने भी द्रवित होकर लंबा रूप धारण कर लिया. उसी समय देवमुनि नारद वहां आ पहुंचे. भगवान के इस रूप को देखकर आश्चर्यचकित हो गए और निहारते रहे।

कुछ समय बाद जब तंद्रा भंग हुई तो नारद जी ने प्रणाम करके भगवान श्री कृष्ण से कहा- हे प्रभु ! मेरी इच्छा है कि मैंने आज जो रूप देखा है, वह रूप आपके भक्त जनों को पृथ्वी लोक पर चिर काल तक देखने को मिले. आप इस रूप में पृथ्वी पर वास करें।

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भगवान श्री कृष्ण नारद जी की बात से प्रसन्न हुए और उन्होंने कहा कि ऐसा ही होगा. कलिकाल में मैं इसी रूप में नीलांचल क्षेत्र में अपना स्वरूप प्रकट करुंगा।

कलियुग आगमन के उपरांत प्रभु की प्रेरणा से मालव राज इन्द्रद्युम्न ने भगवान श्री कृष्ण, बलभद्र जी और बहन सुभद्रा जी की ऐसी ही प्रतिमा जगन्नाथ मंदिर में स्थापित कराई. यह रोचक कथा आगे पड़े।

Gemstone Suggestion

राजा इन्द्रद्युम्न श्रेष्ठ प्रजा पालक राजा थे. प्रजा उन्हें बहुत प्रेम करती थी. प्रजा सुखी और संतुष्ट थी. राजा के मन में इच्छा थी कि वह कुछ ऐसा करे जिससे सभी उन्हें स्मरण रखें।

दैवयोग से इंद्रद्युम्न के मन में एक अज्ञात कामना प्रगट हुई कि वह ऐसा मंदिर का निर्माण कराएं जैसा दुनिया में कहीं और न हो. इंद्रद्युम्न विचारने लगे कि आखिर उनके मंदिर में किस देवता की मूर्ति स्थापित करें।

राजा के मन में यही इच्छा और चिंतन चलने लगा. एक रात इसी पर गंभीर चिंतन करते सो गए. नीद में राजा ने एक सपना देखा. सपने में उन्हें एक देव वाणी सुनाई पड़ी।

इंद्रद्युम्न ने सुना- राजा तुम पहले नए मंदिर का निर्माण आरंभ करो. मूर्ति विग्रह की चिंता छोड़ दो. उचित समय आने पर तुम्हें स्वयं राह दिखाई पड़ेगी. राजा नीद से जाग उठे. सुबह होते ही उन्होंने अपने मंत्रियों को सपने की बात बताई।

Horoscope

राज पुरोहित के सुझाव पर शुभ मुहूर्त में पूर्वी समुद्र तट पर एक विशाल मंदिर के निर्माण का निश्चय हुआ. वैदिक-मंत्रोचार के साथ मंदिर निर्माण का श्रीगणेश हुआ।

राजा इंद्रद्युम्न के मंदिर बनवाने की सूचना शिल्पियों और कारीगरों को हुई. सभी इसमें योगदान देने पहुंचे. दिन रात मंदिर के निर्माण में जुट गए. कुछ ही वर्षों में मंदिर बनकर तैयार हुआ।

सागर तट पर एक विशाल मंदिर का निर्माण तो हो गया परंतु मंदिर के भीतर भगवान की मूर्ति की समस्या जस की तस थी. राजा फिर से चिंतित होने लगे. एक दिन मंदिर के गर्भगृह में बैठकर इसी चिंतन में बैठे राजा की आंखों से आंसू निकल आए।

राजा ने भगवान से विनती की- प्रभु आपके किस स्वरूप को इस मंदिर में स्थापित करूं इसकी चिंता से व्यग्र हूं. मार्ग दिखाइए. आपने स्वप्न में जो संकेत दिया था उसे पूरा होने का समय कब आएगा ? देव विग्रह विहीन मंदिर देख सभी मुझ पर हंसेंगे।

राजा की आंखों से आंसू झर रहे थे और वह प्रभु से प्रार्थना करते जा रहे थे- प्रभु आपके आशीर्वाद से मेरा बड़ा सम्मान है. प्रजा समझेगी कि मैंने झूठ-मूठ में स्वप्न में आपके आदेश की बात कहकर इतना बड़ा श्रम कराया. हे प्रभु मार्ग दिखाइए।

Life Prediction

राजा दुखी मन से अपने महल में चले गए. उस रात को राजा ने फिर एक सपना देखा. सपने में उसे देव वाणी सुनाई दी- राजन ! यहां निकट में ही भगवान श्री कृष्ण का विग्रह रूप है. तुम उन्हें खोजने का प्रयास करो, तुम्हें दर्शन मिलेंगे।

इन्द्रद्युम्न ने स्वप्न की बात पुनः पुरोहित और मंत्रियों को बताई. सभी यह निष्कर्ष पर पहुंचे कि प्रभु की कृपा सहज प्राप्त नहीं होगी. उसके लिए हमें निर्मल मन से परिश्रम आरंभ करना होगा।

भगवान के विग्रह का पता लगाने की जिम्मेदारी राजा इंद्रद्युम्न ने चार विद्वान पंडितों को सौंप दिया. प्रभु इच्छा से प्रेरित होकर चारों विद्वान चार दिशाओं में निकले।

उन चारों में एक विद्वान थे विद्यापति. वह चारों में सबसे कम उम्र के थे. प्रभु के विग्रह की खोज के दौरान उनके साथ बहुत से अलौकिक घटनाएं हुई।

Signature Design

प्रभु का विग्रह किसे मिला ? यह प्रसंग आगे पढ़ें।

पंडित विद्यापति पूर्व दिशा की ओर चले. कुछ आगे चलने के बाद विद्यापति उत्तर की ओर मुडे तो उन्हें एक जंगल दिखाई दिया. वन भयावह था. विद्यापति श्री कृष्ण के उपासक थे. उन्होंने श्री कृष्ण का स्मरण किया और राह दिखाने की प्रार्थना की।

भगवान श्रीकृष्ण की प्रेरणा से उन्हें राह दिखने लगी. प्रभु का नाम लेते वह वन में चले जा रहे थे. जंगल के मध्य उन्हें एक पर्वत दिखाई दिया. पर्वत के वृक्षों से संगीत की ध्वनि सा सुरम्य गीत सुनाई पड़ रहा था।

विद्यापति संगीत के जान कार थे. उन्हें वहां मृदंग, बंसी और करताल की मिश्रित ध्वनि सुनाई दे रही थी. यह संगीत उन्हें दिव्य लगा. संगीत की लहरियों को खोजते विद्यापति आगे बढ़ चले।

वह जल्दी ही पहाड़ी की चोटी पर पहुंच गए. पहाड़ के दूसरी ओर उन्हें एक सुंदर घाटी दिखी जहां भील नृत्य कर रहे थे. विद्यापति उस दृश्य को देखकर मंत्र मुग्ध थे. सफर के कारण थके थे पर संगीत से थकान मिट गयी और उन्हें नींद आने लगी।

अचानक एक बाघ की गर्जना सुनकर विद्यापति घबरा उठे. बाघ उनकी और दौड़ता आ रहा था. बाघ को देखकर विद्यापति घबरा गए और बेहोश होकर वहीं गिर पडे।

Shubh Muhurat

बाघ विद्यापति पर आक्रमण करने ही वाला था कि तभी एक स्त्री ने बाघ को पुकारा- बाघा..!! उस आवाज को सुनकर बाघ मौन खडा हो गया. स्त्री ने उसे लौटने का आदेश दिया तो बाघ लौट पड़ा।

बाघ उस स्त्री के पैरों के पास ऐसे लोटने लगा जैसे कोई बिल्ली पुचकार सुनकर खेलने लगती है. युवती बाघ की पीठ को प्यार से थपथपाने लगी और बाघ स्नेह से लोटता रहा।

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वह स्त्री वहां मौजूद स्त्रियों में सर्वाधिक सुंदर थी. वह भीलों के राजा विश्वावसु की इकलौती पुत्री ललिता थी. ललिता ने अपनी सेविकाओं को अचेत विद्यापति की देखभाल के लिए भेजा।

सेविकाओं ने झरने से जल लेकर विद्यापति पर छिड़का. कुछ देर बाद विद्यापति की चेतना लौटी. उन्हें जल पिलाया गया. विद्यापति यह सब देख कर कुछ आश्चर्य में थे।

ललिता विद्यापति के पास आई और पूछा- आप कौन हैं और भयानक जानवरों से भरे इस वन में आप कैसे पहुंचे. आपके आने का प्रयोजन बताइए ताकि मैं आपकी सहायता कर सकूं।

