marriage Archives - Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India https://www.astrologyofmylife.com/tag/marriage/ Best Astrologer and Vastu Consultant at Pitampura Delhi - Acharya Dr. MSD Arya, Astrologer, Numerologist, Vastu Consultant, Gems Suggestions, best vastu consultant, moksha mukti, Best Astrologer, Astrology, Lal Kitab, Numerology, Horoscope, Matchmaking Astrologer, Astro SHop, Acharya Arya, Astro Arya, Astro arjuna, BlackMagic, hindu Panchang, Rashifal, Love, vashikaran, Thantrik, Raghava Bhatt, Moksha Mukti Jyotish and vastu Sansthan Delhi INdia Thu, 22 Feb 2024 07:00:34 +0000 en-GB hourly 1 https://wordpress.org/?v=7.0.1 https://www.astrologyofmylife.com/wp-content/uploads/2024/02/cropped-Moksha-Mukti-logo-latest-32x32.png marriage Archives - Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India https://www.astrologyofmylife.com/tag/marriage/ 32 32 Tripindi Shraddha Puja – Moksha Mukti Sansthan – astrology of my life https://www.astrologyofmylife.com/tripindi-shraddha-puja/ https://www.astrologyofmylife.com/tripindi-shraddha-puja/#respond Wed, 18 Aug 2021 10:52:31 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17806 त्रिपिंडी श्राद्ध क्या है…? त्रिपिंडी श्राद्ध का अर्थ है पिछली तीन पीढ़ियों के हमारे पूर्वजों के पिंड दान। अगर पिछली तीन पीढ़ियों से परिवार में यदि किसी का भी बहुत कम उम्र या बुढ़ापे में निधन हो गया हो। तो वे लोग हमारे लिए समस्या पैदा करते हैं। उन लोगों को मुक्त अथवा उनकी आत्मा …
Continue reading Tripindi Shraddha Puja – Moksha Mukti Sansthan – astrology of my life

The post Tripindi Shraddha Puja – Moksha Mukti Sansthan – astrology of my life appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
त्रिपिंडी श्राद्ध क्या है…?

त्रिपिंडी श्राद्ध का अर्थ है पिछली तीन पीढ़ियों के हमारे पूर्वजों के पिंड दान।

अगर पिछली तीन पीढ़ियों से परिवार में यदि किसी का भी बहुत कम उम्र या बुढ़ापे में निधन हो गया हो।

तो वे लोग हमारे लिए समस्या पैदा करते हैं।

उन लोगों को मुक्त अथवा उनकी आत्मा की शांति के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध करना पड़ता है।

प्रियजनों लोगों की याद में त्रिपिंडी श्राद्ध एक योगदान मन जाता है ।

ऐसा माना जाता है की यदि लगातार तीन वर्षों तक यह योगदान नहीं किया गया तो वे प्रियजन (मृतक) क्रोधित हो जाते है ।

Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya

इसलिए उन्हें शांत करने के लिए ये योगदान किए जाते हैं।

अधिकांश लोगों का विचार है कि त्रिपिंडी का अर्थ है 3 पीढ़ी के पूर्वजों (पिता-माता, दादाजी-दादी और परदादा- परदादी ) को संतुष्ट करना।

लेकिन यह 3 पीढ़ियों के साथ प्रकट नहीं होता है। अपितु वे तीन  ‘अस्मदकुले’, ‘मातमहा’, भ्राता  पक्ष , ससुराल पक्ष और शिक्षक पक्ष का संकेत देते हैं।

कोई भी आत्मा जो अपने जीवन में शांत नहीं है और शरीर छोड़ चुकी है, भविष्य की पीढ़ियों को परेशान करती है।

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

ऐसी आत्मा को ‘त्रिपिंडी श्राद्ध’ की सहायता से मोक्ष की प्राप्ति करवाई जा सकती  है।

श्राद्ध का उद्देस्य पूर्वजों के लिए उनके अपने वंशजों द्वारा ईमानदारी से किया गया अनुष्ठान है।

त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा

त्रिपिंडी श्राद्ध एक ऐसा अनुष्ठान है जो परिचित और भौतिक चीजों की तरह कुछ हासिल करने के लिए किया जाता है।

इसलिए त्रिपिंडी श्राद्ध को “काम्य श्राद्ध” कहा जाता है। श्राद्धकर्मकर्ता शास्त्र के अनुसार, यह कहा जाता है कि पुरखों का श्राद्ध एक वर्ष में 72 बार किया जाना चाहिए।

यदि श्राद्ध कई वर्षों तक नहीं किया जाता है तो (माता -पिता, दादा -दादी ) पूर्वजों की आत्मा दुखी रहती है।

Married Life Report

प्रत्येक व्यक्ति को अपने पूर्वजों का श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। यदि श्राद्ध अनुष्ठान नहीं किया जाता हैतो।

वंशज को पूर्वज दोष के कारण विभिन्न प्रकार की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है ।

और इस प्रकार के दोष “त्रिपिंडी श्राद्ध” से अनुष्ठान करना पड़ता है।

साथ ही उसी श्राद्ध को पारंपरिक रूप से गन्धर्व, शाकिनी।

जैसे डाकिनी आदि के भूतों के अत्याचारों से मुक्त होने के लिए भी किया जाता है।

पारंपरिक रूप से त्रिपिंडी श्राद्ध का अनुष्ठान करने का उद्देस्य है

कि घर में लड़ाई, शांति की कमी, अक्सर बीमारियों का कारण पुरुषत्व की भावना पैदा करते हैं। असफलता, असामयिक मृत्यु, इच्छा की पूर्ति न होना।

Prashna Kundli by Acharya Arya

व्यावसायिक समृद्धि की कमी, उचित अवधि तक शादी न होना और बांझपन आदि जैसी समस्याओं का हल निकलन हैं।

त्रिपिंडी अनुष्ठान पूजा (Tripindi Shraddha Puja)

त्रिपिंडी श्राद्ध अनुष्ठान में भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान रुद्र(शिव) की भक्तिपूर्वक पूजा की जाती है।

भगवान ब्रम्हा, विष्णु और रुद्र क्रमशः सम्माननीय, राजसी और गर्म स्वभाव के प्रतिनिधि हैं।

नैतिक पूवजों की आत्माओं के कष्ट से राहत पाने के लिए भगवान ब्रह्मदेव की पूजा की जाती है और जौ का आटा अर्पित किया जाता  है ।

शाही पूर्वजों की आत्माओं के कष्ट से राहत पाने के लिए भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और चावल का आटा  अर्पित किया जाता है ।

Horoscope

और साथ ही गर्म स्वभाव वाले पूर्वजों की आत्माओं के कष्ट से छुटकारा पाने के लिए भगवान रुद्र की पूजा की जाती है।

तिल की गांठका आटा अर्पित किया जाता।

जिस व्यक्ति का बचपन, युवावस्था और वृद्धावस्था में निधन हो जाता है और उनकी आत्मा संतुष्ट नहीं होती है ।

उसी अवस्था में सम्मानित आत्मा को मोक्ष प्राप्त करने के लिए, वही त्रिपिंडी श्राद्ध अनुष्ठान करना चाहिए।

उसी अनुष्ठान में पूर्वजों के नाम और “गोत्र” का नाम नहीं उच्चरित किया जाता है क्योंकि हमें इस बात का कोई सही ज्ञान नहीं है ।

कि हम किन पूर्वजों के दुख से पीड़ित हैं और किन पूर्वजों की आत्मा दुखी है।

तो हमारे पूर्वजों की हर असंतुष्ट आत्मा को मुक्ति दिलाने के  लिए ।

Career Report : One Year

“त्रिपिंडी श्राद्ध” अनुष्ठान धर्मशास्त्र के अनुसार किया जाता है।

ऐसी विपदाओं के निवारण के लिए त्रिपिंडी श्राद्ध अवश्य करना चाहिए। इसकी पुष्टि “श्राद्ध चिंतामणि” में की गई है।

त्रिपिंडी श्राद्ध विधि (Tripindi Shraddha Puja)

आम तौर पर जब एक अधेड़ उम्र या वृद्ध इंसान का निधन हो जाता है ।

तो लोग उसका पिंड दान, श्राद्ध और अन्य सभी अनुष्ठान करते हैं।

लेकिन अगर कोई छोटा बच्चा या युवा गुजर जाता है तो सभी रस्में नहीं की जाती हैं।

यह उनकी आत्माओं को एक दुष्चक्र में डालता है और यह हमारे लिए कठिनाइयों का कारण बनता है।

और इसलिए त्रिपिंडी श्राद्ध को इन आत्माओं को मुक्त करने और स्वर्ग की ओर भेजने के लिए किया जाना चाहिए।

उनकी पुण्यतिथि पर हर साल उचित श्राद्ध करना बहुत आवश्यक है।

Signature Design

दूसरी बात, भाद्रपद माह के पितृपक्ष में पारिवारिक श्राद्ध करना होता है। ये अनुष्ठान सम्वत्सरिक श्राद्ध और महालया श्राद्ध हैं।

यदि दोनों श्राद्ध तीन क्रम वर्षों तक लगातार नहीं किए जाते हैं ।

तो यह वर्तमान में पितृदोष का कारण बनता है।

इसके अतिरिक्त , यह हमारे पूर्वजों की आत्माओं को दर्द और समस्याओं का कारण बनता है ।

और वे प्रेता योनी या आत्माओं के दायरे में प्रवेश करते हैं।

नतीजतन, वे हमारे वर्तमान जीवन में मुद्दों का कारण बनते हैं ।

क्योंकि हमारे पूर्वज हमारे माध्यम से मोक्ष की उम्मीद करते हैं।

इस स्थिति को पितृदोष कहा जाता है।

त्रिपिंडी पूजा कौन करे ? (Tripindi Shraddha Puja)

इस दोष से मुक्ति  पाने का एक तरीका यह है कि हमारे पवित्र ग्रंथों में बताए अनुसार त्रिपिंडी श्राद्ध करें।

Gemstone Suggestion

जिस व्यक्ति की कुंडली में इस प्रकार का दोष पाया जाता है, उसे त्रिपिंडी श्राद्ध करना चाहिए।

विवाहित और अविवाहित दोनों ही त्रिपिंडी श्राद्ध कर सकते हैं।

केवल अविवाहित महिलाएं त्रिपिंडी श्राद्ध नहीं कर सकती हैं। परिवार का कोई भी व्यक्ति त्रिपिंडी श्राद्ध कर सकता है।

इस धार्मिक अनुष्ठान को एक पवित्र स्थान पर किया जाना चाहिए जिसका उद्देश्य अशांत आत्माओं को मुक्ति दिलाना है।

इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश मुख्य रूप से पूजे जाते हैं।

पृथ्वी से, आकाश से और आत्मा से, दो प्रकार के, पुण्य, कण, अनियंत्रित शिशु, युवा और वृद्ध सभी चरणों में मृत भावुक भावनाओं के साथ हानि पहुँचाते हैं।

और अंत में परंपरा और परंपराओं के अनुसार त्रिपिंडी श्राद्ध अवश्य करना चाहिए।

इस अनुष्ठान से पहले गंगा में अर्पण और शरीर शुद्धि के लिए पवित्र स्नान करना महत्वपूर्ण है।

यहाँ स्केहुर महत्वपूर्ण नहीं है। चूँकि शेखर अभिव्यक्ति का हिस्सा है, त्रिपिंडी संस्कार पत्नी के साथ किया जाना चाहिए है।

यह संस्कार आप यदि अविवाहित हैं या विधुर(तलाकशुदा ) होने पर भी कर सकते हैं।

इसमें भगवान ब्रह्मा (रजत), विष्णु (स्वर्ण), रुद्र (ताम्र) व्याप्त हैं।

त्रिपिंडी श्राद्ध विधि (Tripindi Shraddha Puja)

त्रिपिंडी संस्कार महाकाल  व त्र्यंबकेश्वर  में किया जा सकता है।

प्रियजनों  को भेंट देने के इस धार्मिक कार्य में, ‘येचुकीप्रपीन पिंडयन्ते च महेश्वर’में भी इसका उल्लेख किया है।

यह काम श्राद्ध यानि अर्पण करने से आत्माएं राक्षसों से अलग हो जाता है।

नवरात्रा के उत्सव के समय यह काम श्राद्ध न करें। उसी दिन त्रिपिंडी श्राद्ध और तीर्थ श्राद्ध भी नहीं करना चाहिए।

इसे अलग-अलग दिनों में करें लेकिन अगर आपके पास समय कम है ।

तो सबसे पहले त्रिपिंडी श्राद्ध करें और फिर तीर्थ श्राद्ध करें।

इस धार्मिक अनुष्ठान को एक पवित्र स्थान पर किया जाना चाहिए जिसका उद्देश्य अशांत आत्माओं को मुक्ति दिलाना है।

