best astrologer in india Archives - Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India https://www.astrologyofmylife.com/tag/best-astrologer-in-india/ Best Astrologer and Vastu Consultant at Pitampura Delhi - Acharya Dr. MSD Arya, Astrologer, Numerologist, Vastu Consultant, Gems Suggestions, best vastu consultant, moksha mukti, Best Astrologer, Astrology, Lal Kitab, Numerology, Horoscope, Matchmaking Astrologer, Astro SHop, Acharya Arya, Astro Arya, Astro arjuna, BlackMagic, hindu Panchang, Rashifal, Love, vashikaran, Thantrik, Raghava Bhatt, Moksha Mukti Jyotish and vastu Sansthan Delhi INdia Mon, 06 Oct 2025 16:44:29 +0000 en-GB hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.2 https://www.astrologyofmylife.com/wp-content/uploads/2024/02/cropped-Moksha-Mukti-logo-latest-32x32.png best astrologer in india Archives - Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India https://www.astrologyofmylife.com/tag/best-astrologer-in-india/ 32 32 अंगारक योग – संघर्षकारी मंगल और राहु-केतु का योग https://www.astrologyofmylife.com/what-is-angarak-dosh/ https://www.astrologyofmylife.com/what-is-angarak-dosh/#respond Fri, 04 Jun 2021 12:14:08 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17789 संघर्षकारी मंगल और राहु-केतु का योग(Angarak Yog ek Dosh) संघर्षकारी मंगल और राहु का योग(Angarak Yog ek Dosh) Varshphal Report राहु के नैसर्गिक गुण/अवगुण राहु जातक, सिर और चेहरे, छायादार, धुएँ, बदसूरत अजीब दिखने वाला, धुएँ के रंग का (नीला या काला) रंग, मनमोहक, तर्कहीन, तर्कशील, कर्कश, हठी, तामसिक स्वभाव का, सिपाही, नकली, कपटी, स्वार्थी, …
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संघर्षकारी मंगल और राहु-केतु का योग(Angarak Yog ek Dosh)

संघर्षकारी मंगल और राहु का योग(Angarak Yog ek Dosh)

Varshphal Report

राहु के नैसर्गिक गुण/अवगुण राहु जातक, सिर और चेहरे, छायादार, धुएँ, बदसूरत अजीब दिखने वाला, धुएँ के रंग का (नीला या काला) रंग, मनमोहक, तर्कहीन, तर्कशील, कर्कश, हठी, तामसिक स्वभाव का, सिपाही, नकली, कपटी, स्वार्थी, चालाक, चालाकी, भ्रम, भ्रम, धुँआ आदि विषयों का राहु कारक है। भ्रामक, स्वार्थी, जोखिम लेने वाला, वर्जित तोड़ने वाला, चालाक, विद्रोही, धुआं, जोड़ तोड़, चिंतनशील, महत्वाकांक्षी, भूखा, प्रवर्धक आदि।

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मंगल के नैसर्गिक गुण/अवगुण मंगल ग्रह अग्नि है, जो सभी ग्रहों में सबसे अधिक प्रबल है। यह क्षत्रिय (योद्धा), राशि का स्वामी मेष, वृश्चिक 1 और 8 वीं राशि का स्वामी, सेना पुरुष, अस्त्र और शस्त्र शौर्य, वीरता, क्रोध, भूमि के गुण, विवाद, षड्यंत्र, दुर्घटना, घाव, मर्दाना शक्ति, यंत्र, वैधानिकता और मुकदमेबाजी मंगल ग्रह से संबंधित और प्रतिनिधित्व वाले सभी विषय हैं। आक्रामक, गर्म स्वभाव, योद्धा, साहस, भाईचारा, दुर्घटना, तेज बुखार, रक्तचाप, कार्रवाई, सर्जक, जुनून, इच्छा, आवेगी, ज्वालामुखी विस्फोट आदि। (Angarak Yog ek Dosh)
जब राहु और मंगल एक ही भाव में युति बनाते हैं, तो वह मंगल राहु अंगारक योग कहलाता है। मंगल ऊर्जा का स्रोत है, जो अग्नि तत्व से संबद्घ है, जबकि राहु भ्रम व नकारात्मक भावनाओं से जुड़ा हुआ है। जब दोनों ग्रह एक ही भाव में एकत्र होते हैं तो उनकी शक्ति पहले से अधिक हो जाती है।
ज्योतिष में मंगल को क्रोध, वाद विवाद, लड़ाई झगड़ा, हथियार, दुर्घटना, एक्सीडेंट, अग्नि, विद्युत आदि का कारक ग्रह माना गया है तथा राहु को आकस्मिकता, आकस्मिक घटनाएं, शत्रु, षड़यंत्र, नकारात्मक ऊर्जा, तामसिकता, बुरे विचार, छल, और बुरी आदतों का
कारक ग्रह माना गया है, इसलिए फलित ज्योतिष में मंगल और राहु के योग को बाहुत नकारात्मक और उठापटक कराने वाला योग माना गया है मंगल और राहु स्वतंत्र रूप से अलग अलग इतने नकारात्मक नहीं होते पर जब मंगल और राहु का योग होता है तो इससे मंगल और राहु की नकारात्मक प्रचंडता बहुत बढ़ जाती है जिस कारण यह योग विध्वंसकारी प्रभाव दिखाता है, मंगल राहु का योग प्राकृतिक और सामाजिक उठापटक की स्थिति तो बनाता ही है पर व्यक्तिगत रूप से भी मंगल राहु का योग नकारात्मक परिणाम देने वाला ही होता है। (Angarak Yog ek Dosh)
यदि जन्मकुंडली में मंगल और राहु एक साथ हो अर्थात कुंडली में मंगल राहु का योग हो तो सर्वप्रथम तो कुंडली के जिस भाव में यह योग बन रहा हो उस भाव को पीड़ित करता है और उस भाव से नियंत्रित होने वाले घटकों में संघर्ष की स्थिति बनी रहती है उदाहरण के लिए यदि कुंडली के लग्न भाव में मंगल राहु का योग हो तो ऐसे में स्वास्थ पक्ष की और से हमेशा कोई न कोई समस्या लगी रहेगी, धन भाव में मंगल राहु का योग होने पर आर्थिक संघर्ष और क़ुतुब के सुख में कमी होगी इसी प्रकार पंचम भाव में मंगल राहु का योग शिक्षा और संतान पक्ष को बाधित करेगा।

Horoscope

इसके अलावा कुंडली में मंगल राहु का योग होने से व्यक्ति का क्रोध विध्वंसकारी होता है, समान्य रूप से तो प्रत्येक व्यक्ति को क्रोध आता है पर कुंडली में राहु मंगल का योग होने पर व्यक्ति का क्रोध बहुत प्रचंड स्थिति में होता है और व्यक्ति अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं कर पाता और बहुत बार क्रोध में बड़े गलत कदम उठा बैठता है, कुंडली में मंगल राहु का योग होने पर जीवन में दुर्घटनाओं की अधिकता होती है और कई बार दुर्घटना या एक्सीडेंट का सामना करना पड़ता है कुंडली में मंगल राहु का योग होने पर व्यक्ति को वहां चलाने में भी सावधानी बरतनी चाहिए , कुंडली में मंगल राहु का योग होने पर व्यक्ति को शत्रु और विरोधियों की और से भी बहुत समस्याएं रहती है और जीवन में वाद विवाद तथा झगड़ों की अधिकता होती है, कुंडली में मंगल राहु का योग बड़े भाई के सुख में कमी या वैचारिक मतभेद उत्पन्न करता है और मंगल राहु के योग के नकारात्मक परिणाम के कारण ही व्यक्ति को जीवन में कर्ज की समस्या का भी सामना करना पड़ता है, इसके अलावा यदि स्त्री जातक की कुंडली में मंगल राहु का योग हो तो वैवाहिक जीवन को बिगड़ता है स्त्री की कुंडली में मंगल पति और मांगल्य का प्रतिनिधि ग्रह होता है और राहु से पीड़ित होने के कारण ऐसे में पति सुख में कमी या वैवाहिक जीवन में संघर्ष की स्थिति बनी रहती है, जिन लोगो की कुंडली में मंगल राहु का योग होता है उन्हें अक्सर जमीन जायदात से जुडी समस्याएं भी परेशान करती हैं इसके अलावा मंगल राहु का योग हाई बी.पी. मांसपेशियों की समस्या, एसिडिटी, अग्नि और विद्युत दुर्घटना जैसी समस्याएं भी उत्पन्न करता है l

संघर्षकारी मंगल और केतु का योग (Angarak Yog ek Dosh)

Married Life Report

ज्योतिष शास्त्र में जब दो ग्रहों का प्रभाव एक जैसा हो तो उस प्रभाव की मिलने की सम्भावनाये बढ जाती हैं। इसी नियम के अधार पर ज्योतिष के समस्त योगों का निर्माण होता है। योग चाहे शुभ हो या अशुभ कारण यही नियम होगा। इस नियम के अनुसार जब किसी वस्तु, तत्व या गुण का प्रतिनिधित्व करने वाले दो ग्रह(ग्रह-भाव) का सयुंक्त प्रभाव एक साथ पडें तो उन के प्रभाव पर दोहरा बल काम करता है। यह नियम ग्रह बल तथा भाव के बल पर भी निर्भर करता है। जैसे शुक्र गुरु का सम्बंध, परस्पर एक दूसरे के विपरीत होने पर भी यें जातक को अत्यधिक विद्वान बनाते हैं, कारण स्पष्ट है कि इन दोनो ही ग्रहों को गुरु का पद प्राप्त है। इसी तरह अंगारक योग भी काम करता है।(Angarak Yog ek Dosh)मंगल तथा केतु की युक्ति अंगारक योग कहलाती है। यह अंगारक योग केतु व मंगल के सन्युक्त प्रभाव से बनता है। मंगल का दूसरा नाम अंगारक है। मंगल तिक्ष्ण, क्रूर, मारक क्षमता से युक्त ग्रह हैं। मंगल का जन्म कुंडली में अकेला प्रभाव भी हानिकारक हैं। जैसा की आपको ज्ञात है कि मंगल की विशेष भावों में स्थिति मंगल दोष को उत्पन्न करती है। मंगल जन्म कुंडली में सर्वाधिक पीडादायक ग्रह होता है। मंगल के समान ही केतु भी कष्ट दायक ग्रह होता है।(Angarak Yog ek Dosh)इसीलिये ज्योतिष शास्त्र मे मंगल के समान केतु कहा जाता है। इन दोनो का जन्म कुंडली में सन्युक्त प्रभाव मंगल की दोगुणी ताकत के समान होता है। जिस भाव में यह स्थिति बनेगी उस भाव जनित फलों को इनके प्रभाव से होकर गुजरना ही पडेगा।अंगारक योग में सबसे ज्यादा अग्नि व क्रोधात्मक प्रभाव देखने को मिलता

अंगारक दोष व्यक्ति, उसके गुस्से और उसके निर्णय के इर्द-गिर्द घूमता है। इस दोष के बुरे प्रभाव मिलने का एक बडा कारण इस योग के प्रभावों को न समझ पाना है।इस योग की अनदेखी के परिणामस्वरूप यह दोष और भी हानिकारक होता है। अंदर ही अंदर सुलगती यह अग्नि एकदिन प्रचंड रूप धारण कर लेती है। अंगारक योग के कारण, क्रोध, अग्निभय, दुर्घटना, ब्लड से सम्बंधीत रोग, और स्किन की समस्यायें मुख्य रूप से होती है।

सामान्य उपाय

Gemstone Suggestion

राहु मंगल युति का भाव अनुसार अलग अलग फल मिलता है उसी के अनुसार उपाय किये जायें तो परिणाम ज्यादा बेहतर मिलते है इसके लिये कुंडली का अध्ययन करना आवश्यक है फिर भी हम पाठको के लिये कुछ सामान्य उपाय बता रहे है आशा करते है इनको करने से आप लाभान्वित होंगे।