विद्यापति के मन से बाघ का भय पूरी तरह गया नहीं था. ललिता ने यह बात भांप ली और उन्हें सांत्वना देते हुए कहा- विप्रवर आप मेरे साथ चलें. जब आप स्वस्थ हों तब अपने लक्ष्य की ओर प्रस्थान करें।

विद्यापति ललिता के पीछे-पीछे उनकी बस्ती की तरफ चल दिए. विद्यापति भीलों के पाजा विश्वावसु से मिले और उन्हें अपना परिचय दिया. विश्वावसु विद्यापति जैसे विद्वान से मिलकर बड़े प्रसन्नता हुए।

विश्वावसु के अनुरोध पर विद्यापति कुछ दिन वहां अतिथि बनकर रूके. वह भीलों को धर्म और ज्ञान का उपदेश देने लगे. उनके उपदेशों को विश्वावसु तथा ललिता बड़ी रूचि के साथ सुनते थे. ललिता के मन में विद्यापति के लिए अनुराग पैदा हो गया।

विद्यापति ने भी भांप लिया कि ललिता जैसी सुंदरी को उनसे प्रेम हो गया है किंतु विद्यापति एक बड़े कार्य के लिए निकले थे. अचानक एक दिन विद्यापति बीमार हो गए. ललिता ने उसकी सेवा सुश्रुषा की।

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इससे विद्यापति के मन में भी ललिता के प्रति प्रेम भाव पैदा हो गया. विश्वावसु ने प्रस्ताव रखा की विद्यापति ललिता से विवाह कर ले. विद्यापति ने इसे स्वीकार कर लिया।

कुछ दिन दोनों के सुखमय बीते. ललिता से विवाह करके विद्यापति प्रसन्न तो था पर जिस महत्व पूर्ण कार्य के लिए वह आए थे, वह अधूरा था। यही चिंता उन्हें बार बार सताती थी।

इस बीच विद्यापति को एक विशेष बात पता चली. विश्वावसु हर रोज सवेरे उठ कर कहीं चला जाता था और सूर्योदय के बाद ही लौटता था. कितनी भी विकट स्थिति हो उसका यह नियम कभी नहीं टूटता था।

विश्वावसु के इस व्रत पर विद्यापति को आश्चर्य हुआ. उनके मन में इस रहस्य को जानने की इच्छा हुई. आखिर विश्वावसु जाता कहां है. एक दिन विद्यापति ने ललिता से इस सम्बन्ध में पूछा. ललिता यह सुनकर सहम गई।

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आखिर वह क्या रहस्य था ? क्या वह रहस्य विद्यापति के कार्य में सहयोगी था या विद्यापति पत्नी के प्रेम में मार्ग भटक गए. यह प्रसंग आगे पढ़ें

विद्यापति ने ललिता से उसके पिता द्वारा प्रतिदिन सुबह किसी अज्ञात स्थान पर जाने और सूर्योदय के पूर्व लौट आने का रहस्य पूछा. विश्ववासु का नियम किसी हाल में नहीं टूटता था चाहे कितनी भी विकट परिस्थिति हो।

ललिता के सामने धर्म संकट आ गया. वह पति की बात को ठुकरा नहीं सकती थी लेकिन पति जो पूछ रहा था वह उसके वंश की गोपनीय परंपरा से जुड़ी बात थी जिसे खोलना संभव नहीं था।

ललिता ने कहा- स्वामी ! यह हमारे कुल का रहस्य है जिसे किसी के सामने खोला नहीं जा सकता परंतु आप मेरे पति हैं और मैं आपको कुल का पुरुष मानते हुए जितना संभव है उतना बताती हूं।

यहां से कुछ दूरी पर एक गुफा है जिसके अन्दर हमारे कुल देवता हैं. उनकी पूजा हमारे सभी पूर्वज करते आए हैं. यह पूजा निर्बाध चलनी चाहिए. उसी पूजा के लिए पिता जी रोज सुबह नियमित रूप से जाते हैं।

विद्यापति ने ललिता से कहा कि वह भी उनके कुल देवता के दर्शन करना चाहते हैं. ललिता बोली- यह संभव नहीं. हमारे कुल देवता के बारे में किसी को जानने की इच्छा है, यह सुनकर मेरे पिता क्रोधित हो जाएंगे।

विद्यापति की उत्सुक्ता बढ़ रही थी. वह तरह-तरह से ललिता के अपने प्रेम की शपथ देकर उसे मनाने लगे. आखिर कार ललिता ने कहा कि वह अपने पिता जी से विनती करेगी कि वह आपको देवता के दर्शन करा दें।

ललिता ने पिता से सारी बात कही. वह क्रोधित हो गए. ललिता ने जब यह कहा कि मैं आपकी अकेली संतान हूं. आपके बाद देवता के पूजा का दायित्व मेरा होगा. इसलिए मेरे पति का यह अधिकार बनता है क्योंकि आगे उसे ही पूजना होगा।

विश्वावसु इस तर्क के आगे झुक गए. वह बोले- गुफा के दर्शन किसी को तभी कराए जा सकते हैं जब वह भगवान की पूजा का दायित्व अपने हाथ में ले ले. विद्यापति ने दायित्व स्वीकार किया तो विश्वावसु देवता के दर्शन कराने को राजी हुए।

दूसरे दिन सूर्योदय से पूर्व विद्यापति की आंखों पर पट्टी बांधकर विश्वावसु उनका दाहिना हाथ पकड़ कर गुफा की तरफ निकले. विद्यापति ने मुट्ठी में सरसों रख लिया था जिसे रास्ते में छोड़ते हुए गए।

गुफा के पास पहुंचकर विश्वावसु रुके और गुफा के पास पहुंच गए. विश्वावसु ने विद्यापति के आँखों की काली पट्टी खोल दी. उस गुफा में नीले रंग का प्रकाश चमक उठा. हाथों में मुरली लिए भगवान श्री कृष्ण का रूप विद्यापति को दिखाई दिया।

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विद्यापति आनंद मग्न हो गए. उन्होंने भगवान के दर्शन किए. दर्शन के बाद तो जैसे विद्यापति जाना ही नहीं चाहते थे. पर विश्वावसु ने लौटने का आदेश दिया. फिर उनकी आंखों पर पट्टी बांधी और दोनों लौट पड़े।

लौटने पर ललिता ने विद्यापति से पूछा. विद्यापति ने गुफा में दिखे अलौकिक दृश्य के बारे में पत्नी को बताना भी उसने उचित नहीं समझा. वह टाल गए. यह तो जानकारी हो चुकी थी कि विश्वावसु श्री कृष्ण की मूर्ति की पूजा करते हैं।

विद्यापति को आभास हो गया कि महाराज ने स्वप्न में जिस प्रभु विग्रह के बारे में देव वाणी सुनी थी, वह इसी मूर्ति के बारे में थी. विद्यापति विचार करने लगे कि किसी तरह इसी मूर्ति को लेकर राजधानी पहुंचना होगा।

वह एक तरफ तो गुफा से मूर्ति को लेकर जाने की सोच रहे थे दूसरी तरफ भील राज और पत्नी के साथ विश्वासघात के विचार से उनका मन व्यथित हो रहा था. विद्यापति धर्म-अधर्म के बारे में सोचता रहे।

फिर विचार आया कि यदि विश्वावसु ने सचमुच उसपर विश्वास किया होता तो आंखों पर पट्टी बांधकर गुफा तक नहीं ले जाता. इसलिए उसके साथ विश्वास घात का प्रश्न नहीं उठता. उसने गुफा से मूर्ति चुराने का मन बना लिया।

विद्यापति ने ललिता से कहा कि वह अपने माता-पिता के दर्शन करने के लिए जाना चाहता है. वे उसे लेकर परेशान होंगे. ललिता भी साथ चलने को तैयार हुई तो विद्यापति ने यह कह कर समझा लिया कि वह शीघ्र ही लौटेगा तो उसे लेकर जाएगा।

ललिता मान गई. विश्वावसु ने उसके लिए घोड़े का प्रबंध किया. अब तक सरसों के दाने से पौधे निकल आए थे. उनको देखता विद्यापति गुफा तक पहुंच गया. उसने भगवान की स्तुति की और क्षमा प्रार्थना के बाद उनकी मूर्ति उठाकर झोले में रख ली।

शाम तक वह राजधानी पहुंच गया और सीधा राजा के पास गया. उसने दिव्य प्रतिमा राजा को सौंप दी और पूरी कहानी सुनायी. राजा ने बताया कि उसने कल एक सपना देखा कि सुबह सागर में एक कुन्दा बहकर आएगा।

उस कुंदे की नक्काशी करवाकर भगवान की मूर्ति बनवा लेना जिसका अंश तुम्हें प्राप्त होने वाला है. वह भगवान श्री विष्णु का स्वरूप होगा. तुम जिस मूर्ति को लाए हो वह भी भगवान विष्णु का अंश है. दोनों आश्वस्त थे कि उनकी तलाश पूरी हो गई है।