Get Appointment

इसमें ब्रह्मा, विष्णु और महेश मुख्य रूप से पूजे जाते हैं।

पृथ्वी से, आकाश से और आत्मा से, दो प्रकार के, पुण्य, कण, अनियंत्रित शिशु, युवा और वृद्ध सभी चरणों में मृत भावुक भावनाओं के साथ हानि पहुँचाते हैं।

और अंत में परंपरा और परंपराओं के अनुसार त्रिपिंडी श्राद्ध अवश्य करना चाहिए।

इस अनुष्ठान से पहले गंगा में अर्पण और शरीर शुद्धि के लिए पवित्र स्नान करना महत्वपूर्ण है। यहाँ स्केहुर महत्वपूर्ण नहीं है।

चूँकि शेखर अभिव्यक्ति का हिस्सा है, त्रिपिंडी संस्कार पत्नी के साथ किया जाना चाहिए है।

यह संस्कार आप यदि अविवाहित हैं या विधुर(तलाकशुदा ) होने पर भी कर सकते हैं।

इसमें भगवान ब्रह्मा (रजत), विष्णु (स्वर्ण), रुद्र (ताम्र) व्याप्त हैं।

त्रिपिंडी श्राद्ध करने के लाभ (Tripindi Shraddha Puja)

अन्य श्राद्ध पूजा एक विशिष्ट व्यक्ति के लिए की जाती है ।

यह पूजा पूर्वजों की तीन पीढ़ियों तक ही सीमित होती है।

अर्थात् पिता, दादा और परदादा, त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा, तीन पीढ़ियों से पूर्व के साथ-साथ पूर्वजों को भी शांत करती है।

इस प्रकार यह आग्रह किया जाता है ।

कि प्रत्येक परिवार को हर बारह वर्ष में कम से कम एक बार इस समारोह को करना चाहिए।

इसके अलावा, यदि किसी ब्यक्ति या जातक की कुंडली में परिलक्षित होता है।

या किसी के कुंडली में पितृ दोष है ।

तो यह श्राद्ध पूजा, दोषों के प्रभाव से राहत पाने के लिए सबसे महत्वापूर्ण है।

यदि हमारे पुरखे(पूर्वज ) हमसे अच्छी तरह से प्रसन्न हैं, तो वे हमें संतान, सुख और समृद्धि के रूप में आशीर्वाद देते  हैं।

हमारे पूर्वजों के आशीर्वाद को दैवीय आशीर्वाद के समान माना जाता है।

श्राद्ध पूजा के लिए (Tripindi Shraddha Puja)

अभी गुरूजी से संपर्क करे +919999954145 और पूजा के बारे में सभी जानकारी जानिए ।

Contact to Acharya ji +919999954145

त्रिपिंडी श्राद्ध इसलिए किया जाता है ताकि मृतकों की आत्माओं को मोक्ष का मार्ग मिल जाए।

इस पूजा को करने से परिवार को पूर्वजों का आशीर्वाद मिलता है।

इस पूजा का मुख्य लाभ यह है कि इससे परिवार को सुख और शांति मिलती है। परिवार के सदस्य रोग मुक्त और स्वस्थ रहते हैं।

इससे परिवार को धन भी मिलता है।

यह पूजा अच्छे विवाह प्रस्तावों और योग का भाग्य भी लाती है। परिवार में कोई भी युवा अवस्था में नहीं मरता है।

यह पूजा उनके पेशेवर जीवन में प्रगति लाती है।

त्रिपिंडी श्राद्ध करने वाले लोगों को सभी 3 दुनिया में सम्मान मिलता है। और किसी को अपनी मृत्यु के बाद मोक्ष मिलता है।

अगर उसने अपने पूर्वजों के लिए इस पूजा अनुष्ठान किया है।

Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan – Astrology of My Life – Vedic Jyotish, K P Jyotish, Numerology, Palmistry and Vastu Expert

 

The post Tripindi Shraddha Puja – Moksha Mukti Sansthan – astrology of my life appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
https://www.astrologyofmylife.com/tripindi-shraddha-puja/feed/ 0
अंगारक योग – संघर्षकारी मंगल और राहु-केतु का योग https://www.astrologyofmylife.com/what-is-angarak-dosh/ https://www.astrologyofmylife.com/what-is-angarak-dosh/#respond Fri, 04 Jun 2021 12:14:08 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17789 संघर्षकारी मंगल और राहु-केतु का योग(Angarak Yog ek Dosh) संघर्षकारी मंगल और राहु का योग(Angarak Yog ek Dosh) Varshphal Report राहु के नैसर्गिक गुण/अवगुण राहु जातक, सिर और चेहरे, छायादार, धुएँ, बदसूरत अजीब दिखने वाला, धुएँ के रंग का (नीला या काला) रंग, मनमोहक, तर्कहीन, तर्कशील, कर्कश, हठी, तामसिक स्वभाव का, सिपाही, नकली, कपटी, स्वार्थी, …
Continue reading अंगारक योग – संघर्षकारी मंगल और राहु-केतु का योग

The post अंगारक योग – संघर्षकारी मंगल और राहु-केतु का योग appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>

संघर्षकारी मंगल और राहु-केतु का योग(Angarak Yog ek Dosh)

संघर्षकारी मंगल और राहु का योग(Angarak Yog ek Dosh)

Varshphal Report

राहु के नैसर्गिक गुण/अवगुण राहु जातक, सिर और चेहरे, छायादार, धुएँ, बदसूरत अजीब दिखने वाला, धुएँ के रंग का (नीला या काला) रंग, मनमोहक, तर्कहीन, तर्कशील, कर्कश, हठी, तामसिक स्वभाव का, सिपाही, नकली, कपटी, स्वार्थी, चालाक, चालाकी, भ्रम, भ्रम, धुँआ आदि विषयों का राहु कारक है। भ्रामक, स्वार्थी, जोखिम लेने वाला, वर्जित तोड़ने वाला, चालाक, विद्रोही, धुआं, जोड़ तोड़, चिंतनशील, महत्वाकांक्षी, भूखा, प्रवर्धक आदि।

Get Appointment

मंगल के नैसर्गिक गुण/अवगुण मंगल ग्रह अग्नि है, जो सभी ग्रहों में सबसे अधिक प्रबल है। यह क्षत्रिय (योद्धा), राशि का स्वामी मेष, वृश्चिक 1 और 8 वीं राशि का स्वामी, सेना पुरुष, अस्त्र और शस्त्र शौर्य, वीरता, क्रोध, भूमि के गुण, विवाद, षड्यंत्र, दुर्घटना, घाव, मर्दाना शक्ति, यंत्र, वैधानिकता और मुकदमेबाजी मंगल ग्रह से संबंधित और प्रतिनिधित्व वाले सभी विषय हैं। आक्रामक, गर्म स्वभाव, योद्धा, साहस, भाईचारा, दुर्घटना, तेज बुखार, रक्तचाप, कार्रवाई, सर्जक, जुनून, इच्छा, आवेगी, ज्वालामुखी विस्फोट आदि। (Angarak Yog ek Dosh)
जब राहु और मंगल एक ही भाव में युति बनाते हैं, तो वह मंगल राहु अंगारक योग कहलाता है। मंगल ऊर्जा का स्रोत है, जो अग्नि तत्व से संबद्घ है, जबकि राहु भ्रम व नकारात्मक भावनाओं से जुड़ा हुआ है। जब दोनों ग्रह एक ही भाव में एकत्र होते हैं तो उनकी शक्ति पहले से अधिक हो जाती है।
ज्योतिष में मंगल को क्रोध, वाद विवाद, लड़ाई झगड़ा, हथियार, दुर्घटना, एक्सीडेंट, अग्नि, विद्युत आदि का कारक ग्रह माना गया है तथा राहु को आकस्मिकता, आकस्मिक घटनाएं, शत्रु, षड़यंत्र, नकारात्मक ऊर्जा, तामसिकता, बुरे विचार, छल, और बुरी आदतों का
कारक ग्रह माना गया है, इसलिए फलित ज्योतिष में मंगल और राहु के योग को बाहुत नकारात्मक और उठापटक कराने वाला योग माना गया है मंगल और राहु स्वतंत्र रूप से अलग अलग इतने नकारात्मक नहीं होते पर जब मंगल और राहु का योग होता है तो इससे मंगल और राहु की नकारात्मक प्रचंडता बहुत बढ़ जाती है जिस कारण यह योग विध्वंसकारी प्रभाव दिखाता है, मंगल राहु का योग प्राकृतिक और सामाजिक उठापटक की स्थिति तो बनाता ही है पर व्यक्तिगत रूप से भी मंगल राहु का योग नकारात्मक परिणाम देने वाला ही होता है। (Angarak Yog ek Dosh)
यदि जन्मकुंडली में मंगल और राहु एक साथ हो अर्थात कुंडली में मंगल राहु का योग हो तो सर्वप्रथम तो कुंडली के जिस भाव में यह योग बन रहा हो उस भाव को पीड़ित करता है और उस भाव से नियंत्रित होने वाले घटकों में संघर्ष की स्थिति बनी रहती है उदाहरण के लिए यदि कुंडली के लग्न भाव में मंगल राहु का योग हो तो ऐसे में स्वास्थ पक्ष की और से हमेशा कोई न कोई समस्या लगी रहेगी, धन भाव में मंगल राहु का योग होने पर आर्थिक संघर्ष और क़ुतुब के सुख में कमी होगी इसी प्रकार पंचम भाव में मंगल राहु का योग शिक्षा और संतान पक्ष को बाधित करेगा।

Horoscope

इसके अलावा कुंडली में मंगल राहु का योग होने से व्यक्ति का क्रोध विध्वंसकारी होता है, समान्य रूप से तो प्रत्येक व्यक्ति को क्रोध आता है पर कुंडली में राहु मंगल का योग होने पर व्यक्ति का क्रोध बहुत प्रचंड स्थिति में होता है और व्यक्ति अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं कर पाता और बहुत बार क्रोध में बड़े गलत कदम उठा बैठता है, कुंडली में मंगल राहु का योग होने पर जीवन में दुर्घटनाओं की अधिकता होती है और कई बार दुर्घटना या एक्सीडेंट का सामना करना पड़ता है कुंडली में मंगल राहु का योग होने पर व्यक्ति को वहां चलाने में भी सावधानी बरतनी चाहिए , कुंडली में मंगल राहु का योग होने पर व्यक्ति को शत्रु और विरोधियों की और से भी बहुत समस्याएं रहती है और जीवन में वाद विवाद तथा झगड़ों की अधिकता होती है, कुंडली में मंगल राहु का योग बड़े भाई के सुख में कमी या वैचारिक मतभेद उत्पन्न करता है और मंगल राहु के योग के नकारात्मक परिणाम के कारण ही व्यक्ति को जीवन में कर्ज की समस्या का भी सामना करना पड़ता है, इसके अलावा यदि स्त्री जातक की कुंडली में मंगल राहु का योग हो तो वैवाहिक जीवन को बिगड़ता है स्त्री की कुंडली में मंगल पति और मांगल्य का प्रतिनिधि ग्रह होता है और राहु से पीड़ित होने के कारण ऐसे में पति सुख में कमी या वैवाहिक जीवन में संघर्ष की स्थिति बनी रहती है, जिन लोगो की कुंडली में मंगल राहु का योग होता है उन्हें अक्सर जमीन जायदात से जुडी समस्याएं भी परेशान करती हैं इसके अलावा मंगल राहु का योग हाई बी.पी. मांसपेशियों की समस्या, एसिडिटी, अग्नि और विद्युत दुर्घटना जैसी समस्याएं भी उत्पन्न करता है l

संघर्षकारी मंगल और केतु का योग (Angarak Yog ek Dosh)