Married Life Report

तो यहाँ हमने देखा की मंगल और राहु का योग किस प्रकार की समस्याएं उत्पन्न करता है यदि कुंडली में मंगल राहु के योग के कारण समस्याएं उत्पन्न हो रही हो तो निम्नलिखित उपाय लाभकारी होंगे –
1. ॐ अंग अंगारकाय नमः का नियमित जाप करें।
2. हनुमान चालीसा का पाठ करें।
3. प्रत्येक शनिवार को साबुत उडद का दान करें।
4. प्रत्येक मंगलवार को गाय को गुड़ खिलाएं।
5. प्रतिदिन मस्तक पर सफ़ेद चन्दन का तिलक लगाएं।
6. शनिवार एवं बुधवार के दिन सूर्योदय से ढाई घंटे के अंदर सतनाजा (7 मुट्ठी सप्तधान्य) और सवा किलो कच्चा कोयला सर से 11 बार उसारकर बहते जल में प्रवाहित करें।

।। श्री हनुमते नमः।।

Prashna Kundli by Acharya Arya

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Shiv Rudra Abhishek Upay Phal – इन द्रव्यों से करें शिव जी का रूद्राभिषेक, दूर होंगे ग्रहों के दोष और बने रहेंगे स्वास्थ्य.. https://www.astrologyofmylife.com/shiv-rudra-abhishek-upay-phal/ https://www.astrologyofmylife.com/shiv-rudra-abhishek-upay-phal/#respond Wed, 19 May 2021 17:57:27 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17783 जन्म कुंडली में कुछ ग्रह अशुभ स्थिति में भी होते हैं। इनका सीधा असर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है  ग्रहों की अशुभ स्थिति को देखते हुए यदि शिवजी का रुद्राभिषेक अलग-अलग बस्तुओं से किया जाए तो इससे ग्रहों के दोष तो दूर होंगे ही साथ ही स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा……. (Shiv Rudra Abhishek …
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जन्म कुंडली में कुछ ग्रह अशुभ स्थिति में भी होते हैं। इनका सीधा असर व्यक्ति के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है  ग्रहों की अशुभ स्थिति को देखते हुए यदि शिवजी का रुद्राभिषेक अलग-अलग बस्तुओं से किया जाए तो इससे ग्रहों के दोष तो दूर होंगे ही साथ ही स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा……. (Shiv Rudra Abhishek Upay Phal )

Horoscope

 

१:- सूर्य ग्रह:- जन्म कुंडली में सूर्य अशुभ स्थिति में होने पर हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट प्रॉब्लम, आंखों की समस्या व कमजोरी देता है।
उपाय- प्रातिदिन जल से शिवलिंग का अभिषेक करें।
२:- चंद्र ग्रह:- जन्म कुंडली में चंद्र नीच का होने से सर्दी, अस्थमा व आंखों से संबंधित समस्याएं होती हैं।
उपाय- कच्चे दूध में काले तिल मिलाकर शिवजी का अभिषेक करें।
३:- मंगल ग्रह:- जन्म कुंडली में मंगल अशुभ स्थिति में होने से खून व पेट से संबंधित बीमारियां होती हैं।
उपाय- गिलोय (औषधि) की बूटी के रस से शिवजी का अभिषेक करें.! (Shiv Rudra Abhishek Upay Phal )

Prashna Kundli by Acharya Arya

४:- बुध ग्रह:- जन्म कुंडली में बुध नीच का होने से पेट व फेफड़ों से संबंधित बीमारियां होने की आशंका रहती है।
उपाय–दूध में पीले फूल मिला कर शिवजी का अभिषेक करें।
५:-गुरु ग्रह:- जन्म कुंडली में गुरु अशुभ स्थिति में होने पर स्कीन, दांत व कफ से संबंधित बीमारियां होती हैं।
उपाय-:- विधारा की बूटी के रस से शिवजी का अभिषेक करें।
६:- शुक्र ग्रह:- जन्म कुंडली में शुक्र कमजोर होने पर यौन संक्रमण, कमजोरी व शीत से संबंधित बीमारियां होती हैं।
उपाय- पंचामृत से शिवजी का अभिषेक करें। (Shiv Rudra Abhishek Upay Phal )

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

७:- शनि देव:- जन्म कुंडली में शनि नीच का होने से अस्थमा, खांसी व घुटनों से जुड़ी समस्याएं होती हैं।
उपाय- गन्ने के रस से शिवजी का अभिषेक करें।
८:- राहु ग्रह:- जन्म कुंडली में राहु कमजोर होने से डिप्रेशन, बुखार व दुर्घटना होने की संभावनाएं रहती हैं।
उपाय- भांग या नागकेसर से शिवजी का अभिषेक करें। (Shiv Rudra Abhishek Upay Phal )

Shubh Muhurat

९:- केतु ग्रह:- जन्म कुंडली में केतु अशुभ स्थिति में होने से शुगर, कान व गुप्तांग से संबंधित रोग होते हैं।
उपाय- सरसों के तेल से शिवजी का अभिषेक करें। (Shiv Rudra Abhishek Upay Phal )

Name Check & Suggestion by Numerology

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Atma (Soul) – A New Beginning https://www.astrologyofmylife.com/atma-soul-a-new-beginning/ https://www.astrologyofmylife.com/atma-soul-a-new-beginning/#respond Fri, 12 Feb 2021 16:06:06 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17741 आत्मा जब शरीर छोड़ती है तो मनुष्य को पहले ही पता चल जाता है । वो स्वयं भी हथियार डाल देता है अन्यथा उसने आत्मा को शरीर में बनाये रखने का भरसक प्रयत्न किया होता है और इस चक्कर में कष्ट को झेला होता है । Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya अब उसके …
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आत्मा जब शरीर छोड़ती है तो मनुष्य को पहले ही पता चल जाता है । वो स्वयं भी हथियार डाल देता है अन्यथा उसने आत्मा को शरीर में बनाये रखने का भरसक प्रयत्न किया होता है और इस चक्कर में कष्ट को झेला होता है ।

Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya

अब उसके सामने उसके सारे जीवन की यात्रा चल-चित्र की तरह चल रही होती है । उधर आत्मा शरीर से निकलने की तैयारी कर रही होती है इसलिये शरीर के पाँच प्राण एक ‘धनंजय प्राण’ को छोड़कर शरीर से बाहर निकलना आरम्भ कर देते हैं ।

Horoscope with 25 Years Varsphal

ये प्राण, आत्मा से पहले बाहर निकलकर आत्मा के लिये सूक्ष्म-शरीर का निर्माण करते हैं । जोकि शरीर छोड़ने के बाद आत्मा का वाहन होता है । धनंजय प्राण पर सवार होकर आत्मा शरीर से निकलकर इसी सूक्ष्म-शरीर में प्रवेश कर जाती है ।
बहरहाल अभी आत्मा शरीर में ही होती है और दूसरे प्राण धीरे-धीरे शरीर से बाहर निकल रहे होते है कि व्यक्ति को पता चल जाता है । उसे बे-चैनी होने लगती है, घबराहट होने लगती है । सारा शरीर फटने लगता है, खून की गति धीमी होने लगती है । सांस उखड़ने लगती है । बाहर के द्वार बंद होने लगते हैं । अर्थात अब चेतना लुप्त होने लगती है और मूर्च्छा आने लगती है । फिर मूर्च्छा आ जाती है और आत्मा एक झटके से किसी भी खुली हुई इंद्री से बाहर निकल जाती है । इसी समय चेहरा विकृत हो जाता है । यही आत्मा के शरीर छोड़ देने का मुख्य चिन्ह होता है । (Atma (Soul) – A New Beginning)
इससे पहले घर के आसपास कुत्ते-बिल्ली के रोने की आवाजें आती हैं । इन पशुओं की आँखे अत्याधिक चमकीली होती है । जिससे ये रात के अँधेरे में तो क्या सूक्ष्म-शरीर धारी आत्माओं को भी देख लेते हैं । जब किसी व्यक्ति की आत्मा शरीर छोड़ने को तैयार होती है तो उसके अपने सगे-संबंधी जो मृतात्माओं के तौर पर होते है । उसे लेने आते है और व्यक्ति उन्हें यमदूत समझता है और कुत्ते-बिल्ली उन्हें साधारण जीवित मनुष्य ही समझते है और अन्जान होने की वजह से उन्हें देखकर रोते है और कभी-कभी भौंकते भी हैं ।
शरीर के पाँच प्रकार के प्राण बाहर निकलकर उसी तरह सूक्ष्म-शरीर का निर्माण करते हैं । जैसे गर्भ में स्थूल-शरीर का निर्माण क्रम से होता है । (Atma (Soul) – A New Beginning)

Atma Soul - A New Beginning - Moksha Mukti
सूक्ष्म-शरीर का निर्माण होते ही आत्मा अपने मूल वाहक धनंजय प्राण के द्वारा बड़े वेग से निकलकर सूक्ष्म-शरीर में प्रवेश कर जाती है । आत्मा शरीर के जिस अंग से निकलती है उसे खोलती, तोड़ती हुई निकलती है । जो लोग भयंकर पापी होते है उनकी आत्मा मूत्र याँ मल-मार्ग से निकलती है । जो पापी भी है और पुण्यात्मा भी है उनकी आत्मा मुख से निकलती है । जो पापी कम और पुण्यात्मा अधिक है उनकी आत्मा नेत्रों से निकलती है और जो पूर्ण धर्मनिष्ठ हैं, पुण्यात्मा और योगी पुरुष है उनकी आत्मा ब्रह्मरंध्र से निकलती है ।
अब शरीर से बाहर सूक्ष्म-शरीर का निर्माण हुआ रहता है । लेकिन ये सभी का नहीं हुआ रहता । जो लोग अपने जीवन में ही मोहमाया से मुक्त हो चुके योगी पुरुष है । उन्ही के लिये तुरंत सूक्ष्म-शरीर का निर्माण हो पाता है । अन्यथा जो लोग मोहमाया से ग्रस्त है परंतु बुद्धिमान है ज्ञान-विज्ञान से अथवा पांडित्य से युक्त है । ऐसे लोगों के लिये दस दिनों में सूक्ष्म शरीर का निर्माण हो पाता है ।
हिंदु धर्म-शास्त्र में – दस गात्र का श्राद्ध और अंतिम दिन मृतक का श्राद्ध करने का विधान इसीलिये है कि – दस दिनों में शरीर के दस अंगों का निर्माण इस विधान से पूर्ण हो जाये और आत्मा को सूक्ष्म-शरीर मिल जाये । ऐसे में, जब तक दस गात्र का श्राद्ध पूर्ण नहीं होता और सूक्ष्म-शरीर तैयार नहीं हो जाता आत्मा, प्रेत-शरीर में निवास करती है । अगर किसी कारण वश ऐसा नहीं हो पाता है तो आत्मा प्रेत-योनि में भटकती रहती है । (Atma (Soul) – A New Beginning)

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एक और बात, आत्मा के शरीर छोड़ते समय व्यक्ति को पानी की बहुत प्यास लगती है । शरीर से प्राण निकलते समय कण्ठ सूखने लगता है । ह्रदय सूखता जाता है और इससे नाभि जलने लगती है । लेकिन कण्ठ अवरूद्ध होने से पानी पिया नहीं जाता और ऐसी ही स्तिथि में आत्मा शरीर छोड़ देती है । प्यास अधूरी रह जाती है । इसलिये अंतिम समय में मुख में ‘गंगा-जल’ डालने का विधान है ।
इसके बाद आत्मा का अगला पड़ाव होता है शमशान का ‘पीपल’ । यहाँ आत्मा के लिये ‘यमघंट’ बंधा होता है । जिसमे पानी होता है । यहाँ प्यासी आत्मा यमघंट से पानी पीती है जो उसके लिये अमृत तुल्य होता है । इस पानी से आत्मा तृप्ति का अनुभव करती है ।
ये सब हिन्दू धर्म शास्त्रों में विधान है । कि – मृतक के लिये ये सब करना होता है ताकि उसकी आत्मा को शान्ति मिले ।

Life Prediction

 