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राजा ने कहा कि जब भगवान द्वारा भेजी लकड़ी से हम इस प्रतिमा का वड़ा स्वरूप बनवा लेंगे तब तुम अपने ससुर से मिलकर उन्हें मूर्ति वापस कर देना. उनके कुल देवता का इतना बड़ा विग्रह एक भव्य मंदिर में स्थापित देखकर उन्हें खुशी ही होगी।

दूसरे दिन सूर्योदय से पूर्व राजा विद्यापति तथा मंत्रियों को लेकर सागर तट पर पहुंचा. स्वप्न के अनुसार एक बड़ा कुंदा पानी में बहकर आ रहा था. सभी उसे देखकर प्रसन्न हुए. दस नावों पर बैठकर राजा के सेवक उस कुंदे को खींचने पहुंचे।

मोटी-मोटी रस्सियों से कुंदे को बांधकर खींचा जाने लगा लेकिन कुंदा टस से मस नहीं हुआ. और लोग भेजे गए लेकिन सैकड़ों लोग और नावों का प्रयोग करके भी कुंदे को हिलाया तक नहीं जा सका।

राजा का मन उदास हो गया. सेनापति ने एक लंबी सेना कुंदे को खींचने के लिए भेज दी. सारे सागर में सैनिक ही सैनिक नजर आने लगे लेकिन सभी मिल कर कुंदे को अपने स्थान से हिला तक न सके. सुबह से रात हो गई।

अचानक राजा ने काम रोकने का आदेश दिया. उसने विद्यापति को अकेले में ले जाकर कहा कि वह समस्या का कारण जान गया है. राजा के चेहरे पर संतोष के भाव थे. राजा ने विद्यापति को गोपनीय रूप से कहीं चलने की बात कही।

राजा इंद्रद्युम्न ने कहा कि अब भगवान का विग्रह बन जाएगा. बस एक काम करना होगा. भगवान श्री कृष्ण ने राजा को ऐसा क्या संकेत दे दिया था कि उसकी सारी परेशानी समाप्त हो गई. यह प्रसंग आगे पढ़ें।

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राजा इंद्रध्युम्न को भगवान की प्रेरणा से समझ में आने लगा कि आखिर प्रभु के विग्रह के लिए जो लकड़ी का कुंदा पानी में बह कर आया है वह हिल-डुल भी क्यों नहीं रहा।

राजा ने विद्यापति को बुलाया और कहा- तुम जिस दिव्य मूर्ति को अपने साथ लाए हो उसकी अब तक जो पूजा करता आया था उससे तुरंत भेंट करके क्षमा मांगनी होगी. बिना उसके स्पर्श किए यह कुंदा आगे नहीं बढ सकेगा।

राजा इंद्रद्युम्न और विद्यापति विश्वावसु से मिलने पहुंचे. राजा ने पर्वत की चोटी से जंगल को देखा तो उसकी सुंदरता को देखता ही रह गया. दोनों भीलों की बस्ती की ओर चुपचाप चलते रहे।

इधर विश्वावसु अपने नियमित दिनचर्या के हिसाब से गुफा में अपने कुल देवता की पूजा के लिए चले. वहां प्रभु की मूर्ति गायब देखी तो वह समझ गए कि उनके दामाद ने ही यह छल किया है।

विश्वावसु लौटे और ललिता को सारी बात सुना दी. विश्वावसु पीड़ा से भरा घर के आंगन में पछाड़ खाकर गिर गए. ललिता अपने पति द्वारा किए विश्वास घात से दुखी थी और स्वयं को इसका कारण मान रही थी. पिता-पुत्री दिन भर विलाप करते रहे।

उन दोनों ने अन्न का एक दाना भी न छुआ. अगली सुबह विश्वावसु उठे और सदा की तरह अपनी दिनचर्या का पालन करते हुए गुफा की तरफ बढ़ निकले. वह जानते थे कि प्रभु का विग्रह वहां नहीं है फिर भी उनके पैर गुफा की ओर खींचे चले जाते थे।

विश्वावसु के पीछे ललिता और रिश्तेदार भी चले. विश्वावसु गुफा के भीतर पहुंचे. जहां भगवान की मूर्ति होती थी उस चट्टान के पास खड़े होकर हाथ जोड़ कर खडे रहे. फिर उस ऊंची चट्टान पर गिर गए और बिलख–बिलख कर रोने लगे. उनके पीछे प्रजा भी रो रही थी।

एक भील युवक भागता हुआ गुफा के पास आया और बताया कि उसने महाराज और उनके साथ विद्यापति को बस्ती की ओर से आते देखा है. यह सुन कर सब चौंक उठे. विश्वावसु राजा के स्वागत में गुफा से बाहर आए लेकिन उनकी आंखों में आंसू थे।

राजा इंद्रद्युमन विश्वावसु के पास आए और उन्हें अपने हृदय से लगा लिया. राजा बोले- भीलराज, तुम्हारे कुल देवता की प्रतिमा का चोर तुम्हारा दामाद नहीं मैं हूं. उसने तो अपने महाराज के आदेश का पालन किया. यह सुन कर सब चौंक उठे।

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विश्वावसु ने राजा को आसन दिया. राजा ने उस विश्वावसु को शुरू से अंत तक पूरी बात बता कर कहा कि आखिर क्यों यह सब करना पड़ा. फिर राजा ने उनसे अपने स्वप्न और फिर जगन्नाथ पुरी में सागर तट पर मंदिर निर्माण की बात कह सुनाई।

राजा ने विश्वावसु से प्रार्थना की- भील सरदार विश्वावसु, कई पीढ़ियों से आपके वंश के लोग भगवान की मूर्ति को पूजते आए हैं. भगवान के उस विग्रह के दर्शन सभी को मिले इसके लिए आपकी सहायता चाहिए।

ईश्वर द्वारा भेजे गए लकड़ी के कुंदे से बनी मूर्ति के भीतर हम इस दिव्य मूर्ति को सुरछित रखना चाहते हैं. अपने कुल की प्रतिमा को पुरी के मंदिर में स्थापित करने की अनुमति दो. उस कुंदे को तुम स्पर्श करोगे तभी वह हिलेगा

विश्वावसु राजी हो गए. राजा सपरिवार विश्वावसु को लेकर सागर तट पर पहुंचे. विश्वावसु ने कुंदे को छुआ. छूते ही कुंदा अपने आप तैरता हुआ किनारे पर आ लगा. राजा के सेवकों ने उस कुंदे को राज महल में पहुंचा दिया।

अगले दिन मूर्तिकारों और शिल्पियों को राजा ने बुलाकर मंत्रणा की कि आखिर इस कुंदे से कौन सी देवमूर्ति बनाना शुभ दायक होगा. मूर्तिकारों ने कह दिया कि वे पत्थर की मूर्तियां बनाना तो जानते हैं लेकिन लकड़ी की मूर्ति बनाने का उन्हें ज्ञान नहीं।

एक नए विघ्न के पैदा होने से राजा फिर चिंतित हो गए. उसी समय वहां एक बूढा आया. उसने राजा से कहा- इस मंदिर में आप भगवान श्री कृष्ण को उनके भाई बलभद्र तथा बहन सुभद्रा के साथ विराज मान करें. इस दैवयोग का यही संकेत है।

राजा को उस बूढ़े व्यक्ति की बात से सांत्वना तो मिली लेकिन समस्या यह थी कि आखिर मूर्ति बने कैसे ? उस बूढ़े ने कहा कि मैं इस कला में कुशल हूं. मैं इस पवित्र कार्य को पूरा करूंगा और मूर्तियां बनाउंगा. पर मेरी एक शर्त है।

राजा प्रसन्न हो गए और उनकी शर्त पूछी. बूढ़े शिल्पी ने कहा- मैं भगवान की मूर्ति निर्माण का काम एकांत में करूंगा. मैं यह काम बंद कमरे में करुंगा. कार्य पूरा करने के बाद मैं स्वयं दरवाजा खोल कर बाहर आऊंगा. इस बीच कोई मुझे नहीं बुलाए।

राजा सहमत तो थे लेकिन उन्हें एक चिंता हुई और बोले- यदि कोई आपके पास नहीं आएगा तो ऐसी हालत में आपके खाने पीने की व्यवस्था कैसे होगी ? शिल्पी ने कहा- जब तक मेरा काम पूर्ण नहीं होता मैं कुछ खाता-पीता नहीं हूं।

राज मंदिर के एक विशाल कक्ष में उस बूढ़े शिल्पी ने स्वयं को 21 दिनों के लिए बंद कर लिया और काम शुरू कर दिया. भीतर से आवाजें आती थीं. महारानी गुंडीचा देवी दरवाजे से कान लगाकर अक्सर छेनी-हथौड़े के चलने की आवाजें सुना करती थीं।