Married Life Report

ज्योतिष शास्त्र में जब दो ग्रहों का प्रभाव एक जैसा हो तो उस प्रभाव की मिलने की सम्भावनाये बढ जाती हैं। इसी नियम के अधार पर ज्योतिष के समस्त योगों का निर्माण होता है। योग चाहे शुभ हो या अशुभ कारण यही नियम होगा। इस नियम के अनुसार जब किसी वस्तु, तत्व या गुण का प्रतिनिधित्व करने वाले दो ग्रह(ग्रह-भाव) का सयुंक्त प्रभाव एक साथ पडें तो उन के प्रभाव पर दोहरा बल काम करता है। यह नियम ग्रह बल तथा भाव के बल पर भी निर्भर करता है। जैसे शुक्र गुरु का सम्बंध, परस्पर एक दूसरे के विपरीत होने पर भी यें जातक को अत्यधिक विद्वान बनाते हैं, कारण स्पष्ट है कि इन दोनो ही ग्रहों को गुरु का पद प्राप्त है। इसी तरह अंगारक योग भी काम करता है।(Angarak Yog ek Dosh)मंगल तथा केतु की युक्ति अंगारक योग कहलाती है। यह अंगारक योग केतु व मंगल के सन्युक्त प्रभाव से बनता है। मंगल का दूसरा नाम अंगारक है। मंगल तिक्ष्ण, क्रूर, मारक क्षमता से युक्त ग्रह हैं। मंगल का जन्म कुंडली में अकेला प्रभाव भी हानिकारक हैं। जैसा की आपको ज्ञात है कि मंगल की विशेष भावों में स्थिति मंगल दोष को उत्पन्न करती है। मंगल जन्म कुंडली में सर्वाधिक पीडादायक ग्रह होता है। मंगल के समान ही केतु भी कष्ट दायक ग्रह होता है।(Angarak Yog ek Dosh)इसीलिये ज्योतिष शास्त्र मे मंगल के समान केतु कहा जाता है। इन दोनो का जन्म कुंडली में सन्युक्त प्रभाव मंगल की दोगुणी ताकत के समान होता है। जिस भाव में यह स्थिति बनेगी उस भाव जनित फलों को इनके प्रभाव से होकर गुजरना ही पडेगा।अंगारक योग में सबसे ज्यादा अग्नि व क्रोधात्मक प्रभाव देखने को मिलता

अंगारक दोष व्यक्ति, उसके गुस्से और उसके निर्णय के इर्द-गिर्द घूमता है। इस दोष के बुरे प्रभाव मिलने का एक बडा कारण इस योग के प्रभावों को न समझ पाना है।इस योग की अनदेखी के परिणामस्वरूप यह दोष और भी हानिकारक होता है। अंदर ही अंदर सुलगती यह अग्नि एकदिन प्रचंड रूप धारण कर लेती है। अंगारक योग के कारण, क्रोध, अग्निभय, दुर्घटना, ब्लड से सम्बंधीत रोग, और स्किन की समस्यायें मुख्य रूप से होती है।

सामान्य उपाय

Gemstone Suggestion

राहु मंगल युति का भाव अनुसार अलग अलग फल मिलता है उसी के अनुसार उपाय किये जायें तो परिणाम ज्यादा बेहतर मिलते है इसके लिये कुंडली का अध्ययन करना आवश्यक है फिर भी हम पाठको के लिये कुछ सामान्य उपाय बता रहे है आशा करते है इनको करने से आप लाभान्वित होंगे।

Married Life Report

तो यहाँ हमने देखा की मंगल और राहु का योग किस प्रकार की समस्याएं उत्पन्न करता है यदि कुंडली में मंगल राहु के योग के कारण समस्याएं उत्पन्न हो रही हो तो निम्नलिखित उपाय लाभकारी होंगे –
1. ॐ अंग अंगारकाय नमः का नियमित जाप करें।
2. हनुमान चालीसा का पाठ करें।
3. प्रत्येक शनिवार को साबुत उडद का दान करें।
4. प्रत्येक मंगलवार को गाय को गुड़ खिलाएं।
5. प्रतिदिन मस्तक पर सफ़ेद चन्दन का तिलक लगाएं।
6. शनिवार एवं बुधवार के दिन सूर्योदय से ढाई घंटे के अंदर सतनाजा (7 मुट्ठी सप्तधान्य) और सवा किलो कच्चा कोयला सर से 11 बार उसारकर बहते जल में प्रवाहित करें।

।। श्री हनुमते नमः।।

Prashna Kundli by Acharya Arya

The post अंगारक योग – संघर्षकारी मंगल और राहु-केतु का योग appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
https://www.astrologyofmylife.com/what-is-angarak-dosh/feed/ 0
कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी? https://www.astrologyofmylife.com/how-does-the-brahmaputra-river-turn-red-during-kamakhya-devi-menstruation/ https://www.astrologyofmylife.com/how-does-the-brahmaputra-river-turn-red-during-kamakhya-devi-menstruation/#respond Thu, 25 Feb 2021 06:28:13 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17748 कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी? रजस्वला स्त्री मासिक धर्म, एक स्त्री की पहचान है, यह उसे पूर्ण स्त्रीत्व प्रदान करता है। लेकिन फिर भी हमारे समाज में रजस्वला स्त्री को अपवित्र माना जाता है। महीने के जिन दिनों में वह मासिक चक्र के अंतर्गत आती है, …
Continue reading कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?

The post कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी? appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?

रजस्वला स्त्री मासिक धर्म, एक स्त्री की पहचान है, यह उसे पूर्ण स्त्रीत्व प्रदान करता है। लेकिन फिर भी हमारे समाज में रजस्वला स्त्री को अपवित्र माना जाता है। महीने के जिन दिनों में वह मासिक चक्र के अंतर्गत आती है, उसे किसी भी पवित्र कार्य में शामिल नहीं होने दिया जाता, उसे किसी भी धार्मिक स्थल पर जाने की मनाही होती है। लेकिन विडंबना देखिए कि एक ओर तो हमारा समाज रजस्वला स्त्री को अपवित्र मानता है वहीं दूसरी ओर मासिक धर्म के दौरान कामाख्या देवी को सबसे पवित्र होने का दर्जा देता है।

तांत्रिक सिद्धियां

यह मंदिर तांत्रिक सिद्धियां प्राप्त करने के लिए प्रसिद्ध है। यहां तारा, धूमवती, भैरवी, कमला, बगलामुखी आदि तंत्र देवियों की मूर्तियां स्थापित हैं।

Prashna Kundli by Acharya Arya

 

पुन: निर्माण

इस मंदिर को सोलहवीं शताब्दी में नष्ट कर दिया गया था लेकिन बाद में कूच बिहार के राजा नर नारायण ने सत्रहवीं शताब्दी में इसका पुन: निर्माण करवाया था।

कामाख्या शक्तिपीठ (कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?)

नीलांचल पर्वत के बीचो-बीच स्थित कामाख्या मंदिर गुवाहाटी से करीब 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह मंदिर प्रसिद्ध 108 शक्तिपीठों में से एक है। माना जाता है कि पिता द्वारा किए जा रहे यज्ञ की अग्नि में कूदकर सती के आत्मदाह करने के बाद जब महादेव उनके शव को लेकर तांडव कर रहे थे, तब भगवान विष्णु ने उनके क्रोध को शांत करने के लिए अपना सुदर्शन चक्र छोड़कर सती के शव के टुकड़े कर दिए थे। उस समय जहां सती की योनि और गर्भ आकर गिरे थे, आज उस स्थान पर कामाख्या मंदिर स्थित है।

Horoscope

 

कामदेव का पौरुष

इसके अलावा इस मंदिर को लेकर एक और कथा चर्चित है। कहा जाता है कि एक बार जब काम के देवता कामदेव ने अपना पुरुषत्व खो दिया था तब इस स्थान पर रखे सती के गर्भ और योनि की सहायता से ही उन्हें अपना पुरुषत्व हासिल हुआ था। एक और कथा यह कहती है कि इस स्थान पर ही शिव और पार्वती के बीच प्रेम की शुरुआत हुई थी। संस्कृत भाषा में प्रेम को काम कहा जाता है, जिससे कामाख्या नाम पड़ा।

अधूरी सीढ़ियां (कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?)

इस मंदिर के पास मौजूद सीढ़ियां अधूरी हैं, इसके पीछे भी एक कथा मौजूद है। कहा जाता है एक नरका नाम का राक्षस देवी कामाख्या की सुंदरता पर मोहित होकर उनसे विवाह करना चाहता था। परंतु देवी कामाख्या ने उसके सामने एक शर्त रख दी।

kamakhya Devi - acharya arya - puja

कामाख्या देवी से विवाह

कामाख्या देवी ने नरका से कहा कि अगर वह एक ही रात में नीलांचल पर्वत से मंदिर तक सीढ़ियां बना पाएगा तो ही वह उससे विवाह करेंगी। नरका ने देवी की बात मान ली और सीढ़ियां बनाने लगा। देवी को लगा कि नरका इस कार्य को पूरा कर लेगा इसलिए उन्होंने एक तरकीब निकाली। उन्होंने एक कौवे को मुर्गा बनाकर उसे भोर से पहले ही बांग देने को कहा। नरका को लगा कि वह शर्त पूरी नहीं कर पाया है, परंतु जब उसे हकीकत का पता चला तो वह उस मुर्गे को मारने दौड़ा और उसकी बलि दे दी। जिस स्थान पर मुर्गे की बलि दी गई उसे कुकुराकता नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की सीढ़ियां आज भी अधूरी हैं।

मासिक चक्र (कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?)

कामाख्या देवी को ‘बहते रक्त की देवी’ भी कहा जाता है, इसके पीछे मान्यता यह है कि यह देवी का एकमात्र ऐसा स्वरूप है जो नियमानुसार प्रतिवर्ष मासिक धर्म के चक्र में आता है। सुनकर आपको अटपटा लग सकता है लेकिन कामाख्या देवी के भक्तों का मानना है कि हर साल जून के महीने में कामाख्या देवी रजस्वला होती हैं और उनके बहते रक्त से पूरी ब्रह्मपुत्र नदी का रंग लाल हो जाता है।
निषेध है मंदिर में प्रवेश
इस दौरान तीन दिनों तक यह मंदिर बंद हो जाता है लेकिन मंदिर के आसपास ‘अम्बूवाची पर्व’ मनाया जाता है। इस दौरान देश-विदेश से सैलानियों के साथ तांत्रिक, अघोरी साधु और पुजारी इस मेले में शामिल होने आते हैं। शक्ति के उपासक, तांत्रिक और साधक नीलांचल पर्वत की विभिन्न गुफाओं में बैठकर साधना कर सिद्धियां प्राप्त करने की कोशिश करते हैं।

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

 

वाममार्गी (कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?)

कामाख्या मंदिर को वाममार्ग साधना के लिए सर्वोच्च पीठ का दर्जा दिया गया है। ऐसा माना जाता है कि मछन्दरनाथ, गोरखनाथ, लोनाचमारी, ईस्माइलजोगी आदि जितने भी महान तंत्र साधक रहे हैं वे सभी इस स्थान पर साधना करते थे, यहीं उन्होंने अपनी साधना पूर्ण की थी।

भक्तों और स्थानीय लोगों का मानना है कि अम्बूवाची पर्व के दौरान कामाख्या देवी के गर्भगृह के दरवाजे अपने आप ही बंद हो जाते हैं और उनका दर्शन करना निषेध माना जाता है। पौराणिक दस्तावेजों में भी कहा गया है कि इन तीन दिनों में कामाख्या देवी रजस्वला होती हैं और उनकी योनि से रक्त प्रवाहित होता है।

तंत्र साधनाओं में रजस्वला स्त्री और उसके रक्त का विशेष महत्व होता है इसलिए यह पर्व या कामाख्या देवी के रजस्वला होने का यह समय तंत्र साधकों और अघोरियों के लिए सुनहरा काल होता है।

Life Prediction

 

योनि के वस्त्र (कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?)

इस पर्व की शुरुआत से पूर्व गर्भगृह स्थित योनि के आकार में स्थित शिलाखंड, जिसे महामुद्रा कहा जाता है, को सफेद वस्त्र पहनाए जाते हैं, जो पूरी तरह रक्त से भीग जाते हैं। पर्व संपन्न होने के बाद पुजारियों द्वारा यह वस्त्र भक्तों में वितरित कर दिए जाते हैं।

बहुत से तांत्रिक, साधु, ज्योतिषी ऐसे भी होते हैं जो यहां से वस्त्र ले जाकर उसे छोटा-छोटा फाड़कर मनमाने दामों पर उन वस्त्रों को कमिया वस्त्र या कमिया सिंदूर का नाम देकर बेचते हैं।

http://www.astrologyofmylife.com/product/astrology-of-my-life-online-consultant-acharya-arya/

 

आस्था का विषय

देवी के रजस्वला होने की बात पूरी तरह आस्था से जुड़ी है। इस मानसिकता से इतर सोचने वाले बहुत से लोगों का कहना है कि पर्व के दौरान ब्रह्मपुत्र नदी में प्रचुर मात्रा में सिंदूर डाला जाता है, जिसकी वजह से नदी लाल हो जाती है। कुछ तो यह भी कहते हैं कि यह नदी बेजुबान जानवरों की बलि के दौरान उनके बहते हुए रक्त से लाल होती है। इस मंदिर में कभी मादा पशु की बलि नहीं दी जाती।
सामान्य स्त्री और देवी
खैर, तथ्य चाहे जो भी हो परंतु माहवारी काल के दौरान कामाख्या देवी की आराधना कर कहीं ना कहीं हम स्त्रीत्व की आराधना करते हैं। हम स्त्री, जिसे ‘जननी’ कहा जाता है, उसका भी सम्मान करते हैं। लेकिन जब बात व्यवहारिकता की, एक सामान्य स्त्री की आती है तो हमारा व्यवहार पूरी तरह क्यों बदल जाता है?