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Makar Sankranti Special – Acharya Dr MSD Arya https://www.astrologyofmylife.com/makar-sankranti-special/ https://www.astrologyofmylife.com/makar-sankranti-special/#respond Mon, 11 Jan 2021 06:53:09 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17731 मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया …
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मकर संक्रांति का पौराणिक महत्व

शास्त्रों के अनुसार, दक्षिणायण को देवताओं की रात्रि अर्थात् नकारात्मकता का प्रतीक तथा उत्तरायण को देवताओं का दिन अर्थात् सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। इसीलिए इस दिन जप, तप, दान, स्नान, श्राद्ध, तर्पण आदि धार्मिक क्रियाकलापों का विशेष महत्व है। ऐसी धारणा है कि इस अवसर पर दिया गया दान सौ गुना बढ़कर पुन: प्राप्त होता है। इस दिन शुद्ध घी एवं कम्बल का दान मोक्ष की प्राप्ति करवाता है।

Shubh Muhurat

 

मकर संक्रांति से अग्नि तत्त्व की शुरुआत होती है और कर्क संक्रांति से जल तत्त्व की. इस समय सूर्य उत्तरायण होता है अतः इस समय किये गए जप और दान का फल अनंत गुना होता है मकर संक्रान्ति के अवसर पर गंगास्नान एवं गंगातट पर दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस पर्व पर तीर्थराज प्रयाग एवं गंगासागर में स्नान को महास्नान की संज्ञा दी गयी है। सामान्यत: सूर्य सभी राशियों को प्रभावित करते हैं, किन्तु कर्क व मकर राशियों में सूर्य का प्रवेश धार्मिक दृष्टि से अत्यन्त फलदायक है। यह प्रवेश अथवा संक्रमण क्रिया छ:-छ: माह के अन्तराल पर होती है। भारत देश उत्तरी गोलार्ध में स्थित है। मकर संक्रान्ति से पहले सूर्य दक्षिणी गोलार्ध में होता है अर्थात् भारत से अपेक्षाकृत अधिक दूर होता है। इसी कारण यहाँ पर रातें बड़ी एवं दिन छोटे होते हैं तथा सर्दी का मौसम होता है। किन्तु मकर संक्रान्ति से सूर्य उत्तरी गोलार्द्ध की ओर आना शुरू हो जाता है। अतएव इस दिन से रातें छोटी एवं दिन बड़े होने लगते हैं तथा गरमी का मौसम शुरू हो जाता है। दिन बड़ा होने से प्रकाश अधिक होगा तथा रात्रि छोटी होने से अन्धकार कम होगा। अत: मकर संक्रान्ति पर सूर्य की राशि में हुए परिवर्तन को अंधकार से प्रकाश की ओर अग्रसर होना माना जाता है। प्रकाश अधिक होने से प्राणियों की चेतनता एवं कार्य शक्ति में वृद्धि होगी।

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

मकर संक्रांं‍ति पूजा व‍िध‍ि (Makar Sankranti Special – Acharya Dr MSD Arya)

भविष्यपुराण के अनुसार सूर्य के उत्तरायण के दिन संक्रांति व्रत करना चाहिए। पानी में तिल मिलाकार स्नान करना चाहिए। अगर संभव हो तो गंगा स्नान करना चाहिए। इस द‍िन तीर्थ स्थान या पवित्र नदियों में स्नान करने का महत्व अधिक है।इसके बाद भगवान सूर्यदेव की पंचोपचार विधि से पूजा-अर्चना करनी चाहिए इसके बाद यथा सामर्थ्य गंगा घाट अथवा घर मे ही पूर्वाभिमुख होकर यथा सामर्थ्य गायत्री मन्त्र अथवा सूर्य के इन मंत्रों का अधिक से अधिक जाप करना चाहिये।

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मन्त्र

१- ऊं सूर्याय नम: ऊं आदित्याय नम: ऊं सप्तार्चिषे नम:

२- ऋड्मण्डलाय नम: , ऊं सवित्रे नम: , ऊं वरुणाय नम: , ऊं सप्तसप्त्ये नम: , ऊं मार्तण्डाय नम: , ऊं विष्णवे नम:

पूजा-अर्चना में भगवान को भी तिल और गुड़ से बने सामग्रियों का भोग लगाएं। तदोपरान्त ज्यादा से ज्यादा भोग प्रसाद बांटे।

इसके घर में बनाए या बाजार में उपलब्ध तिल के बनाए सामग्रियों का सेवन करें। इस पुण्य कार्य के दौरान किसी से भी कड़वे बोलना अच्छा नहीं माना गया है।

Horoscope

 

मकर संक्रांति पर अपने पितरों का ध्यान और उन्हें तर्पण जरूर देना चाहिए।

राशि के अनुसार दान योग्य वस्तु (Makar Sankranti Special – Acharya Dr MSD Arya)

मेष       – गुड़, मूंगफली दाने एवं तिल का दान करें।
वृषभ    – सफेद कपड़ा, दही एवं तिल का दान करें।
मिथुन   – मूंग दाल, चावल एवं कंबल का दान करें।
कर्क     – चावल, चांदी एवं सफेद तिल का दान करें।
सिंह     –  तांबा, गेहूं एवं सोने के मोती का दान करें।
कन्या   –  खिचड़ी, कंबल एवं हरे कपड़े का दान करें।
तुला     –  सफेद डायमंड, शकर एवं कंबल का दान करें।
वृश्चिक  –  मूंगा, लाल कपड़ा एवं तिल का दान करें।
धनु      –  पीला कपड़ा, खड़ी हल्दी एवं सोने का मोती दान करें।
मकर  –  काला कंबल, तेल एवं काली तिल दान करें।
कुंभ    –  काला कपड़ा, काली उड़द, खिचड़ी एवं तिल दान करें।
मीन   –   रेशमी कपड़ा, चने की दाल, चावल एवं तिल दान करें।

2021 Rashi Fal – Acharya Arya – Moksha Mukti

कुछ अन्य उपाय (Makar Sankranti Special – Acharya Dr MSD Arya)

सूर्य और शनि का सम्बन्ध इस पर्व से होने के कारण यह काफी महत्वपूर्ण है
कहते हैं इसी त्यौहार पर सूर्य अपने पुत्र शनि से मिलने के लिए आते हैं
आम तौर पर शुक्र का उदय भी लगभग इसी समय होता है इसलिए यहाँ से शुभ कार्यों की शुरुआत होती है
अगर कुंडली में सूर्य या शनि की स्थिति ख़राब हो तो इस पर्व पर विशेष तरह की पूजा से उसको ठीक कर सकते हैं
जहाँ पर परिवार में रोग कलह तथा अशांति हो वहां पर रसोई घर में ग्रहों के विशेष नवान्न से पूजा करके लाभ लिया जा सकता है
पहली होरा में स्नान करें,सूर्य को अर्घ्य दें
श्रीमदभागवद के एक अध्याय का पाठ करें,या गीता का पाठ करें
मनोकामना संकल्प कर नए अन्न,कम्बल ठ घी का दान करें
लाल फूल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य दें
सूर्य के बीज मंत्र का जाप करें
मंत्र “ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः”
संध्या काल में अन्न का सेवन न करें
तिल और अक्षत डाल कर सूर्य को अर्घ्य दें
शनि देव के मंत्र का जाप करें
मंत्र “ॐ प्रां प्री प्रौं सः शनैश्चराय नमः”
घी,काला कम्बल और लोहे का दान करें।

2021 – Hindu fasts festivals and dates

 

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Tulsi Vivah – तुलसी विवाह कराने से सौभाग्य और पुण्य की प्राप्ति होती है https://www.astrologyofmylife.com/tulsi-vivah/ https://www.astrologyofmylife.com/tulsi-vivah/#respond Wed, 25 Nov 2020 06:19:12 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17452 देवउठनी एकादशी को तुलसी एकादश भी कहा जाता है। तुलसी को साक्षात लक्ष्मी का निवास माना जाता है इसलिए कहा जाता है कि जो भी इस मास में तुलसी के समक्ष दीप जलाता है उसे अत्यन्त लाभ होता है। इस दिन तुलसी विवाह का भी आयोजन किया जाता है। तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से …
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देवउठनी एकादशी को तुलसी एकादश भी कहा जाता है। तुलसी को साक्षात लक्ष्मी का निवास माना जाता है इसलिए कहा जाता है कि जो भी इस मास में तुलसी के समक्ष दीप जलाता है उसे अत्यन्त लाभ होता है। इस दिन तुलसी विवाह का भी आयोजन किया जाता है। तुलसी जी का विवाह शालिग्राम से कराया जाता है। मान्यता है कि इस प्रकार के आयोजन से सौभाग्य की प्राप्ति होती है। तुलसी शालिग्राम का विवाह करने से वही पुण्य प्राप्त होता है जो माता−पिता अपनी पुत्री का कन्यादान करके पाते हैं। शास्त्रों और पुराणों में उल्लेख है कि जिन लोगों के यहां कन्या नहीं होती यदि वह तुलसी का विवाह करके कन्यादान करें तो जरूर उनके यहां कन्या होगी। इस आयोजन की विशेषता यह होती है कि विवाह में जो रीति−रिवाज होते हैं उसी तरह तुलसी विवाह के सभी कार्य किए जाते हैं साथ ही विवाह से संबंधित मंगल गीत भी गाए जाते हैं। (Tulsi Vivah)

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तुलसी विवाह की पूजन विधि (Tulsi Vivah)

जिस गमले में तुलसी का पौधा लगा है उसे गेरु आदि से सजाकर उसके चारों ओर मंडप बनाकर उसके ऊपर सुहाग की प्रतीक चुनरी को ओढ़ा दें। इसके अलावा गमले को भी साड़ी में लपेट दें और उसका श्रृंगार करें। इसके बाद सिद्धिविनायक श्रीगणेश सहित सभी देवी−देवताओं और श्री शालिग्रामजी का विधिवत पूजन करें। एक नारियल दक्षिणा के साथ टीका के रूप में रखें और भगवान शालिग्राम की मूर्ति का सिंहासन हाथ में लेकर तुलसीजी की सात परिक्रमा कराएं। इसके बाद आरती करें।

Vastu Check by Scientifically

 

भगवती तुलसी और शालिग्राम का यह है संबंध (Tulsi Vivah)

भगवती तुलसी मूल प्रकृति की ही प्रधान अंश हैं। प्रारम्भ में वे गोलोक में तुलसी नाम की गोपी थीं। भगवान के चरणों में उनका अतिशय प्रेम था। रासलीला में उनकी श्रीकृष्ण के प्रति अनुरक्ति देखकर राधाजी ने कुपित होकर उन्हें मानव योनि में जन्म लेने का शाप दे दिया। इससे वे भारत वर्ष में राजा धर्मध्वज की पुत्री हुईं। गोलोक में ही सुदामा नाम का एक गोप भी था जो भगवान श्रीकृष्ण का मुख्य पार्षद था, उसे भी किसी कारण से क्रुद्ध होकर राधाजी ने दानव योनि में जन्म लेने का शाप दे दिया। उनके शाप से अगले जन्म में वह सुदामा शंखचूड़ दानव बना। ब्रह्माजी की प्रेरणा से भगवती तुलसी का शंखचूड़ दानव से गन्धर्व विवाह संपन्न हुआ। ब्रह्माजी का वरदान प्राप्त कर उस दानवराज ने अपने पराक्रम द्वारा देवताओं को स्वर्ग से निष्कासित कर उस पर अपना अधिकार कर लिया।

देवतागण त्रस्त होकर भगवान श्रीविष्णु की शरण में गये। भगवान श्रीविष्णु ने देवताओं को शंखचूड़ के जन्म एवं वरदान आदि की सब कथा सुनायी तथा उसकी मृत्यु का उपाय बताते हुए उसे मारने के लिए भगवान शंकर को एक त्रिशूल प्रदान किया तथा यह भी बताया कि तुलसी का सतीत्व नष्ट होने पर ही उसकी मृत्यु संभव हो सकेगी। इसका भी आश्वासन भगवान श्रीविष्णु ने देवताओं को दिया। अपने कथानुसार, भगवान श्रीविष्णु ने छलपूर्वक तुलसी का सतीत्व नष्ट किया, उधर भगवान शंकर ने त्रिशूल द्वारा शंखचूड़ का वध कर डाला। पतिव्रता तुलसी को भगवान के द्वारा छलपूर्वक अपना सतीत्व नष्ट करने की जानकारी हुई तो अत्यन्त शोक संतप्त होकर उसने भगवान को पाषाण होने का शाप दे दिया।