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महारानी रोज की तरह कमरे के दरवाजे से कान लगाए खड़ी थीं. 15 दिन बीते थे कि उन्हें कमरे से आवाज सुनायी पडनी बंद हो गई. जब मूर्ति कार के काम करने की कोई आवाज न मिली तो रानी चिंतित हो गईं।

उन्हें लगा कि वृद्ध आदमी है, खाता-पीता भी नहीं कहीं उसके साथ कुछ अनिष्ट न हो गया हो. व्याकुल होकर रानी ने दरवाजे को धक्का देकर खोला और भीतर झांककर देखा।

महारानी गुंडीचा देवी ने इस तरह मूर्ति कार को दिया हुआ वचन भंग कर दिया था. मूर्ति कार अभी मूर्तियां बना रहा था. परंतु रानी को देखते ही वह अदृश्य हो गए. मूर्ति निर्माण का कार्य अभी तक पूरा नहीं हुआ था. हाथ-पैर का निर्माण पूर्ण नहीं हुआ था।

वृद्ध शिल्प कार के रूप में स्वयं देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा आए थे. उनके अदृश्य होते ही मूर्तियां अधूरी ही रह गईं. इसी कारण आज भी यह मूर्तियां वैसी ही हैं. उन प्रतिमाओं को ही मंदिर में स्थापित कराया गया।

कहते हैं विश्वावसु संभवतः उस जरा बहेलिए का वंशज था जिसने अंजाने में भगवान कृष्ण की ह्त्या कर दी थी. विश्वावसु शायद कृष्ण के पवित्र अवशेषों की पूजा करता था. ये अवशेष मूर्तियों में छिपाकर रखे गए थे।

विद्यापति और ललिता के वंशज जिन्हें दैत्यपति कहते हैं उनका परिवार ही यहां अब तक पूजा करता है।

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Solar Eclipse 2020: 21 जून को लग रहा है सूर्य ग्रहण जानें, सतूक काल और उपाय https://www.astrologyofmylife.com/solar-eclipse-2020-june-21-surya-grahan-date-timing-and-sutak-kaal-chandra-grahan-sutak-on-21-june-2020/ https://www.astrologyofmylife.com/solar-eclipse-2020-june-21-surya-grahan-date-timing-and-sutak-kaal-chandra-grahan-sutak-on-21-june-2020/#respond Sat, 20 Jun 2020 07:10:58 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=17036 Sutak Kaal: चंद्र ग्रहण के बाद जून माह का दूसरा ग्रहण यानि सूर्य ग्रहण 21 जून 2020 को लगने जा रहा है. इस ग्रहण में सूतक काल मान्य है. आइए जानते हैं इसका समय और उपाय. Surya Grahan: सूर्य ग्रहण को प्रमुख खगोलीय घटना के तौर पर देखा जाता है. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण और …
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Sutak Kaal: चंद्र ग्रहण के बाद जून माह का दूसरा ग्रहण यानि सूर्य ग्रहण 21 जून 2020 को लगने जा रहा है. इस ग्रहण में सूतक काल मान्य है. आइए जानते हैं इसका समय और उपाय.

Surya Grahan: सूर्य ग्रहण को प्रमुख खगोलीय घटना के तौर पर देखा जाता है. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को विशेष महत्व दिया गया है. पौराणिक ग्रंथों यहां तक की महाभारत में भी सूर्य ग्रहण का वर्णन आता है. विशेष बात ये है कि इस सूर्य ग्रहण में सूतक लगेगा. जो की बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. सूतक ग्रहण से 12 घंटे पूर्व लगता है और इसकी समाप्ति ग्रहण के समाप्त होने के बाद ही मानी जाती है.

सूर्य ग्रहण कब लगेगा
सूर्य ग्रहण 21 जून को सुबह 10:20 बजे शुरू होगा. इसका चरम दोपहर 12:02 बजे होगा और मोक्ष दोपहर में 3:04 बजे होगा.

सूर्य ग्रहण का सूतक काल
सूर्य ग्रहण 21 जून की सुबह लगेगा इसलिए ग्रहण का सूतक काल 20 जून को शनिवार रात 21:52 बजे से आरंभ हो जायेगा और 21 जून को 13:49 पर समाप्त होगा.

 

सूतक काल क्या होता है
मान्यता है कि ग्रहण से पूर्व लगने वाले सूतक काल में कोई भी धार्मिक कार्य नहीं किए जाते हैं. इस दौरान मंदिर के कपाट भी बंद हो जाते हैं. इस दौरान अग्निकर्म भी नहीं किए जाते हैं कहा जाता है ऐसा करने से अग्निदेव नाराज होते हैं.

 

सूतक काल में न निकलें घर से
21 जून को दिन में ग्रहण लग रहा है. 20 जून की रात से ही सूतक आरंभ हो जाएगा इसलिए जिस दिन से सूतक काल आरंभ हो उसके बाद घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए.

 

ग्रहण के समय निकलने वाली ऊर्जा से बचें
ग्रहण के समय ग्रह पीड़ित हो जाता है. ग्रहण के समय कई प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है जो बुरा प्रभाव डालती है इसलिए इस ऊर्जा से बचना चाहिए. क्योंकि ये ऊर्जा मनुष्य की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं. इसलिए ग्रहण के बाद स्नान करना चाहिए.

 

न बनाएं, न खाएं भोजन
ग्रहण के समय भोजन नहीं बनाना चाहिए और न ही भोजन करना चाहिए. वहीं गर्भवती महिलाओं को भी इस दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए.

Surya Grahan ke Prabhav se kaise bachein

  1. सूर्य ग्रहण के समय हर किसी को अपने इष्ट देवता को मन ही मन याद करना चाहिए और उनसे कुशल मंगल की कामना करनी चाहिए।
  2. सूर्य ग्रहण के समय किसी भी ईश्वर के बीज मंत्र का जाप करें। इसके अलावा चालीसा पढ़ना और भजन कीर्तन करना चाहिए। इस दौरान ध्यान रखें कि सब कुछ मन मे करें। भगवान की प्रतिमा को न छूएं।
  3. सूतक काल में स्नान करना जरूरी होता है। स्नान करने के बाद प्रभु उपासना करते रहें और जब ग्रहण खत्म हो जाए तो आप सर्वप्रथम एक बार फिर स्नान करें और तब देवताओं की मूर्तियों को गंगाजल छिड़ककर उन्हें शुद्ध करें।
  4. सूर्य ग्रहण काल के दौरान तुलसी के पौधे को न छूएं, बलकि ग्रहण शुरू होने से पहले तुलसी के पत्तों का बचे हुए खाने में डाल दें। इससे ग्रहण का प्रभाव बचे भोजन पर नहीं पड़ता। वहीं जब ग्रहण खत्म हो जाए तो तुलसी पर भी गंगाजल छिड़ककर शुद्ध कर दें।
  5. ग्रहण के दौरान आप दीपक जलाकर गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें। ये जाप आपके संकटों को दूर कर देगा।
  6. सूर्य ग्रहण के सूतक लगने के बाद से ही भोजन करना, खाना पकाना, नहाना, शौच आदि या सोने का काम नहीं करना चाहिए।
  7. सूर्य ग्रहण के समय सूर्य देव की की मन में आराधना जरूर करें। ऐसा करने से सूर्यदेवता आप पर अपन कृपा बनाए रखेंगे।
  8. सूर्य ग्रहण के समय “ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय: नम:” और “ऊँ घृणि: सूर्याय नम:” मंत्र का जाप करते रहें।
  9. सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद दान जरूर करना चाहिए। अपनी इच्छा शक्ति अनुसार जो कुछ आप जरूरत मंद को दान दे सकते हैं दें। ग्रहण काल में दान की चीजों को छू कर रख दे और ग्रहण समाप्त होने पर उसे दान कर दें। कोई घातु, गेहूं, गुड़, घी, लाल कपड़ा, लाल फूल, केशर, मूंगा, लाल गाय, लाल चंदन, तेजफल, गुलाबी पगड़ी, गुलाबी रंग के वस्त्र, खसखस, साठी के चावल, वस्त्र, लकड़ी की वस्तु आदि का दान किया जा सकता है।
  10. याद रखें जिस जातक की कुंडली में सूर्य उच्च हो तो उससे लाल वस्तुओं का दान नही करना चाहिए। ऐसे जातक अन्न, वस्त्र, फल, पीली मिठाई आदि का दान कर सकते हैं।

ग्रहण के दौरान किए गए ये आसान से उपाय आपको कई परेशानी और विपदाओं से बचा सकते हैं।