कामाख्या सिन्दूर असली में छोटे छोटे पत्थरोँ के रूप में होता है, जो की माँ कामाख्या मंदिर से प्राप्त होता है, प्रसाद के रूप में वहां से और भी माँ कामाख्या की चीज़ें प्राप्त होती है जिनमे कामाख्या वस्त्र, कामाख्या कड़ा और कामाख्या यन्त्र भी मिलता है पर सभी लोगो को नहीं.
सारे भक्तो को सिर्फ दो ही चीज़ें दी जाती है जब मंदिर का द्वार खुलता है और वो दो चीज़ें कामाख्या सिन्दूर और वस्त्र होती है कामाख्या सिन्दूर को लोग कामिया सिन्दूर भी कहते है और कामाख्या वस्त्र को लोग अम्बुबाची वस्त्र भी कहते है।
और ये दोनों चीज़ें सिर्फ अम्बुबाची मेला के दौरान ही वितरित की जाती है, तीन दिन के लिए मंदिर का द्वार बंद कर दिया जाता है और फिर जब मंदिर का द्वार खुलता है तो प्रसाद के रूप में सिन्दूर और वस्त्र वितरित किया जाता है।
अम्बुबाची मेला हर साल जून के महीने में मनाया जाता है, क्योकि जहा पर मंदिर स्थित है उस ग्राम का नाम अम्बुबाची है इसलिए इस मेले का नाम अम्बुबाची मेला है और ये मंदिर नीलांचल पर्वत पर स्थित है हर साल लाखो करोडो भक्त माँ कामाख्या का आशीर्वाद लेने यहाँ आते है और अपनी मनोकामनाओ को पूर्ण करते है।

Vastu Check by Scientifically

(कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी?)

The post कामाख्या देवी के मासिक धर्म के दौरान कैसे लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी? appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
https://www.astrologyofmylife.com/how-does-the-brahmaputra-river-turn-red-during-kamakhya-devi-menstruation/feed/ 0
Dhanteras: जानें कब है धनतेरस? शुभ मुहूर्त https://www.astrologyofmylife.com/puja-path-dhanteras-2020-date-puja-muhurat-timing-and-importance-acharya-arya/ https://www.astrologyofmylife.com/puja-path-dhanteras-2020-date-puja-muhurat-timing-and-importance-acharya-arya/#respond Fri, 06 Nov 2020 09:44:17 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17406 Dhanteras 2020 Date: हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हर साल धनतेरस या धनत्रयोदशी मनाई जाती है।  धनतेरस या धनत्रयोदशी हर वर्ष दिवाली से एक या दो दिन पहले होती है। दिवाली कार्तिक अमावस्या को होती है। धनतेरस या धनत्रयोदशी के दिन देवों के वैद्य भगवान धन्वंतरी की …
Continue reading Dhanteras: जानें कब है धनतेरस? शुभ मुहूर्त

The post Dhanteras: जानें कब है धनतेरस? शुभ मुहूर्त appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
Dhanteras 2020 Date: हिन्दू कैलेंडर के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को हर साल धनतेरस या धनत्रयोदशी मनाई जाती है।  धनतेरस या धनत्रयोदशी हर वर्ष दिवाली से एक या दो दिन पहले होती है। दिवाली कार्तिक अमावस्या को होती है। धनतेरस या धनत्रयोदशी के दिन देवों के वैद्य भगवान धन्वंतरी की विधि विधान से पूजा की जाती है। इस दिन लोग शुभता के लिए सोना, चांदी, आभूषण, बर्तन आदि की खरीदारी भी करते है।

Horoscope

 

Shri Dhan Laxmi Kuber Dhan Varsha Yantra

धनतेरस को धन्वंतरि और कुबेर की पूजा

धनतेरस को शुभ मुहूर्त में आपको देवताओं के वैद्य या आरोग्य के देवता धन्वंतरि और धन के देवता कुबेर की पूजा करनी चाहिए। धन्वंतरि को भगवान विष्णु का रुप माना जाता है। यह अपने हाथों में अमृत कलश धारण किए होते हैं। इनको पीतल के धातु प्रिय हैं, इसलिए धनतेरस को लोग पीतल के बर्तन आदि खरीदते हैं।

Shree Kuber Yantra

धनतेरस को यम दीपम

दिवाली से दो तिथि पूर्व यम के लिए दीपक जलाया जाता है। धनतेरस के दिन संध्या के समय में घर के बाहर एक दीपक जलाएं। यह दीपक यमराज के लिए जलाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि यम का दीपक जलाने से यमराज खुश होते हैं और परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से सुरक्षा प्रदान करते हैं।

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

The post Dhanteras: जानें कब है धनतेरस? शुभ मुहूर्त appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
https://www.astrologyofmylife.com/puja-path-dhanteras-2020-date-puja-muhurat-timing-and-importance-acharya-arya/feed/ 0
How will the transcendence of the Vakri Guru be in the Sagittarius sign for 12 zodiac signs https://www.astrologyofmylife.com/how-will-the-transcendence-of-the-vakri-guru-be-in-the-sagittarius-sign-for-12-zodiac-signs/ https://www.astrologyofmylife.com/how-will-the-transcendence-of-the-vakri-guru-be-in-the-sagittarius-sign-for-12-zodiac-signs/#respond Tue, 30 Jun 2020 19:11:44 +0000 https://www.astrologyofmylife.com/?p=17166 वक्री गुरु का धनु राशि में गोचर कैसा रहेगा 12 राशियों के लिए गुरु महाराज अपनी नीच राशि से निकल अपनी मूलत्रिकोण राशि धनु में 30 जून 2020 को शाम 16:30 बजे प्रवेश करेंगे। इस समय गुरु महाराज वक्र गति में रहेंगे और ज्योतिष में यह माना जाता है कि शुभ ग्रह अपनी वक्री अवस्था …
Continue reading How will the transcendence of the Vakri Guru be in the Sagittarius sign for 12 zodiac signs

The post How will the transcendence of the Vakri Guru be in the Sagittarius sign for 12 zodiac signs appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
वक्री गुरु का धनु राशि में गोचर कैसा रहेगा 12 राशियों के लिए

गुरु महाराज अपनी नीच राशि से निकल अपनी मूलत्रिकोण राशि धनु में 30 जून 2020 को शाम 16:30 बजे प्रवेश करेंगे। इस समय गुरु महाराज वक्र गति में रहेंगे और ज्योतिष में यह माना जाता है कि शुभ ग्रह अपनी वक्री अवस्था में और शुभ फल देते हैं। धनु राशि में गुरु महाराज 20 नवंबर 2020 सुबह 06:26 मिनट तक रहेंगे, उसके बाद वह मकर राशि में जाएंगे। आइये जानते हैं कैसा रहेगा गुरु महाराज का गोचर विभिन्न चंद्र राशियों के लिए-*

Gemstone Suggestion

मेष राशि

इस राशि के लिए गुरु का वक्री गोचर काफी शुभ रहेगा। आप नकारात्मक विचारों से मुक्ति प्राप्त कर सकारात्मकता की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

प्रोफेशनल फील्ड में जो जातक हैं उन्हें नए अवसरों की प्राप्ति होगी, साथ ही आप की प्रबंधन क्षमता में भी इज़ाफा होगा। सीनियर्स के साथ जो भी आप के गतिरोध हैं वो समाप्ति की ओर अग्रसर होंगे। आप का खुद पर विश्वास मजबूत होगा जिससे स्वयं निर्णय लेने में सक्षम होंगे! यह मेष राशि वालों के स्वभाव का एक निहित गुण है, जोकि गुरु की नीच अवस्था के चलते प्रभावी नहीं हो पा रहा था!

वक्री गुरु की इस स्थिति में आध्यात्मिकता की तरफ भी आपका झुकाव बढ़ेगा जिससे आपको स्वयं से जुड़ने में मदद मिलेगी और जो भी आपके अतीत की भावनाएं आपको परेशान कर रहीं थी उनसे बाहर आने में आप के लिए सहायक सिद्ध होगा। इससे आपको स्वास्थ्य लाभ भी प्राप्त होगा और आपकी विचार प्रक्रिया भी स्पष्ट होगी जिससे नयी दिशा की ओर आगे बढ़ने में मदद मिलेगी। यात्रा में भी लाभ मिलेगा।

Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya

विद्यार्थियों के लिए भी यह वक्री गोचर अच्छे समाचार लेकर आएगा, उच्च शिक्षा में आ रहे विघ्न समाप्त होते हुए नज़र आ रहे हैं। इसलिए अपने प्रयासों में ईमानदार रहेंगे तो सफलता मिलने में देर नहीं लगेगी।

वृषभ राशि

इस राशि के लिए गुरु का वक्री गोचर मिश्रित परिणाम लेकर आएगा। गुरु आपके नवम भाव से वापस आपके अष्टम भाव में गोचर करेगा।

यह गोचर परिवर्तन के साथ-साथ अनिश्चिता की ओर संकेत कर रहा है। इससे आप थोड़ी बेचैनी और चिंता महसूस करेंगे, भविष्य को लेकर थोड़ी बहुत आशंकाएं भी घर करेंगी क्योंकि यह गुरु ग्रह का निहित गुण है, वह थोड़ा चीज़ों को बड़ा कर दिखाते हैं। इसलिए हो सकता है जो भी परिवर्तन आएं वो शुरू में आपको विचलित करें ,परन्तु आपको यह समझना होगा यह समय आपके लिए इसलिए अच्छा है की यह आपकी आत्मनिरीक्षण और खुद को समझने करने में मदद करेगा।

इस समय आपको यह जानने में मदद मिलेगी कि आप की कहाँ कमी रह रही है, क्या आपको करने की जरूरत है जिससे आप सही दिशा प्राप्त कर सकें और आगे बढ़ सकें। इससे आपको आपके प्रोफेशन और पारिवारिक रिश्तों को समझने में भी सहायता प्राप्त होगी। प्रोफेशनल्स को यह समय शोध कार्य करने में, अपने अभ्यास में, अपने कौशल को बढ़ाने में उपयोग में लाना चाहिए जिससे उनके लिए नए रास्ते खुलेंगे। आकस्मिक लाभ भी प्राप्त हो सकते हैं।

आपसी रिश्तों में थोड़ा तनाव की स्थिति रह सकती है, परन्तु यह वक्री गुरु का गोचर आपको यह सिखाने आया है कि जो भी विषय, व्यक्ति आपके जीवन में गैरजरूरी है, वह स्वयं ही आपसे दूर हो जाएगा। जब आप यह समझ जाएंगे तो आसक्ति से, भावनात्मक जुड़ाव से दूर रहने में और बाहर निकलने में आपको मदद मिलेगी। इस समय गूढ़ विषयों को जानने में आपकी रुचि बढ़ेगी। किसी भी विषय को उसके आधारभूत और मूल से समझने के लिए यह अच्छा समय रहेगा, जो विद्यार्थी ऐसा करेंगे, उनको आगे बढ़ने में सहायता प्राप्त होगी। स्वास्थ्य के मामले में थोड़ा आपको सजग रहने की आवश्यकता रहेगी, पेट या पेट के निचले हिस्से से संबंधित दिक्कत आ सकती है ।

Get Appointment

मिथुन राशि

यह समय या गोचर मिथुन राशि वालों के लिए काफी शुभ रहेगा, वक्री गुरु आपके अष्टम स्थान से आपके सप्तम स्थान में वापस गोचर करेगा जो कि यह इंगित करता है कि रिश्तों में सामंजस्य बिठाने में आपको काफी मदद मिलेगी। जिन व्यक्तियों को प्रेम संबंधों में चुनौती आ रही थी, उन्हें रिश्ता सुधारने में मदद मिलेगी। जो जातक विवाह का इंतज़ार कर रहे थे, उन्हें अनुकूल अवसर प्राप्त होंगे।