Name Check & Suggestion by Numerology

 

तुलसी की कारुणिक अवस्था देखकर उसे समझाते हुए भगवान ने कहा− हे भद्रे! तुमने भारत में रहकर मेरे लिये बहुत समय तक तपस्या की है और साथ ही इस शंखचूड़ ने भी उस समय तुम्हारे लिये दीर्घ समय तक तपस्या की थी। तुम्हें पत्नी रूप में प्राप्त करने के बाद अंत में वह गोलोक चला गया। अब मैं तुम्हें तुम्हारी तपस्या का फल प्रदान करना उचित समझता हूं। तुम्हारा यह शरीर गण्डकी नदी के रूप में प्रसिद्ध होगा। तुम्हारा केशसमूह पुण्यवृक्ष के रूप में प्रकट होगा, जो तुलसी नाम से प्रसिद्ध होगा। देवपूजन में प्रयुक्त होने वाले समस्त पुष्पों और पत्रों में तुलसी की प्रधानता होगी। सभी लोकों में निरंतर तुम मेरे सान्निध्य में रहोगी।

मैं भी तुम्हारे शाप से पाषाण बनकर भारतवर्ष में गण्डकी नदी के तट के समीप निवास करूंगा। चारों वेदों के पढ़ने तथा तपस्या करने से जो पुण्य प्राप्त होता है, वह पुण्य शालग्राम शिला के पूजन से निश्चित रूप से सुलभ हो जाता है। उसी समय तुलसी के शरीर से गण्डकी नदी उत्पन्न हुई और भगवान श्रीहरि उसी के तट पर मनुष्यों के लिए पुण्यप्रद शालग्राम बन गये।

Vehicle Number & Colour Numerology

 

भगवान ब्रह्माजी का कथन (Tulsi Vivah)

पुराणों में उल्लेख मिलता है कि ब्रह्माजी कहते हैं कि यदि तुलसी के आधे पत्ते से भी प्रतिदिन भक्तिपूर्वक भगवान की पूजा की जाये तो भी वे स्वयं आकर दर्शन देते हैं। अपनी लगायी हुई तुलसी जितना ही अपने मूल का विस्तार करती है, उतने ही सहस्त्र युगों तक मनुष्य ब्रह्मलोक में प्रतिष्ठित होता है। यदि कोई तुलसी संयुक्त जल में स्नान करता है तो वह सब पापों से मुक्त हो भगवान श्रीविष्णु के लोक में आनन्द का अनुभव करता है।

Shubh Muhurat

 

तुलसी का महत्व (Tulsi Vivah)

जो व्यक्ति तुलसी का संग्रह करता है और लगाकर तुलसी का वन तैयार कर देता है, वह उतने से ही पापमुक्त हो ब्रह्मभाव को प्राप्त होता है। जिसके घर में तुलसी का बगीचा विद्यमान है, उसका वह घर तीर्थ के समान है, वहां यमराज के दूत नहीं जाते। तुलसीवन सब पापों को नष्ट करने वाला, पुण्यमय तथा अभीष्ट कामनाओं को देने वाला है। जो श्रेष्ठ मानव तुलसी का बगीचा लगाते हैं, वे यमराज को नहीं देखते। जो मनुष्य तुलसी काष्ठ संयुक्त गंध धारण करता है, क्रियामाण पाप उसके शरीर का स्पर्श नहीं करता। जहां तुलसी वन की छाया होती है, वहीं पितरों की तृप्ति के लिए श्राद्ध करना चाहिए। जिसके मुख में, कान में और मस्तक पर तुलसी का पत्ता दिखायी देता है, उसके ऊपर यमराज भी दृष्टि नहीं डाल सकते फिर दूतों की बात ही क्या है। जो प्रतिदिन आदरपूर्वक तुलसी की महिमा सुनता है, वह सब पापों से मुक्त हो ब्रह्मलोक को जाता है।

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

 

मान्यता है कि कार्तिक मास में तुलसी के पास दीपक जलाने से अनंत पुण्य प्राप्त होता है। तुलसी को साक्षात लक्ष्मी का निवास माना जाता है इसलिए कहा जाता है कि जो भी इस मास में तुलसी के समक्ष दीप जलाता है उसे अत्यन्त लाभ होता है।

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Remedy for shadow donation – Acharya Arya https://www.astrologyofmylife.com/remedy-for-shadow-donation-acharya-arya/ https://www.astrologyofmylife.com/remedy-for-shadow-donation-acharya-arya/#respond Sat, 18 Jul 2020 11:35:00 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17251 दैनिक जीवन की समस्या में छाया दान का उपाय ____________________________ अक्सर ऐसा होता है कि व्यक्ति का बिता हुआ काल अर्थात भुत काल अगर दर्दनाक रहा हो या निम्नतर रहा हो तो वह व्यक्ति के आने वाले भविष्य को भी ख़राब करता है और भविष्य बिगाड़ देता है। यदि आपका बीता हुआ कल आपका आज …
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दैनिक जीवन की समस्या में छाया दान का उपाय
____________________________

अक्सर ऐसा होता है कि व्यक्ति का बिता हुआ काल अर्थात भुत काल अगर दर्दनाक रहा हो या निम्नतर रहा हो तो वह व्यक्ति के आने वाले भविष्य को भी ख़राब करता है और भविष्य बिगाड़ देता है। यदि आपका बीता हुआ कल आपका आज भी बिगाड़ रहा हो और बीता हुआ कल यदि ठीक न हो तो निश्चित तोर पर यह आपके आनेवाले कल को भी बिगाड़ देगा। इससे बचने के लिए छाया दान करना चाहिये। जीवन में जब तरह तरह कि समस्या आपका भुतकाल बन गया हो तो छाया दान से मुक्ति मिलता है और आराम मिलता है।

नीचे हम सामाजिक एवं पारिवारिक जीवन की विभिन्न समस्या अनुसार छाया दान के विषय मे बता रहे है।

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1 . बीते हुए समय में पति पत्नी में भयंकर अनबन चल रही हो

अगर बीते समय में पति पत्नी के सम्बन्ध मधुर न रहा हो और उसके चलते आज वर्त्तमान समय में भी वो परछाई कि तरह आप का पीछा कर रहा हो तो ऐसे समय में आप छाया दान करे और छाया दान आप बृहस्पत्ति वार के दिन कांसे कि कटोरी में घी भर कर पति पत्नी अपना मुख देख कर कटोरी समेत मंदिर में दान दे आये इससे आप कि खटास भरे भुत काल से मुक्ति मिलेगा। और भविष्य मृदु और सुखमय रहेगा। यह प्रक्रिया कम से कम 3 बार (हफ्ते) दोहराए।

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2 . बीते हुए समय में भयावह दुर्घटना या एक्सीडेंट हुआ हो

अगर बीते समय में कोई भयंकर दुर्घटना हुई हो और उस खौफ से आप समय बीतने के बाद भी नहीं उबार पाये है। मन में हमेशा एक डर बना रहता है। आप कही भी जाते है तो आप के मन में उस दुर्घटना का भय बना रहता है तो आप छाया दान करे। आप एक मिटी के बर्तन में सरसो का तेल भर कर शनिवार के दिन अपनी छाया देख कर दान करे। इससे आप को लाभ होगा बीती हुई दर्दनाक स्मृति से छुटकारा मिलेगा। और भविष्य सुरक्षित रहेगा। यह प्रक्रिया कम से कम 2 बार (हफ्ते) दोहराए।

3 . बीते समय में व्यापर में हुए घाटे से आज भी डर लगता हो

कई बार ऐसा होता है कि बीते समय में व्यापारिक घाटा या बहुत बड़े नुकसान से आप बहुत मुश्किल से उबरे हो और आज स्थिति ठीक होने के बावजूद भी आप को यह डर सता रहा है कि दुबारा वैसा ही न हो जाये ,तो इससे बचने के लिए आप बुधवार के दिन एक पीतल कि कटोरी में घी भर कर उसमे अपनी छाया देख कर छाया पात्र समेत आप किसी ब्राह्मण को दान दे। इससे दुबारा कभी भी आप को व्यापार में घाटा नहीं होगा। और भविष्य में व्यापर भी फलता फूलता रहेगा। यह प्रक्रिया कम से कम 3 बार (हफ्ते) दोहराए।

4 . भुत काल कि कोई बड़ी बीमारी आज भी परछाई बन कर डरा रही हो

बीते समय में कई बार कोई लम्बी बीमारी के कारण व्यक्ति मानसिक तौर पर कमजोर हो जाता है। और व्यक्ति ठीक होने के बावजूद भी मानसिक तौर पर अपने भूत काल में ही घिरा रहता है और उससे उबर नहीं पाता। ऐसी स्थिति में व्यक्ति को शनिवार के दिन एक लोहे के पात्र में तिल का तेल भर कर अपनी मुख छाया देखकर उसका दान करे। इससे आप को इस स्मृति से मुक्ति मिलेगा और भविष्य में बीमार नहीं होंगे और स्वस्थ्य रहेंगे। यह प्रक्रिया कम से कम 5 बार (हफ्ते) दोहराए।

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5 लम्बे समय के बाद नौकरी मिली है लेकिन भुतकाल का डर कि फिर बेरोजगार न हो जाये

बहुत लम्बे समय की बेरोजगारी के बाद नौकरी मिलती है लेकिन मन में सदैव एक भय सताता है कि दोबारा नौकरी न चली जाये और ये सोच एक प्रेत कि तरह आपका पीछा करती है तो ऐसे स्थिति में आप सोमवार के दिन ताम्बे की एक कटोरी में शहद भर कर अपनी छाया देख कर दान करें ,इससे आप को लाभ मिलेगा। इस छाया दान से उन्नति बनी रहती है रोजगार बना रहता है। यह प्रक्रिया कम से कम 7 बार (हफ्ते) दोहराए।

6 .कुछ ऐसा काम कर चुके है जो गोपनीय है लेकिन उसके पश्चाताप से उबार नहीं पाये है

कई बार जीवन में ऐसी गलती आदमी कर देता है कि जो किसी को बता नहीं पता लेकिन मन ही मन हर पल घुटता रहता है और भविष्य में भी इस गलती से उबर नहीं पाता है तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति को पीतल कि कटोरी में बादाम का तेल भरकर उसमे अपना मुख देख कर शुक्रवार के दिन छाया दान करना चाहिएय। इससे पश्चाताप कि अग्नि से मुक्ति मिलती है ,और कि हुई गलती के दोष से मुक्ति मिलती है। यह प्रक्रिया कम से कम 11 बार (हफ्ते) दोहराए।

Horoscope

 

7 . पहली शादी टूट गयी दूसरी शादी करने जा रहे है लेकिन मन में इसके भी टूटने का डर है

संयोग वश या किसी दुर्घटनावश व्यक्ति कि पहली शादी टूट गयी है और दूसरी शादी करने जा रहे है और मन में भय है कि जैसे पहले हुआ था वैसे दुबारा न हो जाये तो इसके लिए व्यक्ति को स्त्री हो या पुरुष उसको रविवार के दिन ताम्बे के पात्र में घी भरकर उसमे अपना मुख देख कर छाया दान करे। इससे भुत काल में हुई घटना या दुर्घटना का भय नहीं रहेगा। और भविष्य सुखमय रहेगा। यह प्रक्रिया कम से कम 5 बार (हफ्ते) दोहराए।