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Medicine Bath Report https://www.astrologyofmylife.com/medicine-bath-report/ https://www.astrologyofmylife.com/medicine-bath-report/#respond Fri, 27 Dec 2019 08:02:42 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=12352 अपनी राशि अनुसार कौनसा औषधि युक्त स्नान करना चाहिए जिसके बारे में आप जरूर जानना चाहेगे। 1. मेष- मंगल प्रधान होने के कारण इस राशि के व्यक्तियों को पानी में बिल्वपत्र के वृक्ष की छाल और चंदन का चूर्ण मिलाकर स्नान करना चाहिए। 2. वृष- वृष राशि शुक्र होने के कारण सुगंधित कपूर काचरी, इलायची, …
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अपनी राशि अनुसार कौनसा औषधि युक्त स्नान करना चाहिए जिसके बारे में आप जरूर जानना चाहेगे।

1. मेष- मंगल प्रधान होने के कारण इस राशि के व्यक्तियों को पानी में बिल्वपत्र के वृक्ष की छाल और चंदन का चूर्ण मिलाकर स्नान करना चाहिए।
2. वृष- वृष राशि शुक्र होने के कारण सुगंधित कपूर काचरी, इलायची, चन्दन की थोड़ी सी मात्रा पानी में मिलाकर स्नान करना चाहिए।

Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya

3. मिथुन- मिथुन राशि के जातक बुध ग्रह से प्रभावित होते हैं अतः बुध को प्रसन्न करने के लिए गाय का गोबर जल से स्पर्श कर के स्नान करना चाहिए।
4. कर्क- कर्क राशि वाले व्यक्ति चन्द्र ग्रह से प्रभावित होते हैं। इनको अपने स्नान के जल मे सफेद चंदन की थोड़ी सी मात्रा डालकर स्नान करना चाहिए।

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5. सिंह- सिंह राशि वाले जातक सूर्य ग्रह से प्रभावित होते हैं। आपको स्नान के जल में लाल पुष्प और केसर मिलाकर स्नान करना चाहिए।
6. कन्या- कन्या राशि बुध ग्रह से प्रभावित होने के कारण से पन्ना रत्न या विधायरा की जड़ के जल से स्नान करने से बुध ग्रह का प्रभाव पड़ेगा।
7. तुला- यह राशि शुक्र प्रधान है। ऐश्वर्य एंव धन की प्राप्ति के लिए आपको मोगरे के पुष्प, गुलाब जल व चांदी को जल में मिलाकर स्नान करना चाहिए।

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

8. वृश्चिक- जलतत्व की राशि होने से आपको लाल गुलाब, मुंगा रत्न डालकर उस जल से स्नान करना चाहिए। मुंगा न मिलने पर इस रंग के पुष्प ले सकते हैं।
9. धनु- गुरु की राशि होने से मालती के फूल या हल्दी मिले जल से स्नान करने से गुरु का शुभ प्रभाव मिलता है।
10. मकर- शनि ग्रह की प्रसन्नता के लिए स्नान के जल में काले तिल, काले उड़द जल में मिलाकर उपयोग करना चाहिए।

Prashna Kundli by Acharya Arya

11. कुंभ- राशि स्वामी शनि होने से आपको शमी वृक्ष की लकडी, बिच्छुआ की जड़, तेलिया उड़द पानी में मिलाकर स्नान करना शुभ रहेगा।
12. मीन- जलतत्व प्रधान राशि होने से सुख, समृद्धि एंव ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए जल में मोगरे के फूल, पीली सरसो, गेंदे के पुष्प को डाल कर स्नान करने से गुरु के शुभ प्रभाव मिलते हैं।

Gemstone Suggestion

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Know Your Personality According to Zodiac Sign https://www.astrologyofmylife.com/know-your-personality-according-to-zodiac-sign/ https://www.astrologyofmylife.com/know-your-personality-according-to-zodiac-sign/#respond Fri, 27 Dec 2019 07:40:48 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=12347 किस वार को आपका जन्म हुआ है? जानिए अपना व्यक्तित्व राशि के अनुसार …. आप अपने जन्म कुंडली और राशि के अनुसार जान सकते हैं अपना व्यक्तित्व और भविष्य की विशेष जानकारी और उससे जुड़ा हुआ खास योग . मेष – समझदारी से स्थिति को संभालिए, कार्यस्थल पर स्थिति प्रतिकूल हो सकती है। आपके अच्छे …
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किस वार को आपका जन्म हुआ है? जानिए अपना व्यक्तित्व राशि के अनुसार ….

आप अपने जन्म कुंडली और राशि के अनुसार जान सकते हैं अपना व्यक्तित्व और भविष्य की विशेष जानकारी और उससे जुड़ा हुआ खास योग .

मेष –

समझदारी से स्थिति को संभालिए, कार्यस्थल पर स्थिति प्रतिकूल हो सकती है। आपके अच्छे स्वभाव के कारण आपको अच्छी आमदनी होने वाली है।
संपत्ति विवाद को जल्दी से निपटा लें अन्यथा स्थिति बिगड़ सकती है।

घरेलू मोर्चे पर परिवर्तन से आपको खुशी मिलेगी।
कमाई के अन्य स्रोत से मोटी आमदनी आने वाली है। कार्यस्थल पर स्थिति आपके पक्ष में रहेगी। अच्छे स्वास्थ्य के लिए किया गया प्रयास सफल होगा।
शुभ अंक : 15 शुभ रंग : सफेद

Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya

वृषभ-
स्थिति से समझौता नहीं करने की वजह से कार्यक्षेत्र में आपको छटपटाहट हो सकती है। किसी मजबूरी की वजह से आप पारिवारिक समारोह में शामिल नहीं हो पाएंगे।

किसी बीमारी में घरेलू उपचार करना आपके लिए विशेष लाभदायी साबित होने वाला है। छुट्टी के दरमियान आपके जीवन में कोई आ सकता है। आपको प्यार होने वाला है, दिल थामकर बैठिए।
शुभ अंक : 8 शुभ रंग : बैंगनी

मिथुन –
कार्यस्थल पर आपके कामकाज की शैली पर सवाल उठाए जा सकते हैं इसलिए तैयार रहें। शैक्षणिक मोर्चे पर आपको अपना दिमाग शांत रखने की जरूरत है, नहीं तो आपका प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

घर में तनाव रहेगा। घर का कोई सदस्य अस्वस्थ भी हो सकता है। जीवनसाथी के साथ वक्त गुजारने से तनाव कम हो सकता है। कुछ लोगों को नौकरी में तरक्की मिल सकती है। शुभ अंक : 9 शुभ रंग : भूरा

Horoscope

कर्क –
रुकावटों को दूर करने में आप सक्षम हो सकते हैं। शैक्षणिक मोर्चे पर बहुत शुभ रहने वाला है। किसी के द्वारा छोड़ी हुई परियोजना आपके कंधे पर आ सकती है। दोस्तों से मुलाकात की संभावना है।

आपकी खूबियों की वजह से आपको कई सारा काम मिल सकता है जिसकी बदौलत आपकी आमदनी बढ़ने की संभावना है। रोमांटिक मोर्चे पर थोड़ा तनाव हो सकता है। शुभ अंक : 22 शुभ रंग : नीला

सिंह-
कार्यस्थल पर स्थिति आपके विपरीत रहेगी। आपको कुछ कठोर कदम भी उठाना पड़ सकता है। शैक्षणिक मोर्चे पर आपको किसी के साथ समझौता करना पड़ सकता है। घर में किसी के साथ बहस होने के कारण तनाव की स्थिति रहने वाली है। किसी सामाजिक समारोह की वजह से आपका काफी समय बर्बाद हो सकता है।

आप में से कुछ लोग किसी अपने की कंपनी के लिए मदद कर सकते हैं। संपत्ति का मुद्दा बिगड़ सकता है, लेकिन उसे कानूनी पचड़े में जाने से रोकें।
शुभ अंक : 5 शुभ रंग : हरा

Varshphal Report

कन्या-
शैक्षणिक मोर्चे पर आपके जुनून का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। कार्यस्थल पर आपकी काबिलियत का डंका बजेगा। बड़ी परियोजना मिल सकती है जिसके लिए आपको विदेश जाने का मौका मिलेगा। आपको किसी से प्यार हो सकता है।

घर की तलाश में लगे लोगों को पसंद का घर मिल सकता है, जो आपके बजट में होगा। पैसे को लेकर आपको थोड़ा सख्त होना होगा। समाज को नजरअंदाज करना सही नहीं होगा। स्वास्थ्य को लेकर सजग रहें।
शुभ अंक : 3 शुभ रंग : गहरा पीला

तुला –
मेहनत और काम के प्रति समर्पण की बदौलत आपको अपने काम में कामयाबी मिल सकती है। शैक्षणिक स्तर पर किसी प्रोजेक्ट में आप व्यस्त रहेंगे। घर में किसी युवक की सफलता से घर के सदस्यों का सिर ऊंचा हो सकता है।