व्यवसाय / प्रोफेशन में आ रही परेशानियों के हल मिलने शुरू हो जाएंगे, नए रास्ते मिलने शुरू होंगे। कार्यक्षेत्र में स्थिरता की ओर बढ़ेंगे, शौर्य और साहस में वृद्धि होगी जिससे अनिश्चितता से बाहर आने में मदद मिलेगी। मिथुन राशि का स्वाभाविक गुण अच्छे से विचारों और सूचनाओं का आदान प्रदान करना है, इसलिए इस गोचर में आप जितना लोगों से मिलेंगे जुलेंगे उतना आप को बढ़िया अवसर प्राप्त होंगे, उतना आपको अपनी आय बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह वक्री गोचर आपको काफी अच्छा प्लेटफॉर्म देगा अपना कौशल दिखाने का, किसी भी मौके को हाथ से जाने न दें।

Horoscope

पिता के साथ संबंधों में मज़बूती आएगी, प्रोफेशन में आपकी किसी बड़े व्यक्ति से मुलाकात और उनकी सलाह जीवन को नयी दिशा की ओर मोड़ सकती है। स्वास्थ के संबंध में यह गोचर शुभ रहेगा, फिर भी अपने खान-पान में लापरवाही न बरतें, अन्यथा वजन बढ़ने जैसी दिक्कतें आ सकती हैं। मिथुन के लिए यह वक्री गुरु का गोचर काफी अनुकूल परिणाम लेकर आएगा, इसलिए अपने प्रयास लगातार जारी रखें।

कर्क राशि

यह गुरु का वक्री गोचर कर्क राशि वालों के लिए मिश्रित या औसत परिणाम देगा। यह गोचर कर्क राशि वालों के लिए व्यवधान उत्पन्न करेगा, परन्तु साथ ही आपकी साहस की वृति, या जुझारू प्रवर्ति में भी बढ़ोतरी करेगा जो कि इन व्यवधानों से पार पाने में आपके लिए सहायक होगा।

जो जातक जॉब कर रहे हैं ,प्रबंधन क्षेत्र , टीचिंग या कंसल्टेंसी के प्रोफेशन में हैं, उनके लिए यह गुरु का वक्री गोचर अनुकूल रहेगा या जो अपने कौशल से संबंधित कोई काम कर रहे हैं उन्हें अच्छी सफलता मिलेगी। जो जातक अपना व्यवसाय कर रहे हैं, उन्हें अपने संसाधनों के अनुरूप ही निर्णय लेने होंगे, किसी भी प्रकार के लोन या कर्ज लेने से बचना चाहिए, अन्यथा परेशानिओं का सामना करना पढ़ सकता है। इस गोचर का मुख्य संदेश यह है कि आपको भाग्य का सहारा न लेकर, अपने कौशल पर भरोसा रखना है।

Life Prediction

पारिवारिक रिश्तों में भी थोड़ा बहुत सामंजस्य बढ़ाने में मदद मिलेगी, किसी नए मेहमान का आगमन परिवार में हो सकता है। विद्यार्थियों के लिए यह गुरु की वक्र स्थिति अनुकूल रहेगा, खासकर उनके लिए जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह गोचर थोड़ा परेशान कर सकता है, खासकर चर्बी से संबंधित परेशानी, पेट से संबंधित परेशानी इसलिए अपने खान-पान का अवश्य ध्यान रखें और इससे भी जरुरी बात नकारात्मकता से जितनी दूर रहेंगे उतना लाभ स्वास्थ्य में होगा। व्यायाम, योगा इत्यादि को दिनचर्या में सम्मिलित करना आपको बहुत अच्छे परिणामों की प्राप्ति कराएगा !

सिंह राशि

यह गुरु का वक्री गोचर सिंह राशि के जातकों के लिए अनुकूल परिणाम लेकर आएगा। यह समय नयी योजनाएं बनाने में और उनको क्रिन्यान्वित करने के लिए बहुत शुभ रहेगा क्योंकि इस समय आपकी प्रबंधन क्षमता अपने चरम पर होगी। आपकी बुद्धि क्षमता, निर्णय लेने में स्पष्टता रहेगी, जिस की वजह से लोग आपसे महत्वपूर्ण विषयों पर सलाह लेने आएँगे और आपका समाज में रूतबा बढ़ेगा। इस समय आप सकारात्मकता से भरे हुए और गतिशील रहेंगे इसलिए इस समय जो भी आपके अपूर्ण कार्य हैं उन्हें पूरा कर लें। जितने भी व्यवधान आ रहे थे, वह सब दूर होंगे, नए अवसरों की प्राप्ति होगी। जो जातक जॉब मे हैं और परिवर्तन करना चाह रहे हैं, उन्हें कहीं अच्छी जगह अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

प्रेम जीवन के लिए भी यह वक्री गोचर बहुत शुभ रहेगा चाहे आप नए संबंधों में जाना चाहते हैं या पुराने रिश्तों में सुधार लाना चाहते हैं, स्तिथियाँ आपके अनुकूल रहेंगी। संतान सम्बन्धी विषयों में आ रही परेशानी दूर होगी। यह समय विद्यार्थियों के लिए भी शुभ समाचार ले कर आएगा, उच्च शिक्षा में आ रही दिक्कतें दूर होंगी, जो विद्यार्थी शोध कार्य से जुड़े हुए हैं, उन्हें बहुत अच्छी सफलता की प्राप्ति होगी। अध्यात्म या गूढ़ विषय जैसे ज्योतिष इत्यादि में आपकी काफी रुचि बढ़ेगी, कुछ नया सीखने की जिज्ञासा बनी रहेगी।

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

स्वास्थ्य की दृष्टि से भी यह समय बहुत अच्छा रहेगा, वक्री गुरु की लग्न पर दृष्टि एक रक्षा कवच का काम करेगी, बस थोड़ा बहुत जो ध्यान देना है वो अपने खान पान पर और व्यायाम पर देना है, क्योंकि इस समय वजन बढ़ने की काफी सम्भावना रहती है। परन्तु इस समय आपको एक और चीज़ से सावधान रहने की ज़रुरत है, वह है आपका अहम भाव क्योंकि आपको यह लग सकता है कि आप सब जानते हैं, और वहीं आप भूल कर जाएंगे ।

कन्या राशि

कन्या राशि के लिए भी यह वक्री गुरु के गोचर अच्छे परिणाम लेकर आएगा। यह गोचर आपके पंचम भाव से आपके चतुर्थ भाव में होगा जहां पर (पंचम भाव में) यह शनि महाराज के साथ विराजमान थे।

गुरु अपनी वक्र स्थिति में आपके लिए राहत लेकर आया है, यह इंगित करता है कि अब आप अपने प्रयास, चाहे वो आम जिंदगी हो या आपका कार्य-क्षेत्र, उन्हीं जगहों पर करेंगे जहां से आपको मन की शांति प्राप्त हो, जहां आप सुखद और सहज महसूस कर पाएँ। यह गोचर आपकी सुख सुविधाओं में भी वृद्धि करेगा, नए वाहन, मकान की प्राप्ति संभव है, पुराने ज़मीन जायदाद के लंबित पड़े मामले सुलझेंगे।

गुरु का यह वक्री गोचर अध्यात्म, मैडिटेशन, योग द्वारा खुद से जुड़ने के लिए भी बहुत अच्छा है, इससे जिन भी भावनात्मक परेशानियों से आप गुज़र रहे थे उनसे आपको छुटकारा पाने में मदद मिलेगी। माता को स्वास्थ्य में भरपूर लाभ मिलेगा, उनसे संबंधों में भी मज़बूती आएगी। जीवनसाथी से संबंधों में मधुरता आएगी, उनके काम- काज या प्रोफेशन में भी जो दिक्कतें आ रही थीं, वो दूर होंगी।

Married Life Report

नव संबंधों में जो लोग जुड़ना चाहते हैं, हो सकता है वह थोड़ा भावनाओं में सुरक्षा की चाह के चलते ऐसा करने में थोड़ा झिझकें, आपको यह समझाना होगा कि प्यार में कोई सुरक्षा नहीं होती। विद्यार्थी वर्ग के लिए भी समय अनुकूल है, परन्तु कई बार आप आराम पसंद बन सकते हैं, जिससे थोड़ी परेशानी बढ़ सकती है। आपको थोड़ा इस पर ध्यान देने की जरूरत रहेगी। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी गुरु का वक्री होना आपके लिए बहुत ही शुभ रहेगा, जो भी थोड़ी बहुत परेशानियां चल रही थीं, उनसे छुटकारा पाने में मदद मिलेगी।

तुला राशि

तुला राशि वालों के लिए गुरु का वक्री होकर यह राशि परिवर्तन चतुर्थ भाव से तृतीय भाव में होगा। जिसे पराक्रम, साहस, अभिलाषा और रुचि का स्थान माना जाता है, जो यह दिखाता है कि आपने जो अपनी सीमायें बाँधी थी, उनसे आप ऊपर उठने का प्रयास करेंगे, जिससे आपको नए अवसरों की प्राप्ति होगी। आप नए विचारों और प्रयोगों से पीछे नहीं हटेंगे, जिससे लाभ की सम्भावना में वृद्धि होगी। आपके कम्युनिकेशन स्किल्स में भी इजाफा होगा जिससे आप अपनी भावनाओं को और अच्छे से सबके सामने प्रस्तुत कर पाएंगे, जो आपके व्यवसाय और संबंध दोनों के लिए बहुत अच्छे परिणाम लेकर आएगा ।

यह समय कौशल को और निखारने का समय है, क्योंकि यह समय आपको आपके कौशल के अनुरूप अवसर प्रदान करेगा। यह समय आपके लिए स्वयं को खोजने का भी समय है, जो भी चीज़ें आपको प्रिय हैं उनको करें क्योंकि जितना आप अपने पसंद की चीजें करेंगे उतना खुद को आप उन्मुक्त पाएंगे जिससे आपकी निर्णय क्षमता काफी अच्छी होगी। जिसमें पिछले कुछ समय से परेशानी आ रही थी । आपके किये गए प्रयासों को भी सही दिशा प्राप्त होगी।

Prashna Kundli by Acharya Arya

भाई बहन-सहोदर का सहयोग पूर्ण रूप से प्राप्त होगा। जीवनसाथी का सहयोग भी आपकी तरक्की में योगदान देगा। भाग्य का भी भरपूर साथ मिलता हुआ नज़र आ रहा है। विद्यार्थी वर्ग खासकर वह विद्यार्थी जो किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं उनके लिए समय बहुत शुभ रहेगा। यह समय आपके लिए बहुत अच्छा है, परन्तु आप अपना काफी समय दूसरों को प्रसन्न करने में लगा देते हैं, यदि आप अपनी इस प्रवर्ति से बचेंगे तो यह गुरु का वक्री गोचर से आप और अधिक लाभ उठाने में कामयाब होंगे।

वृश्चिक राशि

वृश्चिक राशि के जातकों के लिये भी यह गुरु का वक्री होकर धनु राशि में गोचर काफी शुभ रहेगा। गुरु महाराज आपके तीसरे स्थान से, जो कि प्रयास का स्थान है, से दूसरे भाव में विचरण करेंगे जो की संचित धन, परिवार का स्थान है। यह दर्शाता है कि यह समय राहत देने वाला है, अथक प्रयासों के बाद भी पिछले कुछ समय से आपको सही दिशा नहीं मिल पा रही थी, वह दिशा अब मिलनी शुरु हो जायेगी। आय में भी बढ़ोतरी संभव होती नज़र आ रही है, प्रोफेशन, जॉब में नए अवसरों की प्राप्ति होगी। कोई नई ज़िम्मेदारी या नए पद से आपको नवाजा जा सकता है।

जो जातक काफी समय से अपने व्यवसाय में जाना चाहते थे, उनके लिए भी गुरु का वक्री होना अनुकूल है और जो पहले से अपना व्यवसाय कर रहे हैं, वह अपने संसाधनों का उपयोग सही से कर पाएंगे जिससे अच्छा मुनाफ़ा होने की उम्मीद है। इस समय में आपका सारा ध्यान धन संचय पर होना चाहिए।

Career Report : One Year

आप परिवार के साथ अधिक समय बिताने का प्रयास करेंगे जिससे पारिवारिक संबंधों में भी मधुरता आएगी। परिवार में बढ़ोतरी के भी अच्छे संकेत हैं। जो जातक काफी समय से परिणय सूत्र में बंधना चाहते हैं, उनके लिए शुभ समाचार की प्राप्ति संभव है। विद्यार्थियों के लिए शुभ संकेत रहेंगे, विद्या प्राप्ति के लिए अनुकूल वातावरण प्राप्त होगा, बाधाएं दूर होती हुई नज़र आ रही हैं। स्वास्थ्य की दृष्टि से भी गुरु का यह भ्रमण वृश्चिक जातकों के लिए अच्छा रहेगा।