Life Prediction

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Tulsi Per Diya Jalane Ka Niyam – Acharya Dr MSD Arya https://www.astrologyofmylife.com/tulsi-per-diya-jalane-ka-kiyam-acharya-arya/ https://www.astrologyofmylife.com/tulsi-per-diya-jalane-ka-kiyam-acharya-arya/#respond Mon, 06 Jul 2020 10:38:16 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17213 तुलसी पर दीया जलाने के नियम रोज शाम को तुलसी पर दीया जलाने से न केवल धनलाभ होता है बल्कि घर में सुख और समृद्धि का भी वास होता है। लेकिन शास्त्रों में दीया जलाने के कुछ नियम भी बताए गए हैं। हिंदू धर्म में तुलसी को विशेष महत्व दिया जाता है। तुलसी को मां …
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तुलसी पर दीया जलाने के नियम

रोज शाम को तुलसी पर दीया जलाने से न केवल धनलाभ होता है बल्कि घर में सुख और समृद्धि का भी वास होता है। लेकिन शास्त्रों में दीया जलाने के कुछ नियम भी बताए गए हैं।

हिंदू धर्म में तुलसी को विशेष महत्व दिया जाता है। तुलसी को मां के समान माना गया है और प्रत्येक शुभ कामों में तुलसी का प्रयोग भी किया जाता है। तुलसी के बिना भगवान विष्णु की भी पूजा अधूरी है। माना जाता है कि जिस घर में तुलसी की पूजा की जाती है। उस घर में कभी भी दरिद्रता नहीं आती। रोज शाम को तुलसी में दीपक जलाने से न केवल धनलाभ होता है। बल्कि घर में सुख और समृद्धि का भी वास होता है। लेकिन शास्त्रों में दीपक जलाने के कुछ नियम भी बताए गए हैं अगर आप उन नियमों के बारे में नहीं जानते तो आज हम आपको इसके बारे में बताएंगे तो चलिए जानते हैं तुलसी में दीया जलाने के नियमों के बारे में…

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तुलसी का पौधा अगर आपके घर में लगा हो तो यह आपके एवं परिवार के लिए बहुत ही लाभकारी रहता है। तुलसी के पौधे में देवी लक्ष्मी का निवास माना जाता है और नियमित रूप से तुलसी के पौधे का पूजन करने से ज़रूर लाभ मिलता है। रोज़ाना शाम के समय तुलसी के पौधे के नीचे दीपक जलाने से घर की दरिद्रता का नाश होता है। भगवान विष्णु को भोग अर्पण करते वक्त बिना तुलसी दल रखें वे भी भोग स्वीकार नहीं करते हैं।

Varshphal Report

 

तुलसी का पौधा घर में मौजूद दरिद्रता और नकारात्मक दोष को समाप्त करता है और साथ ही घर में लक्ष्मी जी का वास होता है।

शाम के समय तुलसी के पौधे के नीचे दीपक जलाते समय ध्यान रखें कि दीपक के नीचे आसन रखकर अर्पण करें।

माना जाता है कि बगैर आसन लगाए दीपक जलाने से वह लक्ष्मी जी ग्रहण नहीं करती हैं तो ऐसे में आपको उनकी कृपा प्राप्त नहीं होती है।

इसके लिए आप चावलों का आसन बनाकर उसपर दीपक जला सकते हैं इससे घर में लक्ष्मी का स्थिर तौर पर निवास होता है।

शास्त्रों में इसके बारे में बताया गया है कि तुलसी के पौधे के नीचे चावल का आसन बिछा कर घी का दीपक जलाने वाले व्यक्ति को ज़रूर धन लाभ होता है।

दीपक के नीचे चावलों का आसन बिछाने से आपके घर में कभी भी दरिद्रता का वास नहीं होता है और शुभ फल प्राप्त होता है।

Signature Design

 

शास्त्रों में माना गया है कि चावल एक प्रकार से शुद्धता के प्रतीक होते हैं और प्रत्येक मांगलिक कार्य में इनका इस्तेमाल किया जाता है।

भगवान विष्णु को भोग अर्पण करते समय उसमें तुलसी के पत्ते डालकर भोग लगाने से लाभ प्राप्त किया जा सकता है इसलिए इस उपाय को भी कर सकते हैं

नियमित रूप से तुलसी के पौधे में जल चढ़ाने से आपको इसका लाभ मिलेगा। आप जल में चीनी डालकर भी तुलसी जी को अर्पण कर सकते हैं।

रविवार के दिन तुलसी पूजन नहीं किया जाता है। इस दिन तुलसी के पौधे में ना तो जल चढ़ाएं, ना ही दीपक जलाएं और ना ही तुलसी के पत्तों को तोड़ें ऐसा करना अशुभ माना गया है।

Shraavana Special – 2020

 

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हस्ताक्षर से जानिये आपका व्यक्तित्व

1 जो लोग हस्ताक्षर में सिर्फ अपना नाम लिखते हैं, सरनेम नहीं लिखते हैं, वे खुद के सिद्धांतों पर काम करने वाले होते हैं। आमतौर पर ऐसे लोग किसी और की सलाह नहीं मानते हैं, ये लोग सुनते सबकी हैं, लेकिन करते अपने मन की हैं।

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2 जो लोग जल्दी-जल्दी और अस्पष्ट हस्ताक्षर करते हैं, वे जीवन में कई प्रकार की परेशानियों का सामना करते हैं। ऐसे लोग सुखी जीवन नहीं जी पाते हैं। हालांकि, ऐसे लोगों में कामयाब होने की चाहत बहुत अधिक होती है और इसके लिए वे श्रम भी करते हैं। ये लोग किसी को धोखा भी दे सकते हैं। स्वभाव से चतुर होते हैं, इसी वजह से इन्हें कोई धोखा नहीं दे सकता।

3 कुछ लोग हस्ताक्षर तोड़-मरोड़ कर या टुकड़े-टुकड़े या अलग-अलग हिस्सों में करते हैं, हस्ताक्षर के शब्द छोटे-छोटे और अस्पष्ट होते हैं जो आसानी से समझ नहीं आते हैं। सामान्यत: ऐसे लोग बहुत ही चालाक होते हैं। ये लोग अपने काम से जुड़े राज किसी के सामने जाहिर नहीं करते हैं। कभी-कभी ये लोग गलत रास्तों पर भी चल देते हैं और किसी को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

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4 जो लोग कलात्मक और आकर्षक हस्ताक्षर करते हैं, वे रचनात्मक स्वभाव के होते हैं। इन्हें किसी भी कार्य को कलात्मक ढंग से करना पसंद होता है। ऐसे लोग किसी न किसी कार्य में हुनरमंद होते हैं। इन लोगों के काम करने का तरीका अन्य लोगों से एकदम अलग होता है। ऐसे हस्ताक्षर वाले लोग पेंटर या कलाकार भी हो सकते हैं।

5 कुछ लोग हस्ताक्षर के नीचे दो लाइन खींचते हैं। ऐसे सिग्नेचर करने वाले लोगों में असुरक्षा की भावना अधिक होती है। किसी काम में सफलता मिलेगी या नहीं, इस बात का संदेह सदैव रहता है। पैसा खर्च करने में इन्हें काफी बुरा महसूस होता है अर्थात ये लोग कंजूस भी हो सकते हैं।

Career Report : One Year

6 जो लोग हस्ताक्षर करते समय नाम का पहला अक्षर थोड़ा बड़ा और पूरा उपनाम लिखते हैं, वे अद्भुत प्रतिभा के धनी होते हैं। ऐसे लोग जीवन में सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त करते हैं। ईश्वर में आस्था रखने वाले और धार्मिक कार्य करना इनका स्वभाव होता है। ऐसे लोगों का वैवाहिक जीवन भी सुखी होता है।

7 जिन लोगों के सिग्नेचर मध्यम आकार के अक्षर वाले, जैसी उनकी लिखावट है, ठीक वैसे ही हस्ताक्षर हो तो व्यक्ति हर काम को बहुत ही अच्छे ढंग से करता है। ये लोग हर काम में संतुलन बनाए रखते हैं। दूसरों के सामने बनावटी स्वभाव नहीं रखते हैं। जैसे ये वास्तव में होते हैं, ठीक वैसा ही खुद को प्रदर्शित करते हैं।

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8 जो लोग अपने हस्ताक्षर को नीचे से ऊपर की ओर ले जाते हैं, वे आशावादी होते हैं। निराशा का भाव उनके स्वभाव में नहीं होता है। ऐसे लोग भगवान में आस्था रखने वाले होते हैं। इनका उद्देश्य जीवन में ऊपर की ओर बढ़ना होता है। इस प्रकार हस्ताक्षर करने वाले व्यक्ति अन्य लोगों का प्रतिनिधित्व करने की इच्छा रखते हैं।

9 जिन लोगों के हस्ताक्षर ऊपर से नीचे की ओर जाते हैं, वे नकारात्मक विचारों वाले हो सकते हैं। ऐस लोग किसी भी काम में असफलता की बात पहले सोचते हैं।

10 जिन लोगों के हस्ताक्षर एक जैसे लयबद्ध नहीं दिखाई देते हैं, वे मानसिक रूप से अस्थिर होते होते हैं। इन्हें मानसिक कार्यों में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही, इनके विचारों में परिवर्तन होते रहते हैं। ये लोग किसी एक बात पर अडिग नहीं रह सकते हैं।

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11 जिन लोगों के हस्ताक्षर सामान्य रूप से कटे हुए दिखाई देते हैं, वे नकारात्मक विचारों वाले होते हैं। इन्हें किसी भी कार्य में असफलता पहले नजर आती है। इसी वजह से नए काम करने में इन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

12 यदि कोई व्यक्ति हस्ताक्षर के अंत में लंबी लाइन खींचता है तो वह ऊर्जावान होता है। ऐसे लोग दूसरों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। किसी भी काम को पूरे मन से करते हैं और सफलता भी प्राप्त करते हैं।

Varshphal Report

13 जो लोग हस्ताक्षर करते समय अपना मिडिल नेम पहले लिखते हैं, वे अपनी पसंद-नापंसद को अधिक महत्व देते हैं। इसके बाद कार्यों को पूरा करने में लग जाते हैं।

14 जो लोग हस्ताक्षर का पहला अक्षर बड़ा लिखते हैं, वे अद्भुत प्रतिभा के धनी होते हैं। ऐसे लोग किसी भी कार्य को अपने अलग ही अंदाज से पूरा करते हैं। अपने कार्य में पारंगत होते हैं। पहला अक्षर बड़ा बनाने के बाद अन्य अक्षर छोटे-छोटे और सुंदर दिखाई देते हों तो व्यक्ति धीरे-धीरे किसी खास मुकाम पर पहुंच जाता है। ऐसे लोगों को जीवन में सभी सुख-सुविधाएं प्राप्त हो जाती हैं।

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How will the transcendence of the Vakri Guru be in the Sagittarius sign for 12 zodiac signs https://www.astrologyofmylife.com/how-will-the-transcendence-of-the-vakri-guru-be-in-the-sagittarius-sign-for-12-zodiac-signs/ https://www.astrologyofmylife.com/how-will-the-transcendence-of-the-vakri-guru-be-in-the-sagittarius-sign-for-12-zodiac-signs/#respond Tue, 30 Jun 2020 19:11:44 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17166 वक्री गुरु का धनु राशि में गोचर कैसा रहेगा 12 राशियों के लिए गुरु महाराज अपनी नीच राशि से निकल अपनी मूलत्रिकोण राशि धनु में 30 जून 2020 को शाम 16:30 बजे प्रवेश करेंगे। इस समय गुरु महाराज वक्र गति में रहेंगे और ज्योतिष में यह माना जाता है कि शुभ ग्रह अपनी वक्री अवस्था …
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वक्री गुरु का धनु राशि में गोचर कैसा रहेगा 12 राशियों के लिए

गुरु महाराज अपनी नीच राशि से निकल अपनी मूलत्रिकोण राशि धनु में 30 जून 2020 को शाम 16:30 बजे प्रवेश करेंगे। इस समय गुरु महाराज वक्र गति में रहेंगे और ज्योतिष में यह माना जाता है कि शुभ ग्रह अपनी वक्री अवस्था में और शुभ फल देते हैं। धनु राशि में गुरु महाराज 20 नवंबर 2020 सुबह 06:26 मिनट तक रहेंगे, उसके बाद वह मकर राशि में जाएंगे। आइये जानते हैं कैसा रहेगा गुरु महाराज का गोचर विभिन्न चंद्र राशियों के लिए-*

Gemstone Suggestion

मेष राशि

इस राशि के लिए गुरु का वक्री गोचर काफी शुभ रहेगा। आप नकारात्मक विचारों से मुक्ति प्राप्त कर सकारात्मकता की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

प्रोफेशनल फील्ड में जो जातक हैं उन्हें नए अवसरों की प्राप्ति होगी, साथ ही आप की प्रबंधन क्षमता में भी इज़ाफा होगा। सीनियर्स के साथ जो भी आप के गतिरोध हैं वो समाप्ति की ओर अग्रसर होंगे। आप का खुद पर विश्वास मजबूत होगा जिससे स्वयं निर्णय लेने में सक्षम होंगे! यह मेष राशि वालों के स्वभाव का एक निहित गुण है, जोकि गुरु की नीच अवस्था के चलते प्रभावी नहीं हो पा रहा था!