आर्थिक मोर्चे पर आप मजबूत स्थिति में होंगे।
आप रोमांटिक मूड में रहेंगे। संपत्ति खरीदने से बचें। स्वास्थ्य सामान्य बना रहेगा।
शुभ अंक : 17 शुभ रंग : हरा

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

वृश्चिक-
आप में से कुछ लोग नए करियर की शुरुआत कर सकते हैं। कार्यस्थल पर आप कई काम एकसाथ पूरा कर सकते हैं। सामाजिक स्तर पर आपको बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले कि आप बदनाम हों,
उसे खारिज कर देना सही होगा।

कुछ लोग ऑफिशियल काम से शहर से बाहर यात्रा पर जा सकते हैं। कोई नई संपत्ति खरीदे जाने के संकेत हैं। घरेलू मोर्चे पर आपको जिसके साथ की जरूरत है, वो आपकी मदद कर सकता है। स्वास्थ्य सामान्य बना रहेगा।
शुभ अंक : 17 शुभ रंग : गहरा मरकत

Career Report : One Year

धनु-
आप काफी व्यस्त रहने वाले हैं। शैक्षणिक स्तर पर किसी प्रोजेक्ट को पूरा करने में व्यस्त रह सकते हैं। पेशेवर मोर्चे पर निर्णय देने से पहले सारे तथ्य इकट्ठा कर लें।

प्रेमी चिंतित रह सकते हैं। मनोदशा बदलने की कोशिश करें। कोई बड़ा घरेलू उपकरण खरीदने का मन बना सकते हैं, खरीदने से पहले सावधानी रखना हितकर होगा। शुभ अंक : 10 शुभ रंग : नीला

मकर –
घर खरीदने के लिए लोन लेने की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं। आपके ऊपर वो काम करने के लिए जोर दिया जा सकता है जिसे लेकर आप आशंकित हैं,
लेकिन ठंडे दिमाग से सोचने पर आप कदम बढ़ा सकते हैं। शुभ अंक : 11 शुभ रंग : दूधिया

कुंभ –
आपके लिए बहुत अच्छा रहने वाला है। पेशेवर मोर्चे पर जिस सफलता का आपको इंतजार था, वो संभव हो सकता है। शैक्षणिक मोर्चे पर आपकी असाधारण उपलब्धि आपकी प्रतिष्ठा बढ़ा सकती है।

आपको विरासत में धन या पैसा मिल सकता है। शादीयोग्य लोगों की जल्दी ही शादी हो सकती है। आपको किसी के प्रति प्यार का एहसास हो सकता है। किसी शहर का दौरा आपके लिए मजेदार होने वाला है।
शुभ अंक : 4 शुभ रंग : नीला

Gemstone Suggestion

मीन
स्वयं के हित के लिए आप घर का माहौल बिगाड़ सकते हैं। कुछ लोगों का प्यार धीरे-धीरे परवान चढ़ रहा है। विदेश जाने का आपका सपना पूरा होने वाला है।

संपत्ति खरीदने के लिए आप सभी औपचारिकता पूरी कर सकते हैं। पेशेवर स्तर पर आप जो भी फैसला लेते हैं,
उसकी जानकारी अपने वरिष्ठ को देना हितकर होगा। पैसा निवेश करने से पहले सबसे राय ले सकते हैं, पर फैसला अपने मन से ही करेंगे।
शुभ अंक : 3 शुभ रंग : गहरा पीला

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शिव भक्तों के लिए सावन पर विशेष https://www.astrologyofmylife.com/special-for-shiv-bhagat-on-sawan/ https://www.astrologyofmylife.com/special-for-shiv-bhagat-on-sawan/#respond Mon, 15 Jul 2019 17:10:20 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=5088 शिव भक्तों के लिए सावन पर विशेष 17 जुलाई से सुरु हो रहा है सावन 5 सोमवार का संयोग:– सावन का पूरा महीना ही जहां अराधना के लिए विशेष है तो वहीं 5 दिन सावन सोमवार के भी भक्तों के लिए व्रत रखने को मिलेंगे। प्रथम सावन सोमवार22 जुलाई को, दूसरा 29 जुलाई को, तीसरा …
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शिव भक्तों के लिए सावन पर विशेष


17 जुलाई से सुरु हो रहा है सावन

5 सोमवार का संयोग:–

सावन का पूरा महीना ही जहां अराधना के लिए विशेष है तो वहीं 5 दिन सावन सोमवार के भी भक्तों के लिए व्रत रखने को मिलेंगे।

प्रथम सावन सोमवार22 जुलाई को,
दूसरा 29 जुलाई को,
तीसरा 5अगस्त,
चौथा सोमवार 12 अगस्त और
19वां सोमवार को होगा।

इस दिन भाई बहन के पवित्र बंधन का त्यौहार रक्षाबंधन भी मनेगा।

Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya

इस मास के प्रत्येक सोमवार को शिवलिंग पर कुछ विशेष वास्तु अर्पित की जाती है जिसे शिवामुट्ठी कहते है।

1. प्रथम सोमवार को कच्चे चावल एक मुट्ठी,

2. दूसरे सोमवार को सफेद तिल् एक मुट्ठी,

3. तीसरे सोमवार को खड़े मूँग एक मुट्ठी,

4. चौथे सोमवार को जौ एक मुट्ठी और

5. यदि जिस मॉस में पांच सोमवार हो तो पांचवें सोमवार को सतुआ चढ़ाने जाते हैं।

यदि पांच सोमवार न हो तो आखरी सोमवार को दो मुट्ठी भोग अर्पित करते है।

Horoscope

माना जाता है कि श्रावण मास में शिव की पूजा करने से सारे कष्ट खत्म हो जाते हैं। महादेव शिव सर्व समर्थ हैं। वे मनुष्य के समस्त पापों का क्षय करके मुक्ति दिलाते हैं। इनकी पूजा से ग्रह बाधा भी दूर होती है।

1. सूर्य से संबंधित बाधा है, तो विधिवत या पंचोपचार के बाद लाल आक के पुष्प एवं पत्तों से शिव की पूजा करनी चाहिए।

2. चंद्रमा से परेशान हैं, तो प्रत्येक सोमवार शिवलिंग पर गाय का दूध अर्पित करें। साथ ही सोमवार का व्रत भी करें।

3. मंगल से संबंधित बाधाओं के निवारण के लिए गिलोय की जड़ी-बूटी के रस से शिव का अभिषेक करना लाभप्रद रहेगा।

4. बुध से संबंधित परेशानी दूर करने के लिए विधारा की जड़ी के रस से शिव का अभिषेक करना ठीक रहेगा।

5. बृहस्पति से संबंधित समस्याओं को दूर करने के लिए प्रत्येक बृहस्पतिवार को हल्दी मिश्रित दूध शिवलिंग पर अर्पित करना चाहिए।

6. शुक्र ग्रह को अनुकूल बनाना चाहते हैं, तो पंचामृत एवं घृत से शिवलिंग का अभिषेक करें।

7. शनि से संबंधित बाधाओं के निवारण के लिए गन्ने के रस एवं छाछ से शिवलिंग का अभिषेक करें।

8-9. राहु-केतु से मुक्ति के लिए कुश और दूर्वा को जल में मिलाकर शिव का अभिषेक करने से लाभ होगा।

शास्त्रों में मनोरथ पूर्ति व संकट मुक्ति के लिए अलग-अलग तरह की धारा से शिव का अभिषेक करना शुभ बताया गया है।

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अलग-अलग धाराओं से शिव अभिषेक का फल- जब किसी का मन बेचैन हो, निराशा से भरा हो, परिवार में कलह हो रहा हो, अनचाहे दु:ख और कष्ट मिल रहे हो तब शिव लिंग पर दूध की धारा चढ़ाना सबसे अच्छा उपाय है।

इसमें भी शिव मंत्रों का उच्चारण करते रहना चाहिए।

1. वंश की वृद्धि के लिए शिवलिंग पर शिव सहस्त्रनाम बोलकर घी की धारा अर्पित करें।

2. शिव पर जलधारा से अभिषेक मन की शांति के लिए श्रेष्ठ मानी गई है।

3. भौतिक सुखों को पाने के लिए इत्र की धारा से शिवलिंग का अभिषेक करें।

4. बीमारियों से छुटकारे के लिए शहद की धारा से शिव पूजा करें।

5. गन्ने के रस की धारा से अभिषेक करने पर हर *सुख और आनंद मिलता है*।

6. सभी धाराओं से श्रेष्ठ है गंगाजल की धारा। शिव को गंगाधर कहा जाता है। शिव को गंगा की धार बहुत प्रिय है। गंगा जल से शिव अभिषेक करने पर चारों पुरुषार्थ की प्राप्ति होती है। इससे अभिषेक करते समय महामृत्युंजय मन्त्र जरुर बोलना चाहिए।