धनु राशि

गुरु का यह वक्री गोचर आपके दूसरे भाव से जहां गुरु नीच भाव में विराजमान थे से अब आपके प्रथम भाव में होगा, जोकि काफी अच्छे फलों की ओर इशारा कर रहा है। सबसे पहला परिवर्तन जो आपको महसूस होगा वो आपके स्वभाव में होगा। कुछ समय से आप थकान, सुस्ती महसूस कर रहे थे वह अब दूर हो जाएगी और आप खुद को ऊर्जावान महसूस करेंगे।

आप सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ेंगे जो आपके स्वास्थ्य और निर्णय क्षमता में भी दिखायी देगा। धर्म, अध्यात्म में भी रुचि बढ़ेगी, आप के अंदर समाज को कुछ योगदान देने की भावना भी आयेगी और आप इसके लिए प्रयासरत भी रहेंगे। भाग्य का भरपूर साथ मिलेगा इसलिए जो भी अवसर आपके सामने प्रस्तुत हों उन्हें लेने से न चूकियेगा।

Gemstone Suggestion

गुरु आपकी राशि के लिए चतुर्थ भाव का भी स्वामी है इसलिए आपके जमीन -जायदाद से संबंधित मामले लंबित चल रहे थे वह गतिशील होंगे व नए मकान इत्यादि के रास्ते खुलेंगे। जो जातक परिणय सूत्र में बंधने का इंतज़ार कर रहे हैं उनके लिए गुरु का राशि परिवर्तन अच्छी खबर लेकर आएगा, वहीं जो जातक पहले से ही विवाहित या किसी समबन्ध में हैं, उनके लिए थोड़ा सी दिक्कत आ सकती है, सावधानी रखें क्योंकि कई बार आप अपने साथी के मित्र कम सलाहकार बनने का ज्यादा प्रयास करेंगे।

संतति के लिहाज से यह परिवर्तन शुभ समाचार लेकर आएगा। विद्यार्थी वर्ग भी उच्च शिक्षा की और अग्रसर होते हुए नज़र आ रहे हैं, परिवार का साथ भी खूब रहेगा। हर दृष्टिकोण से यह गोचर शुभ रहेगा यह कहना भी गलत नहीं है।

मकर राशि

गुरु का यह वक्री गोचर आपके लिए बहुत शुभता लेकर आएगा, आपके लग्न भाव से गुरु राशि परिवर्तन कर आपके द्वादश भाव में अपनी राशि में विराजमान होंगे। यह गोचर खासकर उन जातकों के लिए बहुत शुभ रहेगा, जिनका इम्पोर्ट / एक्सपोर्ट का काम है और जो लोग विदेश की किसी कंपनी में काम करते हैं। विदेश जाने वालों के लिए भी यह गोचर शुभ समाचार लेकर आएगा। आप का खुद पर विश्वास और बढ़ना शुरू हो जाएगा, दूसरों पर निर्भरता में कमी आएगी, जिससे आपको सही फैसले लेने में कामयाबी मिलेगी।

जितनी आप यात्रा करेंगे उतना अधिक लाभ प्राप्त होगा, परन्तु पहले से यात्रा के लिए अच्छा बजट प्लान बनाना सही रहेगा। आपकी आध्यात्मिक, धार्मिक क्रियाकलापों में रुचि बढ़ेगी, इसमें खूब बढ़ चढ़कर भाग लेंगे। परन्तु स्वास्थ्य की दृष्टि से यह समय थोड़ा कमज़ोर रह सकता है, थोड़ा अवांछित परिस्थियों का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए खान पान का ध्यान रखना जरूरी होगा। योग, प्राणायम, खेल- कूद, में भाग लेना आपके लिए बहुत अच्छा रहेगा।

Signature Design

संबंधों में भी नवीनता आएगी, ख़राब रिश्ते से या आप जिस रिश्ते में भावनात्मक परेशानियों का सामना कर रहे थे, उससे बाहर आने में मदद मिलेगी। अगर आप अपने स्वास्थ्य पर ध्यान देंगे तो यह गोचर आपके लिए बाकी सब दृष्टियों से शुभ रहेगा।

कुम्भ राशि

कुम्भ राशि के लिए यह वक्री गुरु का परिवर्तन आय के नए स्रोत खोलेगा, खर्चों को नियंत्रण में रखने में कामयाब होंगे। जो भी आपकी योजनाएं थी, वह कार्यांन्वित होनी शुरू हो जाएंगी। यह गोचर यह दिखाता है कि अब आप लोगों से जितना मिलेंगे-जुलेंगे, उतना ही आपको लाभ प्राप्त होगा, कोई पुराना मित्र आपके लिए कोई नयी सम्भावना ला सकता है।

सामाजिक प्रतिष्ठा में भी बढ़ोतरी होगी। आप अब थोड़ा अधिक महत्वाकांक्षी होंगे, लक्ष्यों के प्रति और अधिक सजग होकर प्रयास करेंगे जिससे लाभ मिलने की काफी सम्भावना रहेगी। व्यापारी वर्ग के लिए भी यह परिवर्तन व्यवसाय को और आगे बढ़ाने के अवसर प्राप्त कराएगा।

Name Check & Suggestion by Numerology

बड़े भाई-बहनों से मनमुटाव समाप्त होंगे, सन्तति को लेकर भी वक्री गुरु की यह स्थिति काफी शुभ रहेगी, परिवार में बढ़ोतरी संभव है। यदि आप इस राशि के माता-पिता हैं तो संतान की तरक्की से काफी प्रसन्नता की प्राप्ति होगी। प्रेम संबंधों में तरोताज़गी आएगी, नयी ऊर्जा से भरे रहेंगे जिससे आपका संगी भी आपसे प्रसन्न रहेंगा।

आपकी अंतर्दृष्टि इस समय काफी अच्छी रहेगी, जिससे आपको नयी दिशा प्राप्त करने में सहायता मिलेगी। विद्यार्थी वर्ग को भी उच्च शिक्षा में परिवार का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा, जिससे वह प्रगति के पथ पर अग्रसर होते हुए नज़र आएंगे। जो भी जातक अपनी शिक्षा पूर्ण कर नौकरी की तलाश में हैं, उन्हें भी अच्छे अवसरों की प्राप्ति होगी। स्वास्थय की दृष्टि से भी समय उत्तम रहेगा, बस थोड़ा खान-पान में ध्यान देने की आवश्यकता है, वसा युक्त भोजन न करना शुभ रहेगा।

मीन राशि

मीन राशि वालों के लिये वक्री गुरु का परिवर्तन लाभ भाव से जहां गुरु महाराज नीच के थे और शनि के साथ विराजमान थे, वहां से दशम भाव में अपनी मूल त्रिकोण राशि में होगा, जो कि नौकरी में तरक्की और बदलाव दिखा रहा है। यह परिवर्तन आपको और अधिक कार्य उन्मुख बनाएगा, अब आपका ध्यान टारगेट से हटकर या प्रशंसा की और से हटकर सिर्फ काम को सुचारू रूप से, नवीनता और सृजनात्मकता से कैसे किया जाए इस तरफ रहेगा, जिससे सफलता के साथ -साथ उच्च अधिकारियों का सम्मान और प्रोत्साहन भी आपको प्राप्त होगा।

पिता के स्वास्थ्य में सुधार के साथ-साथ उनसे संबंधों में भी मधुरता आएगी, उनसे आपको काफी प्रोत्साहन, सहयोग की भी प्राप्ति होगी, जिससे परिवार मे ख़ुशी का वातावरण रहेगा। आपकी वाक् शक्ति में भी इज़ाफा होगा, जिससे काफी लोग आपसे सलाह मशवरा लेंगे। सरकारी क्षेत्र से भी लाभ मिलने की सम्भावना रहेगी। घर या गाड़ी में इज़ाफा या नवीन कार्य की योजना बनेगी।

Vastu Check by Scientifically

शत्रु पक्ष पर विजय हासिल होगी, कोर्ट -कचहरी में लंबित पड़े मामले तेजी से आगे बढ़ेंगे। प्रेम के मामले में यह गोचर थोड़ा मिश्रित परिणाम देने वाला रह सकता है, आपको इसके लिए अपने व्यवसाय और परिवार में सामंजसय बिठाना पड़ेगा। आपका आत्मविश्वास इस समय बढ़ा हुआ रहेगा, इसलिए निर्णय लेने में समय न गवांये, क्योंकि मीन राशि वालों की सबसे बड़ी समस्या निर्णय लेने की होती है।

अपनी नैतिकता के चलते कभी-कभी आप आत्मग्लानि के शिकार भी हो जाते हैं, जिससे आप का स्वयं के किये गए निर्णयों पर से विश्वास डगमगा जाता है , जो गुरु की इस वक्र स्थिति में आपके परिणाम घटा सकती है । इसलिए अपनी इस प्रवर्ति से आप जितना बच कर चलेंगें, उतना आपके लिए अच्छा रहेगा !

Panch Mukhi/ Five Faced Rudraksha

The post How will the transcendence of the Vakri Guru be in the Sagittarius sign for 12 zodiac signs appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
https://www.astrologyofmylife.com/how-will-the-transcendence-of-the-vakri-guru-be-in-the-sagittarius-sign-for-12-zodiac-signs/feed/ 0
Solar Eclipse 2020: 21 जून को लग रहा है सूर्य ग्रहण जानें, सतूक काल और उपाय https://www.astrologyofmylife.com/solar-eclipse-2020-june-21-surya-grahan-date-timing-and-sutak-kaal-chandra-grahan-sutak-on-21-june-2020/ https://www.astrologyofmylife.com/solar-eclipse-2020-june-21-surya-grahan-date-timing-and-sutak-kaal-chandra-grahan-sutak-on-21-june-2020/#respond Sat, 20 Jun 2020 07:10:58 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=17036 Sutak Kaal: चंद्र ग्रहण के बाद जून माह का दूसरा ग्रहण यानि सूर्य ग्रहण 21 जून 2020 को लगने जा रहा है. इस ग्रहण में सूतक काल मान्य है. आइए जानते हैं इसका समय और उपाय. Surya Grahan: सूर्य ग्रहण को प्रमुख खगोलीय घटना के तौर पर देखा जाता है. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण और …
Continue reading Solar Eclipse 2020: 21 जून को लग रहा है सूर्य ग्रहण जानें, सतूक काल और उपाय

The post Solar Eclipse 2020: 21 जून को लग रहा है सूर्य ग्रहण जानें, सतूक काल और उपाय appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
Sutak Kaal: चंद्र ग्रहण के बाद जून माह का दूसरा ग्रहण यानि सूर्य ग्रहण 21 जून 2020 को लगने जा रहा है. इस ग्रहण में सूतक काल मान्य है. आइए जानते हैं इसका समय और उपाय.

Surya Grahan: सूर्य ग्रहण को प्रमुख खगोलीय घटना के तौर पर देखा जाता है. ज्योतिष शास्त्र में सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण को विशेष महत्व दिया गया है. पौराणिक ग्रंथों यहां तक की महाभारत में भी सूर्य ग्रहण का वर्णन आता है. विशेष बात ये है कि इस सूर्य ग्रहण में सूतक लगेगा. जो की बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है. सूतक ग्रहण से 12 घंटे पूर्व लगता है और इसकी समाप्ति ग्रहण के समाप्त होने के बाद ही मानी जाती है.

सूर्य ग्रहण कब लगेगा
सूर्य ग्रहण 21 जून को सुबह 10:20 बजे शुरू होगा. इसका चरम दोपहर 12:02 बजे होगा और मोक्ष दोपहर में 3:04 बजे होगा.

सूर्य ग्रहण का सूतक काल
सूर्य ग्रहण 21 जून की सुबह लगेगा इसलिए ग्रहण का सूतक काल 20 जून को शनिवार रात 21:52 बजे से आरंभ हो जायेगा और 21 जून को 13:49 पर समाप्त होगा.

 

सूतक काल क्या होता है
मान्यता है कि ग्रहण से पूर्व लगने वाले सूतक काल में कोई भी धार्मिक कार्य नहीं किए जाते हैं. इस दौरान मंदिर के कपाट भी बंद हो जाते हैं. इस दौरान अग्निकर्म भी नहीं किए जाते हैं कहा जाता है ऐसा करने से अग्निदेव नाराज होते हैं.

 

सूतक काल में न निकलें घर से
21 जून को दिन में ग्रहण लग रहा है. 20 जून की रात से ही सूतक आरंभ हो जाएगा इसलिए जिस दिन से सूतक काल आरंभ हो उसके बाद घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए.