वक्री गुरु की इस स्थिति में आध्यात्मिकता की तरफ भी आपका झुकाव बढ़ेगा जिससे आपको स्वयं से जुड़ने में मदद मिलेगी और जो भी आपके अतीत की भावनाएं आपको परेशान कर रहीं थी उनसे बाहर आने में आप के लिए सहायक सिद्ध होगा। इससे आपको स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होगा और आपकी विचार प्रक्रिया भी स्पष्ट होगी जिससे नयी दिशा की ओर आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। यात्रा में भी लाभ मिलेगा।

Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya

विद्यार्थियों के लिए भी यह वक्री गोचर अच्छे समाचार लेकर आएगा, उच्च शिक्षा में आ रहे विघ्न समाप्त होते हुए नज़र आ रहे हैं। इसलिए अपने प्रयासों में ईमानदार रहेंगे तो सफलता मिलने में देर नहीं लगेगी।

वृषभ राशि

इस राशि के लिए गुरु का वक्री गोचर मिश्रित परिणाम लेकर आएगा। गुरु आपके नवम भाव से वापस आपके अष्टम भाव में गोचर करेगा।

यह गोचर परिवर्तन के साथ-साथ अनिश्चिता की ओर संकेत कर रहा है। इससे आप थोड़ी बेचैनी और चिंता महसूस करेंगे, भविष्य को लेकर थोड़ी बहुत आशंकाएं भी घर करेंगी क्योंकि यह गुरु ग्रह का निहित गुण है, वह थोड़ा चीज़ों को बड़ा कर दिखाते हैं। इसलिए हो सकता है जो भी परिवर्तन आएं वो शुरू में आपको विचलित करें ,परन्तु आपको यह समझना होगा यह समय आपके लिए इसलिए अच्छा है की यह आपकी आत्मनिरीक्षण और खुद को समझने करने में मदद करेगा।

इस समय आपको यह जानने में मदद मिलेगी कि आप की कहाँ कमी रह रही है, क्या आपको करने की जरूरत है जिससे आप सही दिशा प्राप्त कर सकें और आगे बढ़ सकें। इससे आपको आपके प्रोफेशन और पारिवारिक रिश्तों को समझने में भी सहायता प्राप्त होगी। प्रोफेशनल्स को यह समय शोध कार्य करने में, अपने अभ्यास में, अपने कौशल को बढ़ाने में उपयोग में लाना चाहिए जिससे उनके लिए नए रास्ते खुलेंगे। आकस्मिक लाभ भी प्राप्त हो सकते हैं।

आपसी रिश्तों में थोड़ा तनाव की स्थिति रह सकती है, परन्तु यह वक्री गुरु का गोचर आपको यह सिखाने आया है कि जो भी विषय, व्यक्ति आपके जीवन में गैरजरूरी है, वह स्वयं ही आपसे दूर हो जाएगा। जब आप यह समझ जाएंगे तो आसक्ति से, भावनात्मक जुड़ाव से दूर रहने में और बाहर निकलने में आपको मदद मिलेगी। इस समय गूढ़ विषयों को जानने में आपकी रुचि बढ़ेगी। किसी भी विषय को उसके आधारभूत और मूल से समझने के लिए यह अच्छा समय रहेगा, जो विद्यार्थी ऐसा करेंगे, उनको आगे बढ़ने में सहायता प्राप्त होगी। स्वास्थ्य के मामले में थोड़ा आपको सजग रहने की आवश्यकता रहेगी, पेट या पेट के निचले हिस्से से संबंधित दिक्कत आ सकती है ।

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मिथुन राशि

यह समय या गोचर मिथुन राशि वालों के लिए काफी शुभ रहेगा, वक्री गुरु आपके अष्टम स्थान से आपके सप्तम स्थान में वापस गोचर करेगा जो कि यह इंगित करता है कि रिश्तों में सामंजस्य बिठाने में आपको काफी मदद मिलेगी। जिन व्यक्तियों को प्रेम संबंधों में चुनौती आ रही थी, उन्हें रिश्ता सुधारने में मदद मिलेगी। जो जातक विवाह का इंतज़ार कर रहे थे, उन्हें अनुकूल अवसर प्राप्त होंगे।

व्यवसाय / प्रोफेशन में आ रही परेशानियों के हल मिलने शुरू हो जाएंगे, नए रास्ते मिलने शुरू होंगे। कार्यक्षेत्र में स्थिरता की ओर बढ़ेंगे, शौर्य और साहस में वृद्धि होगी जिससे अनिश्चितता से बाहर आने में मदद मिलेगी। मिथुन राशि का स्वाभाविक गुण अच्छे से विचारों और सूचनाओं का आदान प्रदान करना है, इसलिए इस गोचर में आप जितना लोगों से मिलेंगे जुलेंगे उतना आप को बढ़िया अवसर प्राप्त होंगे, उतना आपको अपनी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह वक्री गोचर आपको काफी अच्छा प्लेटफॉर्म देगा अपना कौशल दिखाने का, किसी भी मौके को हाथ से जाने न दें।

Horoscope

पिता के साथ संबंधों में मज़बूती आएगी, प्रोफेशन में आपकी किसी बड़े व्यक्ति से मुलाकात और उनकी सलाह जीवन को नयी दिशा की ओर मोड़ सकती है। स्वास्थ के संबंध में यह गोचर शुभ रहेगा, फिर भी अपने खान-पान में लापरवाही न बरतें, अन्यथा वजन बढ़ने जैसी दिक्कतें आ सकती हैं। मिथुन के लिए यह वक्री गुरु का गोचर काफी अनुकूल परिणाम लेकर आएगा, इसलिए अपने प्रयास लगातार जारी रखें।

कर्क राशि

यह गुरु का वक्री गोचर कर्क राशि वालों के लिए मिश्रित या औसत परिणाम देगा। यह गोचर कर्क राशि वालों के लिए व्यवधान उत्पन्न करेगा, परन्तु साथ ही आपकी साहस की वृति, या जुझारू प्रवर्ति में भी बढ़ोतरी करेगा जो कि इन व्यवधानों से पार पाने में आपके लिए सहायक होगा।

जो जातक जॉब कर रहे हैं ,प्रबंधन क्षेत्र , टीचिंग या कंसल्टेंसी के प्रोफेशन में हैं, उनके लिए यह गुरु का वक्री गोचर अनुकूल रहेगा या जो अपने कौशल से संबंधित कोई काम कर रहे हैं उन्हें अच्छी सफलता मिलेगी। जो जातक अपना व्यवसाय कर रहे हैं, उन्हें अपने संसाधनों के अनुरूप ही निर्णय लेने होंगे, किसी भी प्रकार के लोन या कर्ज लेने से बचना चाहिए, अन्यथा परेशानिओं का सामना करना पढ़ सकता है। इस गोचर का मुख्य संदेश यह है कि आपको भाग्य का सहारा न लेकर, अपने कौशल पर भरोसा रखना है।

Life Prediction

पारिवारिक रिश्तों में भी थोड़ा बहुत सामंजस्य बढ़ाने में मदद मिलेगी, किसी नए मेहमान का आगमन परिवार में हो सकता है। विद्यार्थियों के लिए यह गुरु की वक्र स्थिति अनुकूल रहेगा, खासकर उनके लिए जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर थोड़ा परेशान कर सकता है, खासकर चर्बी से संबंधित परेशानी, पेट से संबंधित परेशानी इसलिए अपने खान-पान का अवश्य ध्यान रखें और इससे भी जरुरी बात नकारात्मकता से जितनी दूर रहेंगे उतना लाभ स्वास्थ्य में होगा। व्यायाम, योगा इत्यादि को दिनचर्या में सम्मिलित करना आपको बहुत अच्छे परिणामों की प्राप्ति कराएगा !

सिंह राशि

यह गुरु का वक्री गोचर सिंह राशि के जातकों के लिए अनुकूल परिणाम लेकर आएगा। यह समय नयी योजनाएं बनाने में और उनको क्रिन्यान्वित करने के लिए बहुत शुभ रहेगा क्योंकि इस समय आपकी प्रबंधन क्षमता अपने चरम पर होगी। आपकी बुद्धि क्षमता, निर्णय लेने में स्पष्टता रहेगी, जिस की वजह से लोग आपसे महत्वपूर्ण विषयों पर सलाह लेने आएँगे और आपका समाज में रूतबा बढ़ेगा। इस समय आप सकारात्मकता से भरे हुए और गतिशील रहेंगे इसलिए इस समय जो भी आपके अपूर्ण कार्य हैं उन्हें पूरा कर लें। जितने भी व्यवधान आ रहे थे, वह सब दूर होंगे, नए अवसरों की प्राप्ति होगी। जो जातक जॉब मे हैं और परिवर्तन करना चाह रहे हैं, उन्हें कहीं अच्छी जगह अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

प्रेम जीवन के लिए भी यह वक्री गोचर बहुत शुभ रहेगा चाहे आप नए संबंधों में जाना चाहते हैं या पुराने रिश्तों में सुधार लाना चाहते हैं, स्तिथियाँ आपके अनुकूल रहेंगी। संतान सम्बन्धी विषयों में आ रही परेशानी दूर होगी। यह समय विद्यार्थियों के लिए भी शुभ समाचार ले कर आएगा, उच्च शिक्षा में आ रही दिक्कतें दूर होंगी, जो विद्यार्थी शोध कार्य से जुड़े हुए हैं, उन्हें बहुत अच्छी सफलता की प्राप्ति होगी। अध्यात्म या गूढ़ विषय जैसे ज्योतिष इत्यादि में आपकी काफी रुचि बढ़ेगी, कुछ नया सीखने की जिज्ञासा बनी रहेगी।

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह समय बहुत अच्छा रहेगा, वक्री गुरु की लग्न पर दृष्टि एक रक्षा कवच का काम करेगी, बस थोड़ा बहुत जो ध्यान देना है वो अपने खान पान पर और व्यायाम पर देना है, क्योंकि इस समय वजन बढ़ने की काफी सम्भावना रहती है। परन्तु इस समय आपको एक और चीज़ से सावधान रहने की ज़रुरत है, वह है आपका अहम भाव क्योंकि आपको यह लग सकता है कि आप सब जानते हैं, और वहीं आप भूल कर जाएंगे ।

कन्या राशि

कन्या राशि के लिए भी यह वक्री गुरु के गोचर अच्छे परिणाम लेकर आएगा। यह गोचर आपके पंचम भाव से आपके चतुर्थ भाव में होगा जहां पर (पंचम भाव में) यह शनि महाराज के साथ विराजमान थे।

गुरु अपनी वक्र स्थिति में आपके लिए राहत लेकर आया है, यह इंगित करता है कि अब आप अपने प्रयास, चाहे वो आम जिंदगी हो या आपका कार्य-क्षेत्र, उन्हीं जगहों पर करेंगे जहां से आपको मन की शांति प्राप्त हो, जहां आप सुखद और सहज महसूस कर पाएँ। यह गोचर आपकी सुख सुविधाओं में भी वृद्धि करेगा, नए वाहन, मकान की प्राप्ति संभव है, पुराने ज़मीन जायदाद के लंबित पड़े मामले सुलझेंगे।