Career Report : One Year

कार्य सिद्धि के लिए:–

1. हर ‍इच्छा पूर्ति के लिए हैं अलग शिवलिंग
पार्थिव शिवलिंग हर कार्य सिद्धि के लिए।

2. गुड़ के शिवलिंग प्रेम पाने के लिए।

3. भस्म से बने शिवलिंग सर्वसुख की प्राप्ति के लिए।

4. जौ या चावल या आटे के शिवलिंग दाम्पत्य सुख, संतान प्राप्ति के लिए।

5. दही से बने शिवलिंग ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए।

6. पीतल, कांसी के शिवलिंग मोक्ष प्राप्ति के लिए।

7. सीसा इत्यादि के शिवलिंग शत्रु संहार के लिए।

8. पारे के शिवलिंग अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष के लिए।

Name Check & Suggestion by Numerology

पूजन में रखे इन बातों का ध्यान:–

1. सावन के महीने में शिवलिंग की करें पूजा शिवलिंग जहां स्थापित हो पूरव् दिशा की ओर मुख करके नहीं बैठें।

2. शिवलिंग के दक्षिण दिशा में ही बैठकर पूजन करें।

ये होता है अभिषेक का फल:–

1. दूध से अभिषेक करने पर परिवार में कलह, मानसिक पीड़ा में शांति मिलती है।

2. घी से अभिषेक करने पर वंशवृद्धि होती है।

3. इत्र से अभिषेक करने पर भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।

4. जलधारा से अभिषेक करने पर मानसिक शान्ति मिलती है।

5. शहद से अभिषेक करने पर परिवार में बीमारियों का अधिक प्रकोप नहीं रहता।

6. गन्ने के रस की धारा डालते हुये अभिषेक करने से आर्थिक समृद्धि व परिवार में सुखद माहौल बना रहता है।

7. गंगा जल से अभिषेक करने पर चारो पुरूषार्थ की प्राप्ति होती है।

8. अभिषेक करते समय महामृत्युंजय का जाप करने से फल की प्राप्ति कई गुना अधिक हो जाती है।

9. सरसों के तेल से अभिषेक करने से शत्रुओं का शमन होता।

Panch Mukhi/ Five Faced Rudraksha

ये भी मिलते हैं फल:–

9. बिल्वपत्र चढ़ाने से जन्मान्तर के पापों व रोग से मुक्ति मिलती है।

10. कमल पुष्प चढ़ाने से शान्ति व धन की प्राप्ति होती है।

11. कुशा चढ़ाने से मुक्ति की प्राप्ति होती है।

12. दूर्वा चढ़ाने से आयु में वृद्धि होती है।

13. धतूरा अर्पित करने से पुत्र रत्न की प्राप्ति व पुत्र का सुख मिलता है।

14. कनेर का पुष्प चढ़ाने से परिवार में कलह व रोग से निवृत्ति मिलती हैं।

15. शमी पत्र चढ़ाने से पापों का नाश होता, शत्रुओं का शमन व भूत-प्रेत बाधा से मुक्ति मिलती है।
हर हर महादेव।।ॐ उमा महेश्वराय नमः।।ॐ नमो नमः।।

Vastu Check by Scientifically

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स्त्री जातक की कुंडली में चंद्रमा https://www.astrologyofmylife.com/moon-in-the-horoscope-of-the-female-caste/ https://www.astrologyofmylife.com/moon-in-the-horoscope-of-the-female-caste/#respond Sat, 13 Jul 2019 06:17:12 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=5033 जिस स्त्री जातक की कुंडली में चंद्रमा अच्छी स्थिति में होता है, वे हंसमुख और रचनात्मक होती हैं। हर काम में सक्रिय रहती हैं और उनमें नया काम करने की ललक होती है। राहू, केतू, बुध और शनि के कारण चंद्रमा पीडित हो तो स्त्री कर्कशा, रूदन करने वाली या कलहप्रिय होती है। ऎसी स्त्रयों …
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जिस स्त्री जातक की कुंडली में चंद्रमा अच्छी स्थिति में होता है, वे हंसमुख और रचनात्मक होती हैं। हर काम में सक्रिय रहती हैं और उनमें नया काम करने की ललक होती है। राहू, केतू, बुध और शनि के कारण चंद्रमा पीडित हो तो स्त्री कर्कशा, रूदन करने वाली या कलहप्रिय होती है। ऎसी स्त्रयों को रोजाना सुबह खाली पेट मिश्री के साथ मक्खन खाने की सलाह दी जाती है।

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चंद्रमा पीडित होने पर शरीर में खनिज तत्वों और कैल्शियम की कमी हो जाती है। मक्खन में उपलब्ध खनिज तत्व एवं कैल्शियम जातक के केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र को फिर से दुरूस्त करता है और जातक हंसने खिलखिलाने लगता है। चन्द्र को मजबूत करने वाले रंग और सुगन्ध चन्द्रमा के लिए सबसे अच्छा रंग सफेद व स्लेटी होता है। चमकीला नीला, हरा वा गुलाबी रंग भी सहायक होता है। आसमानी व फिरोजी रंग भी चन्द्रमा के लिए अच्छे होते है। गहरा लाल व काले रंग से परहेज करना चाहिए। चन्दन, चमेली, कमल व लिली के फूलों की सुगंध का प्रयोग करने से चन्द्रमा मजबूत होता है। चन्द्र को बलवान करने वाले मन्त्र चन्द्रमा की उपासना के लिए निम्न मन्त्र है- ऊॅ ऐं क्लीं सोमाय नामाय नमः। ऊॅ श्रॉं श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः।

Varshphal Report

ऊॅ सों सोमाय नमः उपरोक्त वर्णित किसी भी मन्त्र का विधिवत पूजन व अर्चन करके जाप करने से लाभ मिलेगा। नोट- चन्द्र उपासना में चन्द्र ग्रह सम्बन्धी स्त्रोत कवच, नामावली का जाप व पाठ अवश्य करना चाहिए। चन्द्रमा की उपासना सोमवती अमावस्या, प्रदोष या श्रवण मास के सोमवार में विशेष फलदायी होती है। किस देवता की आराधना करें चन्द्रमा के देवता वरूण देव है, इसलिए सर्वप्रथम वरूण देव की आराधना व स्तुति करनी चाहिए। चन्द्रमा एक स्त्री कारक ग्रह भी है। इसलिए देवी की आराधना करने से भी लाभ होगा। वह महान देवी, महान शक्ति के रूप में शिव पत्नी है। शिव के मस्तक में चन्द्रमा विराजमान है। अतः शिव की उपासना करने से भी चन्द्रमा की उर्जा में वृद्धि होगी। चन्द्र को बलवान करने वाले योग व प्रणायाम भक्ति आचरण (भक्ति योग) से चन्द्र उर्जा की वृद्धि होती है। हमें विशेष रूप से देवी का ध्यान करना चाहिए। भ्रामरी प्रणायाम करने से चन्द्र उर्जा की वृद्धि होती है।

Life Prediction

हमें अधिक विश्वास, ग्रहणशीलता, खुलापन विकसति करने के लिए देवी का ध्यान करिये। नियमित वज्रासन और नौकायन आसन करने से चन्द्रमा बलवान होता है। ‘‘ऊॅ” का कम से कम 108 बार उच्चारण करने से चन्द्रमा की उर्जा में वृद्धि होती है। चन्द्रमा सूर्य से प्रकाशित होता है, इसलिए सूर्य नमस्कार करने से भी कमजोर चन्द्रमा धीरे-धीरे बलवाना होने लगता है। दोनों भौहों के मध्य में आज्ञा चक्र होता है, इस बिन्दु पर निरन्तर ध्यान करने से मन नियन्त्रित होता है। मन नियन्त्रित होने से चन्द्रमा अच्छा होने लगता है। लाइफस्टाइल ठीक करने से भी चन्द्र की उर्जा में वृद्धि चन्द्र की शक्ति में वृद्धि के लिए विश्वास, शान्ति, भक्ति, देखभाल, पोषण के वातावरण को बनाने की जरूरत होती है। बुजुर्गो की सेवा व देखभाल करन से लाभ मिलता है। जिस व्यक्ति का चन्द्रमा खराब है, उसे मित्रों से, माता से व परिवार से मधुर सम्बन्ध बनायें रखने की आवश्यकता होती है। छोटे बच्चों के पालन-पोषण में मद्द करनी चाहिए।