 

ग्रहण के समय निकलने वाली ऊर्जा से बचें
ग्रहण के समय ग्रह पीड़ित हो जाता है. ग्रहण के समय कई प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होती है जो बुरा प्रभाव डालती है इसलिए इस ऊर्जा से बचना चाहिए. क्योंकि ये ऊर्जा मनुष्य की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं. इसलिए ग्रहण के बाद स्नान करना चाहिए.

 

न बनाएं, न खाएं भोजन
ग्रहण के समय भोजन नहीं बनाना चाहिए और न ही भोजन करना चाहिए. वहीं गर्भवती महिलाओं को भी इस दौरान घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए.

Surya Grahan ke Prabhav se kaise bachein

  1. सूर्य ग्रहण के समय हर किसी को अपने इष्ट देवता को मन ही मन याद करना चाहिए और उनसे कुशल मंगल की कामना करनी चाहिए।
  2. सूर्य ग्रहण के समय किसी भी ईश्वर के बीज मंत्र का जाप करें। इसके अलावा चालीसा पढ़ना और भजन कीर्तन करना चाहिए। इस दौरान ध्यान रखें कि सब कुछ मन मे करें। भगवान की प्रतिमा को न छूएं।
  3. सूतक काल में स्नान करना जरूरी होता है। स्नान करने के बाद प्रभु उपासना करते रहें और जब ग्रहण खत्म हो जाए तो आप सर्वप्रथम एक बार फिर स्नान करें और तब देवताओं की मूर्तियों को गंगाजल छिड़ककर उन्हें शुद्ध करें।
  4. सूर्य ग्रहण काल के दौरान तुलसी के पौधे को न छूएं, बलकि ग्रहण शुरू होने से पहले तुलसी के पत्तों का बचे हुए खाने में डाल दें। इससे ग्रहण का प्रभाव बचे भोजन पर नहीं पड़ता। वहीं जब ग्रहण खत्म हो जाए तो तुलसी पर भी गंगाजल छिड़ककर शुद्ध कर दें।
  5. ग्रहण के दौरान आप दीपक जलाकर गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करते रहें। ये जाप आपके संकटों को दूर कर देगा।
  6. सूर्य ग्रहण के सूतक लगने के बाद से ही भोजन करना, खाना पकाना, नहाना, शौच आदि या सोने का काम नहीं करना चाहिए।
  7. सूर्य ग्रहण के समय सूर्य देव की की मन में आराधना जरूर करें। ऐसा करने से सूर्यदेवता आप पर अपन कृपा बनाए रखेंगे।
  8. सूर्य ग्रहण के समय “ऊँ ह्रां ह्रीं ह्रौं स: सूर्याय: नम:” और “ऊँ घृणि: सूर्याय नम:” मंत्र का जाप करते रहें।
  9. सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद दान जरूर करना चाहिए। अपनी इच्छा शक्ति अनुसार जो कुछ आप जरूरत मंद को दान दे सकते हैं दें। ग्रहण काल में दान की चीजों को छू कर रख दे और ग्रहण समाप्त होने पर उसे दान कर दें। कोई घातु, गेहूं, गुड़, घी, लाल कपड़ा, लाल फूल, केशर, मूंगा, लाल गाय, लाल चंदन, तेजफल, गुलाबी पगड़ी, गुलाबी रंग के वस्त्र, खसखस, साठी के चावल, वस्त्र, लकड़ी की वस्तु आदि का दान किया जा सकता है।
  10. याद रखें जिस जातक की कुंडली में सूर्य उच्च हो तो उससे लाल वस्तुओं का दान नही करना चाहिए। ऐसे जातक अन्न, वस्त्र, फल, पीली मिठाई आदि का दान कर सकते हैं।

ग्रहण के दौरान किए गए ये आसान से उपाय आपको कई परेशानी और विपदाओं से बचा सकते हैं।

The post Solar Eclipse 2020: 21 जून को लग रहा है सूर्य ग्रहण जानें, सतूक काल और उपाय appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
https://www.astrologyofmylife.com/solar-eclipse-2020-june-21-surya-grahan-date-timing-and-sutak-kaal-chandra-grahan-sutak-on-21-june-2020/feed/ 0
गोचर ग्रहों का फल – अष्टक वर्ग एवं गोचर https://www.astrologyofmylife.com/gochar-grah/ https://www.astrologyofmylife.com/gochar-grah/#respond Fri, 03 Apr 2020 11:17:00 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=16550 गोचर ग्रहों का फल : अष्टक वर्ग एवं गोचर: गोचर शब्द “गम” धातु से बना है, जिसका अर्थ है “चलने वाला”। “चर” शब्द का अर्थ है “गतिमय होना”। इस प्रकार “गोचर” का अर्थ हुआ-“निरन्तर चलने वाला”। ब्रह्माण में स्थित ग्रह अपनी-अपनी धुरी पर अपनी गति से निरन्तर भ्रमण करते रहते हैं। इस भ्रमण के दौरान …
Continue reading गोचर ग्रहों का फल – अष्टक वर्ग एवं गोचर

The post गोचर ग्रहों का फल – अष्टक वर्ग एवं गोचर appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
गोचर ग्रहों का फल : अष्टक वर्ग एवं गोचर:

गोचर शब्द “गम” धातु से बना है, जिसका अर्थ है “चलने वाला”। “चर” शब्द का अर्थ है “गतिमय होना”। इस प्रकार “गोचर” का अर्थ हुआ-“निरन्तर चलने वाला”।

ब्रह्माण में स्थित ग्रह अपनी-अपनी धुरी पर अपनी गति से निरन्तर भ्रमण करते रहते हैं। इस भ्रमण के दौरान वे एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं। ग्रहों के इस प्रकार राशि परिवर्तन करने के उपरांत दूसरी राशि में उनकी स्थिति को ही “गोचर” कहा जाता है। प्रत्येक ग्रह का जातक की जन्मराशि से विभिन्न भावों “गोचर” भावानुसार शुभ-अशुभ फल देता है।
भ्रमण काल-
सूर्य,शुक्र,बुध का भ्रमण काल १ माह, चंद्र का सवा दो दिन, मंगल का ५७ दिन, गुरू का १ वर्ष,राहु-केतु का डेढ़ वर्ष व शनि का भ्रमण का ढ़ाई वर्ष होता है अर्थात ये ग्रह इतने समय में एक राशि में रहते हैं तत्पश्चात ये अपनी राशि-परिवर्तन करते हैं।
विभिन्न ग्रहों का “गोचर” अनुसार फल-

Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya

१. सूर्य-
सूर्य जन्मकालीन राशि से ३,६,१० और ११ वें भाव में शुभ फल देता है। शेष भावों में सूर्य का फल अशुभ देता है।
२. चंद्र-
चंद्र जन्मकालीन राशि से १,३,६,७,१०,व ११ भाव में शुभ तथा ४, ८, १२ वें भाव में अशुभ फल देता है।
३. मंगल-
मंगल जन्मकालीन राशि से ३,६,११ भाव में शुभ फल देता है। शेष भावों में अशुभ फल देता है।
४. बुध-
बुध जन्मकालीन राशि से २,४,६,८,१० और ११ वें भाव में शुभ फल देता है। शेष भावों में अशुभ फल देता है।
५. गुरू-
गुरू जन्मकालीन राशि से २,५,७,९ और ११ वें भाव में शुभ फल देता है। शेष भावों में अशुभ फल देता है।

Varshphal Report

६. शुक्र-
शुक्र जन्मकालीन राशि से १,२,३,४,५,८,९,११ और १२ वें भाव में शुभ फल देता है। शेष भावों में अशुभ फल देता है।
७. शनि-
शनि जन्मकालीन राशि से ३,६,११ भाव में शुभ फल देता है। शेष भावों में अशुभ फल देता है।
८. राहु-
राहु जन्मकालीन राशि से ३,६,११ वें भाव में शुभ फल देता है। शेष भावों में अशुभ फल देता है।
९. केतु-
केतु जन्मकालीन राशि से १,२,३,४,५,७,९ और ११ वें भाव में शुभ फल देता है। शेष भावों में अशुभ फल देता है।

Varshphal Report

प्रस्तुतकर्ता ज्योतिष आचार्य आर्य

गोचर ग्रहों का फल –

गोचर ग्रहों का जातक पर फल
गोचर ग्रहों से यह मतलब होता है की वर्तमान में आसमान में ग्रह किन राशियों में भ्रमण कर रहे है. गोचर ग्रहों का अध्ययन जातक की चन्द्र राशि से किया जाता है . गोचर ग्रहों का जातक के वर्तमान जीवन में सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ता है .यदि गोचर मे सूर्य जनम राशी से इन भावो में हो तो इसका फल इस प्रकार होता है .

Life Prediction

प्रथम भाव में – इस भाव में होने पर रक्त में कमी की सम्भावना होती है . इसके अलावा गुस्सा आता है पेट में रोग और कब्ज़ की परेशानी आने लगती है . नेत्र रोग , हृदय रोग ,मानसिक अशांति ,थकान और सर्दी गर्मी से पित का प्रकोप होने लगता है .इसके आलवा फालतू का घूमना , बेकार का परिश्रम , कार्य में बाधा ,विलम्ब ,भोजन का समय में न मिलना , धन की हानि , सम्मान में कमी होने लगती है परिवार से दूरियां बनने लगती है .
द्वितीय भाव में – इस भाव में सूर्य के आने से धन की हानि ,उदासी ,सुख में कमी , असफ़लत अ, धोका .नेत्र विकार , मित्रो से विरोध , सिरदर्द , व्यापार में नुकसान होने लगता है .
तृतीय भाव में – इस भाव में सूर्य के फल अच्छे होते है .यहाँ जब सूर्य होता है तो सभी प्रकार के लाभ मिलते है . धन , पुत्र ,दोस्त और उच्चाधिकारियों से अधिक लाभ मिलता है . जमीन का भी फायदा होता है . आरोग्य और प्रसस्नता मिलती है . शत्रु हारते हैं . समाज में सम्मान प्राप्त होता है .
चतुर्थ भाव – इस भाव में सूर्य के होने से ज़मीन सम्बन्धी , माता से , यात्रा से और पत्नी से समस्या आती है . रोग , मानसिक अशांति और मानहानि के कष्ट आने लगते हैं .
पंचम भाव – इस भाव में भी सूर्य परेशान करता है .पुत्र को परेशानी , उच्चाधिकारियों से हानि और रोग व् शत्रु उभरने लगते है .
६ ठे भाव में – इस भाव में सूर्य शुभ होता है . इस भाव में सूर्य के आने पर रोग ,शत्रु ,परेशानियां शोक आदि दूर भाग जाते हैं .
सप्तम भाव में – इस भाव में सूर्य यात्रा ,पेट रोग , दीनता , वैवाहिक जीवन के कष्ट देता है स्त्री – पुत्र बीमारी से परेशान हो जाते हैं .पेट व् सिरदर्द की समस्या आ जाती है . धन व् मान में कमी आ जाती है .
अष्टम भाव में – इस में सूर्य बवासीर , पत्नी से परेशानी , रोग भय , ज्वर , राज भय , अपच की समस्या पैदा करता है .
नवम भाव में – इसमें दीनता ,रोग ,धन हानि , आपति , बाधा , झूंठा आरोप , मित्रो व् बन्धुओं से विरोध का सामना करन पड़ता है .
दशम भाव में – इस भाव में सफलता , विजय , सिद्धि , पदोन्नति , मान , गौरव , धन , आरोग्य , अच्छे मित्र की प्राप्ति होती है .
एकादश भाव में – इस भाव में विजय , स्थान लाभ , सत्कार , पूजा , वैभव ,रोगनाश ,पदोन्नति , वैभव पितृ लाभ . घर में मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं .
द्वादश भाव में – इस भाव में सूर्य शुभ होता है .सदाचारी बनता है , सफलता दिलाता है अच्छे कार्यो के लिए , लेकिन पेट , नेत्र रोग , और मित्र भी शत्रु बन जाते हैं .