गुरु का यह वक्री गोचर अध्यात्म, मैडिटेशन, योग द्वारा खुद से जुड़ने के लिए भी बहुत अच्छा है, इससे जिन भी भावनात्मक परेशानियों से आप गुज़र रहे थे उनसे आपको छुटकारा पाने में मदद मिलेगी। माता को स्वास्थ्य में भरपूर लाभ मिलेगा, उनसे संबंधों में भी मज़बूती आएगी। जीवनसाथी से संबंधों में मधुरता आएगी, उनके काम- काज या प्रोफेशन में भी जो दिक्कतें आ रही थीं, वो दूर होंगी।

Married Life Report

नव संबंधों में जो लोग जुड़ना चाहते हैं, हो सकता है वह थोड़ा भावनाओं में सुरक्षा की चाह के चलते ऐसा करने में थोड़ा झिझकें, आपको यह समझाना होगा कि प्यार में कोई सुरक्षा नहीं होती। विद्यार्थी वर्ग के लिए भी समय अनुकूल है, परन्तु कई बार आप आराम पसंद बन सकते हैं, जिससे थोड़ी परेशानी बढ़ सकती है। आपको थोड़ा इस पर ध्यान देने की जरूरत रहेगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी गुरु का वक्री होना आपके लिए बहुत ही शुभ रहेगा, जो भी थोड़ी बहुत परेशानियां चल रही थीं, उनसे छुटकारा पाने में मदद मिलेगी।

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होकर यह राशि परिवर्तन चतुर्थ भाव से तृतीय भाव में होगा। जिसे पराक्रम, साहस, अभिलाषा और रुचि का स्थान माना जाता है, जो यह दिखाता है कि आपने जो अपनी सीमायें बाँधी थी, उनसे आप ऊपर उठने का प्रयास करेंगे, जिससे आपको नए अवसरों की प्राप्ति होगी। आप नए विचारों और प्रयोगों से पीछे नहीं हटेंगे, जिससे लाभ की सम्भावना में वृद्धि होगी। आपके कम्युनिकेशन स्किल्स में भी इजाफा होगा जिससे आप अपनी भावनाओं को और अच्छे से सबके सामने प्रस्तुत कर पाएंगे, जो आपके व्यवसाय और संबंध दोनों के लिए बहुत अच्छे परिणाम लेकर आएगा ।

यह समय कौशल को और निखारने का समय है, क्योंकि यह समय आपको आपके कौशल के अनुरूप अवसर प्रदान करेगा। यह समय आपके लिए स्वयं को खोजने का भी समय है, जो भी चीज़ें आपको प्रिय हैं उनको करें क्योंकि जितना आप अपने पसंद की चीजें करेंगे उतना खुद को आप उन्मुक्त पाएंगे जिससे आपकी निर्णय क्षमता काफी अच्छी होगी। जिसमें पिछले कुछ समय से परेशानी आ रही थी । आपके किये गए प्रयासों को भी सही दिशा प्राप्त होगी।

Prashna Kundli by Acharya Arya

भाई बहन-सहोदर का सहयोग पूर्ण रूप से प्राप्त होगा। जीवनसाथी का सहयोग भी आपकी तरक्की में योगदान देगा। भाग्य का भी भरपूर साथ मिलता हुआ नज़र आ रहा है। विद्यार्थी वर्ग खासकर वह विद्यार्थी जो किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए समय बहुत शुभ रहेगा। यह समय आपके लिए बहुत अच्छा है, परन्तु आप अपना काफी समय दूसरों को प्रसन्न करने में लगा देते हैं, यदि आप अपनी इस प्रवर्ति से बचेंगे तो यह गुरु का वक्री गोचर से आप और अधिक लाभ उठाने में कामयाब होंगे।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातकों के लिये भी यह गुरु का वक्री होकर धनु राशि में गोचर काफी शुभ रहेगा। गुरु महाराज आपके तीसरे स्थान से, जो कि प्रयास का स्थान है, से दूसरे भाव में विचरण करेंगे जो की संचित धन, परिवार का स्थान है। यह दर्शाता है कि यह समय राहत देने वाला है, अथक प्रयासों के बाद भी पिछले कुछ समय से आपको सही दिशा नहीं मिल पा रही थी, वह दिशा अब मिलनी शुरु हो जायेगी। आय में भी बढ़ोतरी संभव होती नज़र आ रही है, प्रोफेशन, जॉब में नए अवसरों की प्राप्ति होगी। कोई नई ज़िम्मेदारी या नए पद से आपको नवाजा जा सकता है।

जो जातक काफी समय से अपने व्यवसाय में जाना चाहते थे, उनके लिए भी गुरु का वक्री होना अनुकूल है और जो पहले से अपना व्यवसाय कर रहे हैं, वह अपने संसाधनों का उपयोग सही से कर पाएंगे जिससे अच्छा मुनाफ़ा होने की उम्मीद है। इस समय में आपका सारा ध्यान धन संचय पर होना चाहिए।

Career Report : One Year

आप परिवार के साथ अधिक समय बिताने का प्रयास करेंगे जिससे पारिवारिक संबंधों में भी मधुरता आएगी। परिवार में बढ़ोतरी के भी अच्छे संकेत हैं। जो जातक काफी समय से परिणय सूत्र में बंधना चाहते हैं, उनके लिए शुभ समाचार की प्राप्ति संभव है। विद्यार्थियों के लिए शुभ संकेत रहेंगे, विद्या प्राप्ति के लिए अनुकूल वातावरण प्राप्त होगा, बाधाएं दूर होती हुई नज़र आ रही हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी गुरु का यह भ्रमण वृश्चिक जातकों के लिए अच्छा रहेगा।

धनु राशि

गुरु का यह वक्री गोचर आपके दूसरे भाव से जहां गुरु नीच भाव में विराजमान थे से अब आपके प्रथम भाव में होगा, जोकि काफी अच्छे फलों की ओर इशारा कर रहा है। सबसे पहला परिवर्तन जो आपको महसूस होगा वो आपके स्वभाव में होगा। कुछ समय से आप थकान, सुस्ती महसूस कर रहे थे वह अब दूर हो जाएगी और आप खुद को ऊर्जावान महसूस करेंगे।

आप सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ेंगे जो आपके स्वास्थ्य और निर्णय क्षमता में भी दिखायी देगा। धर्म, अध्यात्म में भी रुचि बढ़ेगी, आप के अंदर समाज को कुछ योगदान देने की भावना भी आयेगी और आप इसके लिए प्रयासरत भी रहेंगे। भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा इसलिए जो भी अवसर आपके सामने प्रस्तुत हों उन्हें लेने से न चूकियेगा।

Gemstone Suggestion

गुरु आपकी राशि के लिए चतुर्थ भाव का भी स्वामी है इसलिए आपके जमीन -जायदाद से संबंधित मामले लंबित चल रहे थे वह गतिशील होंगे व नए मकान इत्यादि के रास्ते खुलेंगे। जो जातक परिणय सूत्र में बंधने का इंतज़ार कर रहे हैं उनके लिए गुरु का राशि परिवर्तन अच्छी खबर लेकर आएगा, वहीं जो जातक पहले से ही विवाहित या किसी समबन्ध में हैं, उनके लिए थोड़ा सी दिक्कत आ सकती है, सावधानी रखें क्योंकि कई बार आप अपने साथी के मित्र कम सलाहकार बनने का ज्यादा प्रयास करेंगे।

संतति के लिहाज से यह परिवर्तन शुभ समाचार लेकर आएगा। विद्यार्थी वर्ग भी उच्च शिक्षा की और अग्रसर होते हुए नज़र आ रहे हैं, परिवार का साथ भी खूब रहेगा। हर दृष्टिकोण से यह गोचर शुभ रहेगा यह कहना भी गलत नहीं है।

मकर राशि

गुरु का यह वक्री गोचर आपके लिए बहुत शुभता लेकर आएगा, आपके लग्न भाव से गुरु राशि परिवर्तन कर आपके द्वादश भाव में अपनी राशि में विराजमान होंगे। यह गोचर खासकर उन जातकों के लिए बहुत शुभ रहेगा, जिनका इम्पोर्ट / एक्सपोर्ट का काम है और जो लोग विदेश की किसी कंपनी में काम करते हैं। विदेश जाने वालों के लिए भी यह गोचर शुभ समाचार लेकर आएगा। आप का खुद पर विश्वास और बढ़ना शुरू हो जाएगा, दूसरों पर निर्भरता में कमी आएगी, जिससे आपको सही फैसले लेने में कामयाबी मिलेगी।

जितनी आप यात्रा करेंगे उतना अधिक लाभ प्राप्त होगा, परन्तु पहले से यात्रा के लिए अच्छा बजट प्लान बनाना सही रहेगा। आपकी आध्यात्मिक, धार्मिक क्रियाकलापों में रुचि बढ़ेगी, इसमें खूब बढ़ चढ़कर भाग लेंगे। परन्तु स्वास्थ्य की दृष्टि से यह समय थोड़ा कमज़ोर रह सकता है, थोड़ा अवांछित परिस्थियों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए खान पान का ध्यान रखना जरूरी होगा। योग, प्राणायम, खेल- कूद, में भाग लेना आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा।

Signature Design

संबंधों में भी नवीनता आएगी, ख़राब रिश्ते से या आप जिस रिश्ते में भावनात्मक परेशानियों का सामना कर रहे थे, उससे बाहर आने में मदद मिलेगी। अगर आप अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देंगे तो यह गोचर आपके लिए बाकी सब दृष्टियों से शुभ रहेगा।

कुम्भ राशि

कुम्भ राशि के लिए यह वक्री गुरु का परिवर्तन आय के नए स्रोत खोलेगा, खर्चों को नियंत्रण में रखने में कामयाब होंगे। जो भी आपकी योजनाएं थी, वह कार्यांन्वित होनी शुरू हो जाएंगी। यह गोचर यह दिखाता है कि अब आप लोगों से जितना मिलेंगे-जुलेंगे, उतना ही आपको लाभ प्राप्त होगा, कोई पुराना मित्र आपके लिए कोई नयी सम्भावना ला सकता है।

सामाजिक प्रतिष्ठा में भी बढ़ोतरी होगी। आप अब थोड़ा अधिक महत्वाकांक्षी होंगे, लक्ष्यों के प्रति और अधिक सजग होकर प्रयास करेंगे जिससे लाभ मिलने की काफी सम्भावना रहेगी। व्यापारी वर्ग के लिए भी यह परिवर्तन व्यवसाय को और आगे बढ़ाने के अवसर प्राप्त कराएगा।

Name Check & Suggestion by Numerology

बड़े भाई-बहनों से मनमुटाव समाप्त होंगे, सन्तति को लेकर भी वक्री गुरु की यह स्थिति काफी शुभ रहेगी, परिवार में बढ़ोतरी संभव है। यदि आप इस राशि के माता-पिता हैं तो संतान की तरक्की से काफी प्रसन्नता की प्राप्ति होगी। प्रेम संबंधों में तरोताज़गी आएगी, नयी ऊर्जा से भरे रहेंगे जिससे आपका संगी भी आपसे प्रसन्न रहेंगा।

आपकी अंतर्दृष्टि इस समय काफी अच्छी रहेगी, जिससे आपको नयी दिशा प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। विद्यार्थी वर्ग को भी उच्च शिक्षा में परिवार का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, जिससे वह प्रगति के पथ पर अग्रसर होते हुए नज़र आएंगे। जो भी जातक अपनी शिक्षा पूर्ण कर नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें भी अच्छे अवसरों की प्राप्ति होगी। स्वास्थय की दृष्टि से भी समय उत्तम रहेगा, बस थोड़ा खान-पान में ध्यान देने की आवश्यकता है, वसा युक्त भोजन न करना शुभ रहेगा।