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महिलाओं के प्रति सम्मान, संवेदशीनता व अच्छा अचारण रखने से चन्द्रमा की अनुकूलता में वृद्धि होती है। खासकर वृद्ध महिलाओं की सेवा व सहयोग करने से विशेष लाभ मिलता है। घास पर जो ओस की बॅूद होती है, वह चन्द्रमा का प्रतीक होती है। प्रातःकाल नंगे पैर से घास पर टहलने से मन व तन दोनों को शान्ति मिलती है। ऐसा करने से चन्द्रमा की अनुकूल उर्जा में विशेष वृद्धि होती है। खान-पान अच्छा रखने से चन्द्रमा मजबूत होता है हम जो भी भोजन के रूप में ग्रहण करते है, उसका सीधा असर हमारें शरीर पर पड़ता है। जब शरीर स्वस्थ्य रहेगा तो मन भी स्वस्थ्य रहेगा। चॅूकि मन का कारक चन्द्रमा है, इसलिए खान-पान का असर भी चन्द्रमा पर पड़ता है। चन्द्रमा शीतल ग्रह है, इस कारण हमें ऐसे भोज्य पदार्थो का सेंवन करना चाहिए जो शाीतल और सुपाच्य हो।

Prashna Kundli by Acharya Arya

विटामिन बी, सी और लौह तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थो को सेंवन करने से लाभ मिलता है। जैसे-गाय दूध, दही, चावल, खीर, मिश्री, नींबू, सन्तरा, अरबी, गोभी, लौकी, पनीर, मठठा, लस्सी, जौ की रोटी, मक्के की रोटी, शलजम, मूली, अनानास, मौसम्मी, अश्वगंधा आदि चीजों को सेंवन करने से कमजोर चन्द्रमा धीरे-धीरे बलवान होकर शुभ फल देने लगता है। हर हर महादेव। जय महाकाल

Gemstone Suggestion

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हम तिलक के लिए सिर पर हाथ क्यों रखते हैं? https://www.astrologyofmylife.com/why-do-we-keep-our-hands-on-head-for-tilak/ https://www.astrologyofmylife.com/why-do-we-keep-our-hands-on-head-for-tilak/#respond Tue, 09 Jul 2019 08:21:39 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=4936 तिलक लगवाते समय सिर पर हाथ क्यों रखते हैं ? तिलक बिना लगाएं हिन्दू मान्यताओं के अनुसार कोई भी पूजा-प्रार्थना नहीं होती। सूने मस्तक को अशुभ माना जाता है। तिलक लगाते समय सिर पर हाथ रखना भी हमारी एक परंपरा है। Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि …
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तिलक लगवाते समय सिर पर हाथ क्यों रखते हैं ? तिलक बिना लगाएं हिन्दू मान्यताओं के अनुसार कोई भी पूजा-प्रार्थना नहीं होती। सूने मस्तक को अशुभ माना जाता है। तिलक लगाते समय सिर पर हाथ रखना भी हमारी एक परंपरा है।

Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya

लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इसका कारण क्या है? दरअसल धर्म शास्त्रों के अनुसार सूने मस्तक को अशुभ और असुरक्षित माना जाता है। तिलक लगाने के लिए अनामिका अंगुली शांति प्रदान करती है। मध्यमा अंगुली मनुष्य की आयु वृद्धि करती है। अंगूठा प्रभाव और ख्याति तथा आरोग्य प्रदान कराता है।

Horoscope

इसीलिए राजतिलक अथवा विजय तिलक अंगूठे से ही करने की परंपरा रही है। तर्जनी मोक्ष देने वाली अंगुली है। ज्योतिष के अनुसार अनामिका तथा अंगूठा तिलक करने में सदा शुभ माने गए हैं। अनामिका सूर्य पर्वत की अधिष्ठाता अंगुली है। यह अंगुली सूर्य का प्रतिनिधित्व करती है, जिसका तात्पर्य यही है कि सूर्य के समान, दृढ़ता, तेजस्वी, प्रभाव, सम्मान, सूर्य जैसी निष्ठा-प्रतिष्ठा बनी रहे। दूसरा अंगूठा है जो हाथ में शुक्र क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करता है। शुक्र ग्रह जीवन शक्ति का प्रतीक है।

Varshphal Report

जीवन में सौम्यता, सुख-साधन तथा काम-शक्ति देने वाला शुक्र ही संसार का रचयिता है। माना जाता है कि जब अंगुली या अंगूठे से तिलक किया जाता है तो आज्ञा चक्र के साथ ही सहस्त्रार्थ चक्र पर ऊर्जा का प्रवाह होता है। सकारात्मक ऊर्जा हमारे शीर्ष चक्र पर एकत्र हो साथ ही हमारे विचार सकारात्मक हो व कार्यसिद्ध हो। इसीलिए तिलक लगावाते समय सिर पर हाथ जरूर रखना चाहिए।

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Jyotish Suggestions https://www.astrologyofmylife.com/jyotish-suggestions/ https://www.astrologyofmylife.com/jyotish-suggestions/#respond Sat, 06 Jul 2019 07:17:41 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=4853 ज्योतिषीय सलाह– 1.किसी की इस्तेमाल की गई वस्तु न लें। 2.उपयोग किये गए इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं तो भूलकर भी न लें। Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya 3.दूसरे के बिस्तर पर न लेटें न सोएं।सबके घर निमंत्रण में भोजन न करें।यदि वह व्यक्ति तामसी,अपराधी,चोर,और चरित्रहीन है,तो उसके यहां कदापि भोजन ग्रहण न करें।अन्यथा आप भी भागीदार …
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ज्योतिषीय सलाह–


1.किसी की इस्तेमाल की गई वस्तु न लें।


2.उपयोग किये गए इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं तो भूलकर भी न लें।

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3.दूसरे के बिस्तर पर न लेटें न सोएं।सबके घर निमंत्रण में भोजन न करें।यदि वह व्यक्ति तामसी,अपराधी,चोर,और चरित्रहीन है,तो उसके यहां कदापि भोजन ग्रहण न करें।अन्यथा आप भी भागीदार हो जाएंगे।इसमे कोई संशयः नही है।


4.केशर,हल्दी,रुमाल,अपने भाग्येश ग्रह के रंग की वस्तुएं दूसरों को न दें।

5.कभी किसी के हाँथ से नमक, कोयला,काली मिर्च,चमड़ा, और लोहा कभी न ले,अन्यथा आप उसके सारे संकट अपने पर ले लेंगे।

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6.घर का कबाड़ कभी बेंचे नही,मुफ्त में दे दें,अन्यथा दरिद्रता आपके घर से कभी नही जाएगी।लोग अक्सर यह गलती करते हैं।


7.तामसिक,राजसिक,अपराधी,व्यक्ति का साथ कभी न करें।अन्यथा उसके अदृश्य प्रभाव से बच नही सकते।


8.कई महानुभाव मुझसे पूंछे हैं,की वो कुछ ऐसे दुखों से पीड़ित हैं,जिसका उनसे कोई संबंध नही है।बात बिल्कुल सही है,लेकिन क्या कभी सोचा कि मैंने किस किस का साथ किया,किस किस का खाया,क्या क्या देखा,किन किन स्थानों में गया?बस इसका ध्यान रखिये अनजानी पीड़ाओं से मुक्त हो जाएंगे। शरीर मे सोना अवश्य पहने यह नकारात्मक ऊर्जा से बचाता है।

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9.पत्नी संग भी पूर्ण स्वच्छता,सात्विक भाव से किया जाय,भोग भाव से नही,बल्कि त्याग भाव से करें।पत्नी के अंतःकरण की नकारात्मकता,बाहरी मलिनता,से आप निश्चित ही प्रभावित होंगे।और पत्नी आपसे।अतः यह पूर्ण ध्यान रखें।मै, और शायद मै ही यह बताने का साहस कर रहा हूँ कि इसका जबरदस्त प्रभाव होता है।लोग कहते पाए जाते हैं कि बहु आने के बाद बर्बाद हो गए,कोई कहतें हैं,इसका आना शुभ हुआ।दहेज नही,लड़की के अंतःकरण का दहेज न लो,नही तो बर्बादी नही रुकेगी।दूसरे का धन तुम्हारे घर मे क्या प्रभाव डालेगा?कभी चिंतन किया क्या।वोअपना कबाड़ तुम्हे दे रहा है,और तुम उस कबाड़ को ले रहे हो।कहते हैं,बेटी के ब्याह के बाद उस व्यक्ति को बहुत मानसिक शांति,समृद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है।बिल्कुल सही है,क्यों कि बेटी का बाप, राहु,केतु,शनि,और अपने अन्य अनिष्टकारी ग्रहों का दान कर देता है,इसलिए उसकी बृद्धि तो होगी ही।बेटी के बाप की पूरी विपत्ति,पूरे संकट,दूल्हे के पिता जी स्वीकार कर लेते हैं।ये विज्ञान है,ये विज्ञान सम्मत है महाशय,।बस समझने का प्रयास करिये बस।मैं जो भी लिखता हूँ,शास्त्र ज्ञान के साथ जीवंत प्रमाण भी रखता हूँ।


10.रात को दूध,दही और मूली का भूलकर दान न करें।

Life Prediction

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