मीन राशि

मीन राशि वालों के लिये वक्री गुरु का परिवर्तन लाभ भाव से जहां गुरु महाराज नीच के थे और शनि के साथ विराजमान थे, वहां से दशम भाव में अपनी मूल त्रिकोण राशि में होगा, जो कि नौकरी में तरक्की और बदलाव दिखा रहा है। यह परिवर्तन आपको और अधिक कार्य उन्मुख बनाएगा, अब आपका ध्यान टारगेट से हटकर या प्रशंसा की और से हटकर सिर्फ काम को सुचारू रूप से, नवीनता और सृजनात्मकता से कैसे किया जाए इस तरफ रहेगा, जिससे सफलता के साथ -साथ उच्च अधिकारियों का सम्मान और प्रोत्साहन भी आपको प्राप्त होगा।

पिता के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ उनसे संबंधों में भी मधुरता आएगी, उनसे आपको काफी प्रोत्साहन, सहयोग की भी प्राप्ति होगी, जिससे परिवार मे ख़ुशी का वातावरण रहेगा। आपकी वाक् शक्ति में भी इज़ाफा होगा, जिससे काफी लोग आपसे सलाह मशवरा लेंगे। सरकारी क्षेत्र से भी लाभ मिलने की सम्भावना रहेगी। घर या गाड़ी में इज़ाफा या नवीन कार्य की योजना बनेगी।

Vastu Check by Scientifically

शत्रु पक्ष पर विजय हासिल होगी, कोर्ट -कचहरी में लंबित पड़े मामले तेजी से आगे बढ़ेंगे। प्रेम के मामले में यह गोचर थोड़ा मिश्रित परिणाम देने वाला रह सकता है, आपको इसके लिए अपने व्यवसाय और परिवार में सामंजसय बिठाना पड़ेगा। आपका आत्मविश्वास इस समय बढ़ा हुआ रहेगा, इसलिए निर्णय लेने में समय न गवांये, क्योंकि मीन राशि वालों की सबसे बड़ी समस्या निर्णय लेने की होती है।

अपनी नैतिकता के चलते कभी-कभी आप आत्मग्लानि के शिकार भी हो जाते हैं, जिससे आप का स्वयं के किये गए निर्णयों पर से विश्वास डगमगा जाता है , जो गुरु की इस वक्र स्थिति में आपके परिणाम घटा सकती है । इसलिए अपनी इस प्रवर्ति से आप जितना बच कर चलेंगें, उतना आपके लिए अच्छा रहेगा !

Panch Mukhi/ Five Faced Rudraksha

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विभिन्न धर्मों में पाप-पुण्य को लेकर मान्यताओं की तुलना https://www.astrologyofmylife.com/comparison-of-beliefs-about-sin-and-virtue-in-different-religions/ https://www.astrologyofmylife.com/comparison-of-beliefs-about-sin-and-virtue-in-different-religions/#respond Sat, 30 May 2020 08:48:48 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=16708 विभिन्न धर्मों में पाप-पुण्य को लेकर मान्यताओं की तुलना ईसाइयत- हर व्यक्ति जन्म से पापी हैं क्यूंकि सृष्टि के आदि में हव्वा (Eve) और आदम (Adam) ने बाइबिल के ईश्वर के आदेश की अवमानना की थी। इसलिए ईश्वर ने हव्वा को शाप देकर पापी करार दिया था। इस पाप से बचाने वाला केवल एक मात्र …
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विभिन्न धर्मों में पाप-पुण्य को लेकर मान्यताओं की तुलना

  1. ईसाइयत- हर व्यक्ति जन्म से पापी हैं क्यूंकि सृष्टि के आदि में हव्वा (Eve) और आदम (Adam) ने बाइबिल के ईश्वर के आदेश की अवमानना की थी। इसलिए ईश्वर ने हव्वा को शाप देकर पापी करार दिया था। इस पाप से बचाने वाला केवल एक मात्र ईसा मसीह है क्यूंकि वह पापों को क्षमा करने वाला है। इसलिए केवल ईसा मसीह पर विश्वास लाने वाला ही स्वर्ग का अधिकारी होगा। इसलिए ईसा मसीह को मानो और अपने पाप से मुक्ति प्राप्त करो। क्यूंकि केवल ईसा मसीह ही मुक्ति प्रदाता है।पापों को करने से रोकने के स्थान पर ईसा मसीह पर विश्वास को अधिक महत्व दिया गया हैं। यह मान्यता एक पाखंड के समान दिखती हैं कि अगर कोई व्यक्ति कोई भी पाप कर्म न करे मगर ईसा मसीह पर विश्वास न करे तो भी वह नरक में जायेगा क्यूंकि वह जन्म से पापी हैं।

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  1. इस्लाम- पाप न करने के लिए कुछ आयतों के माध्यम से सन्देश अवश्य दिया गया है। मगर पाप को न करने से अधिक महत्व इस्लाम की मान्यताओं को दिया गया हैं। मुस्लिम समाज के लिए आचरण से अधिक महत्वपूर्ण मान्यताएं हैं। जैसे ईद की दिन निर्दोष पशुओं की हत्या करना उनके लिए पाप नहीं हैं क्यूंकि यह इस्लामिक मान्यता हैं। जैसे जिहाद के नाम पर निर्दोषों को मारना भी पाप नहीं हैं, अपितु पुण्य का कार्य हैं क्यूंकि इसके परिणाम स्वरुप जन्नत और हूरों के भोग की प्राप्ति होगी। क़ुरान के ईश्वर अल्लाह से अधिक महत्वपूर्ण पैगम्बर मुहम्मद साहिब प्रतीत होते हैं। यह मान्यता है, यह विश्वास है। इस्लाम में पाप-पुण्य कर्म से अधिक मान्यताओं को महत्व उसे धर्म नहीं अपितु मत सिद्ध करता हैं।

 

  1. वेदों में मनुष्य और ईश्वर के मध्य न कोई मुक्तिदाता हैं, न कोई मध्यस्थ हैं। मनुष्य और ईश्वर का सीधा सम्बन्ध हैं। मान्यता या विश्वास से अधिक सत्यता एवं यथार्थ को महत्व दिया गया हैं। सम्पूर्ण वेदों में अनेक मंत्र मनुष्य को पाप कर्म न करने एवं केवल पुण्य कर्म करे का सन्देश देते हैं। वेद पाप क्षमा होना नहीं मानता। क्यूंकि कर्मफल सिद्धांत के अनुसार जो जैसा कर्म करेगा वैसा फल प्राप्त करेगा। पाप क्षमा होने से मनुष्य कभी पाप क्षमा करना नहीं छोड़ेगा अपितु भय मुक्त होकर ओर अधिक पापी बनेगा। वेद मनुष्य को पाप कर्मों का त्याग करने के लिए संकल्प करने का सन्देश देते हैं। संकल्प को प्रबल बनाने के लिए वेद ईश्वर कि स्तुति प्रार्थना एवं उपासना कर आध्यात्मिक उन्नति करने का विधान बताते हैं। जितना जितना मनुष्य उन्नति करता जायेगा, पाप आचरण से विमुख होता जायेगा। उतना उतना उसके कर्म पुण्य मार्ग को प्रशस्त करेंगे। वैदिक विचारधारा में मनुष्य के कर्म सर्वोपरि है न की मान्यता, विश्वास अथवा मध्यस्ता। व्यवहारिक, क्रियात्मक एवं प्रयोगात्मक दृष्टि से केवल वेदों की कर्मफल व्यवस्था सत्य के सबसे निकट हैं।

Career Report : One Year

वेद में पाप निवारण के लिए अनेक मंत्र दिए गए हैं जिनमें मनुष्य ईश्वर से ऐसी मति, ऐसी बुद्धि प्रदान करने की प्रार्थना करता हैं जिससे वह केवल और केवल सत्य मार्ग पर चलता रहे और पाप कर्म से सर्वथा दूर रहे। मनुष्य इन मन्त्रों का अनुष्ठान करते हुए यह संकल्प लेता हैं की वह पाप कर्म से सदा दूर रहेगा।

 

आइये इन मन्त्रों को ग्रहण कर, उनका चिंतन मनन कर, उन्हें अपने जीवन में शाश्वत करे जिससे हमारा जीवन सफल हो जाये

 

  1. प्राणी जगत का रक्षक, प्रकृष्ट ज्ञान वाला प्रभु हमें पाप से छुडाये- अथर्वेद ४/२३/१

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2. हे सर्वव्यापक प्रभु जैसे मनुष्य नौका द्वारा नदी को पार कर जाते हैं, वैसे ही आप हमें द्वेष रुपी नदी से पार कीजिये. हमारा पाप हमसे पृथक होकर दग्ध हो जाये- अथर्ववेद ४/३३/७

 

3. हे ज्ञान स्वरुप परमेश्वर हम विद्वान तेरे ही बन जाएँ. हमारा पाप तेरी कृपा से सर्वथा नष्ट कर दे- ऋग्वेद १/९७/४

 

  1. हे मित्रावरुणो अर्थात अध्यापकों उपदेशकों आपके नेतृत्व में अर्थात आपकी कृपा से गड्डे की तरह गिराने वाले पापों से में सर्वथा दूर हो जाऊ- ऋग्वेद २/२७/५

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5.हे ज्ञानस्वरूप प्रभु आप हमे अज्ञान को दूर रख पाप को दूर करों- ऋग्वेद ४/११/६

 

6.इस शुद्ध बुद्धि से हम भगवान के भक्त बनें और पाप से बिलकुल परे चले जाएँ- ऋग्वेद ७/१५/१३

 

7.हे प्रभु तू पाप से हमारी रक्षा कर , पाप की कामना करने वाले व्यक्ति से भी दिन रात निरंतर हमारी रक्षा कर – ऋग्वेद ७/१५/१५

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8.हे मित्रा वरुणो आपके बताये हुए सत्य मार्ग से चलकर नौका से नदी की तरह पापरूपी नदी को तैर जाएँ- ऋग्वेद ७/६५/३

 

9.हे सर्वज्ञ प्रभु आप मेरी सदा रक्षा करे मुझे कभी पाप की इच्छा रखने वाले दुष्ट बुद्धि वाले मनुष्य की संगती में मत पड़ने दे.- ऋग्वेद ८/७१/७

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10.निष्पापता की उत्सुकता इस सभी मन्त्रों में प्रकट की गयी हैं. प्रभु का सर्वव्यापकता तथा सर्वज्ञान गुण पाप दूर करने में सहायक होता हैं. सर्वव्यापक प्रभु हमारे द्वारा कहीं भी किये गए पाप कर्म को जान लेते हैं और यह प्रभु की न्याय व्यस्था ही हैं की किसी भी मनुष्य द्वारा किया गया पाप कर्म उसे दण्डित करने का हेतु बनता हैं. जो जैसा करेगा वैसा भरेगा का सिद्धांत स्पष्ट रूप से ईश्वर की कर्म फल व्यस्था को सिद्ध करता हैं. मनुष्य कर्म करने के लिए स्वतंत्र हैं और उसका फल पाने के लिए परतंत्र हैं, परतंत्रता का अर्थ ईश्वर का गुलाम अथवा मनुष्य द्वारा किये जाने वाले कर्मों में बध्यता नहीं हैं अपितु पुण्य कर्म का फल सुख और पाप कर्म का फल दुःख हैं. इसलिए वेद भगवान अपने सन्देश द्वारा समस्त मानव जाति को पाप कर्म से दूर रहने का सन्देश दे रहे हैं.

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11.हे प्रभु! आप सर्वव्यापक और सर्वज्ञाता हैं .आपकी सर्वव्यापकता तथा सर्वज्ञता को जानकर हम कभी पाप में प्रवित न हो- ऋग्वेद १/१७/८

 

  1. हे ज्ञान के स्वामिन! जिसकी तुम रक्षा करते हो उसके पास कहीं से भी पाप नहीं फाटक सकता और न दुःख आ सकता हैं- ऋग्वेद २/२३/५

 

Gemstone Suggestion

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