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

चन्द्र की गोचर भाव के फल

प्रथम भाव में – जब चन्द्र प्रथम भाव में होता है तो जातक को सुख , समागम , आनंद व् निरोगता का लाभ होता है . उत्तम भोजन ,शयन सुख , शुभ वस्त्र की प्राप्ति होती है .
द्वितीय भाव – इस भाव में जातक के सम्मान और धन में बाधा आती है .मानसिक तनाव ,परिवार से अनबन , नेत्र विकार , भोजन में गड़बड़ी हो जाती है . विद्या की हानि , पाप कर्मी और हर काम में असफलता मिलने लगती है .
तृतीय भाव में – इस भाव में चन्द्र शुभ होता है .धन , परिवार ,वस्त्र , निरोग , विजय की प्राप्ति शत्रुजीत मन खुश रहता है , बंधु लाभ , भाग्य वृद्धि ,और हर तरह की सफलता मिलती है .
चतुर्थ भाव में – इस भाव में शंका , अविश्वास , चंचल मन , भोजन और नींद में बाधा आती है .स्त्री सुख में कमी , जनता से अपयश मिलता है , छाती में विकार , जल से भय होता है .
पंचम भाव में – इस भाव में दीनता , रोग ,यात्रा में हानि , अशांत , जलोदर , कामुकता की अधिकता और मंत्रणा शक्ति में न्यूनता आ जाती है .
सिक्स्थ भाव में – इस भाव में धन व् सुख लाभ मिलता है . शत्रु पर जीत मिलती है .निरोय्गता ,यश आनंद , महिला से लाभ मिलता है .
सप्तम भाव में – इस भाव में वाहन की प्राप्ति होती है. सम्मान , सत्कार ,धन , अच्छा भोजन , आराम काम सुख , छोटी लाभ प्रद यात्रायें , व्यापर में लाभ और यश मिलता है .
अष्टम भाव में – इस भाव में जातक को भय , खांसी , अपच . छाती में रोग , स्वांस रोग , विवाद ,मानसिक कलह , धन नाश और आकस्मिक परेशानी आती है.
नवम भाव में – बंधन , मन की चंचलता , पेट रोग ,पुत्र से मतभेद , व्यापार हानि , भाग्य में अवरोध , राज्य से हानि होती है .
दशम भाव में – इस में सफलता मिलती है . हर काम आसानी से होता है . धन , सम्मान , उच्चाधिकारियों से लाभ मिलता है . घर का सुख मिलता है .पद लाभ मिलता है . आज्ञा देने का सामर्थ्य आ जाता है .
एकादश भाव में – इस भाव में धन लाभ , धन संग्रह , मित्र समागम , प्रसन्नता , व्यापार लाभ , पुत्र से लाभ , स्त्री सुख , तरल पदार्थ और स्त्री से लाभ मिलता है .
द्वादस भाव में – इस भाव में धन हानि ,अपघात , शारीरिक हानियां होती है .

Married Life Report

मंगल ग्रह का प्रभाव गोचर में इस प्रकार से होता है.

प्रथम भाव में – जब मंगल आता है .तो रोग्दायक हो कर बवासीर ,रक्त विकार ,ज्वर , घाव , अग्नि से डर , ज़हर और अस्त्र से हानि देता है.
द्वतीय भाव में –यहाँ पर मंगल से पित ,अग्नि ,चोर से खतरा ,राज्य से हानि , कठोर वाणी के कारण हानि , कलह और शत्रु से परेशानियाँ आती है .
तृतीय भाव – इस भाव में मंगल के आ जाने से चोरो और किशोरों के माध्यम से धन की प्राप्ति होती है शत्रु डर जाते हैं . तर्क शक्ति प्रबल होती है. धन , वस्त्र , धातु की प्राप्ति होती है . प्रमुख पद मिलता है .
चतुर्थ भाव में – यहं पर पेट के रोग ,ज्वर , रक्त विकार , शत्रु पनपते हैं .धन व् वस्तु की कमी होने लगती है .गलत संगती से हानि होने लगती है . भूमि विवाद , माँ को कष्ट , मन में भय , हिंसा के कारण हानि होने लगती है .
पंचम भाव – यहाँ पर मंगल के कारण शत्रु भय , रोग , क्रोध , पुत्र शोक , शत्रु शोक , पाप कर्म होने लगते हैं . पल पल स्वास्थ्य गिरता रहता है .
छठा भाव – यहाँ पर मंगल शुभ होता है . शत्रु हार जाते हैं . डर भाग जाता हैं . शांति मिलती है. धन – धातु के लाभ से लोग जलते रह जाते हैं .
सप्तम भाव – इस भाव में स्त्री से कलह , रोग ,पेट के रोग , नेत्र विकार होने लगते हैं .
अष्टम भाव में – यहाँ पर धन व् सम्मान में कमी और रक्तश्राव की संभावना होती है .
नवम भाव – यहाँ पर धन व् धातु हानि , पीड़ा , दुर्बलता , धातु क्षय , धीमी क्रियाशीलता हो जाती हैं.
दशम भाव – यहाँ पर मिलाजुला फल मिलता हैं,
एकादश भाव – यहाँ मंगल शुभ होकर धन प्राप्ति ,प्रमुख पद दिलाता हैं.
द्वादश भाव – इस भाव में धन हानि , स्त्री से कलह नेत्र वेदना होती है .

Prashna Kundli by Acharya Arya

बुध का गोचर में प्रभाव –

प्रथम भाव में – इस भाव में चुगलखोरी अपशब्द , कठोर वाणी की आदत के कारण हानि होती है .कलह बेकार की यात्रायें . और अहितकारी वचन से हानियाँ होती हैं .
द्वीतीय भाव में – यहाँ पर बुध अपमान दिलाने के बावजूद धन भी दिलाता है .
तृतीय भाव – यहाँ पर शत्रु और राज्य भय दिलाता है . ये दुह्कर्म की ओर ले जाता है .यहाँ मित्र की प्राप्ति भी करवाता है .
चतुर्थ भाव् – यहाँ पर बुध शुभ होकर धन दिलवाता है .अपने स्वजनों की वृद्धि होती है .
पंचम भाव – इस भाव में मन बैचैन रहता है . पुत्र व् स्त्री से कलह होती है .
छठा भाव – यहाँ पर बुध अच्छा फल देता हैं. सौभाग्य का उदय होता है . शत्रु पराजित होते हैं . जातक उन्नतशील होने लगता है . हर काम में जीत होने लगते हैं
सप्तम भाव – यहं पर स्त्री से कलह होने लगती हैं .
अष्टम भाव – यहाँ पर बुध पुत्र व् धन लाभ देता है .प्रसन्नता भी देता है .
नवम – यहाँ पर बुध हर काम में बाधा डालता हैं .
दशम भाव – यहाँ पर बुध लाभ प्रद हैं. शत्रुनाशक ,धन दायक ,स्त्री व् शयन सुख देता है .
एकादश भाव में – यहाँ भी बुध लाभ देता हैं . धन , पुत्र , सुख , मित्र ,वाहन , मृदु वाणी प्रदान करता है .
द्वादश भाव- यहाँ पर रोग ,पराजय और अपमान देता है

Career Report : One Year

गुरु का गोचर प्रभाव-

प्रथम भाव में –इस भाव में धन नाश ,पदावनति , वृद्धि का नाश , विवाद ,स्थान परिवर्तन दिलाता हैं .                                                     द्वितीय भाव में – यहाँ पर धन व् विलासता भरा जीवन दिलाता है .
तृतीय भाव में – यहाँ पर काम में बाधा और स्थान परिवर्तन करता है .
चतुर्थ भाव में – यहाँ पर कलह , चिंता पीड़ा दिलाता है .
पंचम भाव – यहाँ पर गुरु शुभ होता है .पुत्र , वहां ,पशु सुख , घर ,स्त्री , सुंदर वस्त्र आभूषण , की प्राप्ति करवाता हैं .
छथा भाव में – यहाँ पर दुःख और पत्नी से अनबन होती है.
सप्तम भाव – सैय्या , रति सुख , धन , सुरुचि भोजन , उपहार , वहां .,वाणी , उत्तम वृद्धि करता हैं .
अष्टम भाव – यहाँ बंधन ,व्याधि , पीड़ा , ताप ,शोक , यात्रा कष्ट , मृत्युतुल्य परशानियाँ देता है .
नवम भाव में – कुशलता ,प्रमुख पद , पुत्र की सफलता , धन व् भूमि लाभ , स्त्री की प्राप्ति होती हंत .
दशम भाव में- स्थान परिवर्तन में हानि , रोग ,धन हानि
एकादश भाव – यहाँ सुभ होता हैं . धन ,आरोग्य और अच्छा स्थान दिलवाता है .
द्वादश भाव में – यहाँ पर मार्ग भ्रम पैदा करता है .

Gemstone Suggestion

गोचर शुक्र

प्रथम भाव में प्रभाव –जब शुक्र यहाँ पर अथोता है तब सुख ,आनंद ,वस्त्र , फूलो से प्यार , विलासी जीवन ,सुंदर स्थानों का भ्रमण ,सुगन्धित पदार्थ पसंद आते है .विवाहिक जीवन के लाभ प्राप्त होते हैं .
द्वीतीय भाव में – यहाँ पर शुक्र संतान , धन , धान्य , राज्य से लाभ , स्त्री के प्रति आकर्षण और परिवार के प्रति हितकारी काम करवाता हैं.
तृतीय भाव – इस जगह प्रभुता ,धन ,समागम ,सम्मान ,समृधि ,शास्त्र , वस्त्र का लाभ दिलवाता हैं .यहाँ पर नए स्थान की प्राप्ति और शत्रु का नास करवाता हैं .
चतुर्थ भाव –इस भाव में मित्र लाभ और शक्ति की प्राप्ति करवाता हैं .
पंचम भाव – इस भाव में गुरु से लाभ ,संतुष्ट जीवन , मित्र –पुत्र –धन की प्राप्ति करवाता है . इस भाव में शुक्र होने से भाई का लाभ भी मिलता है.
छठा भाव –इस भाव में शुक्र रोग , ज्वर ,और असम्मान दिलवाता है .
सप्तम भाव – इसमें सम्बन्धियों को नास्ता करवाता हैं .
अष्टम भाव – इस भाव में शुक्र भवन , परिवार सुख , स्त्री की प्राप्ति करवाता है .
नवम भाव- इसमें धर्म ,स्त्री ,धन की प्राप्ति होती हैं .आभूषण व् वस्त्र की प्राप्ति भी होती है .
दशम भाव – इसमें अपमान और कलह मिलती है.
एकादश भाव – इसमें मित्र ,धन ,अन्न ,प्रशाधन सामग्री मिलती है .
द्वादश भाव – इसमें धन के मार्ग बनते हिया परन्तु वस्त्र लाभ स्थायी नहीं होता हैं .

Signature Design

शनि की गोचर दशा

प्रथम भाव – इस भाव में अग्नि और विष का डर होता है. बंधुओ से विवाद , वियोग , परदेश गमन , उदासी ,शरीर को हानि , धन हानि ,पुत्र को हानि , फालतू घोमना आदि परेशानी आती है .
द्वितीय भाव – इस भाव में धन का नाश और रूप का सुख नाश की ओर जाता हैं .
तृतीय भाव – इस भाव में शनि शुभ होता है .धन ,परवर ,नौकर ,वहां ,पशु ,भवन ,सुख ,ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है .सभी शत्रु हार मान जाते हैं .
चतुर्थ भाव –इस भाव में मित्र ,धन ,पुत्र ,स्त्री से वियोग करवाता हैं .मन में गलत विचार बनने लगते हैं .जो हानि देते हैं .
पंचम भाव – इस भाव में शनि कलह करवाता है जिसके कारण स्त्री और पुत्र से हानि होती हैं .
छठा भाव – ये शनि का लाभकारी स्थान हैं. शत्रु व् रोग पराजित होते हैं .सांसारिक सुख मिलता है .
सप्तम भाव – कई यात्रायें करनी होती हैं . स्त्री – पुत्र से विमुक्त होना पड़ता हैं .
अष्टम भाव – इसमें कलह व् दूरियां पनपती हैं.
नवम भाव – यहाँ पर शनि बैर , बंधन ,हानि और हृदय रोग देता हैं .
दशम भाव – इस भाव में कार्य की प्राप्ति , रोज़गार , अर्थ हानि , विद्या व् यश में कमी आती हैं
एकादश भाव – इसमें परस्त्री व् परधन की प्राप्ति होई हैं .
द्वादश भाव – इसमें शोक व् शारीरिक परेशानी आती हैं .
शनि की २,१,१२ भावो के गोचर को साढ़ेसाती और ४ ,८ भावो के गोचर को ढ़ैया कहते हैं .

Get Appointment

शुभ दशा में गोचर का फल अधिक शुब होता हैं .अशुभ गोचर का फल परेशान करता हैं .इस उपाय द्वारा शांत करवाना चाहिए .अशुभ दस काल मेशुब फल कम मिलता हैं .अशुभ फल ज्यादा होता हैं .

पूजा कैसे करें – जब सूर्य और मंगल असुभ हो तो लाल फूल , लाल चन्दन ,केसर , रोली , सुगन्धित पदार्थ से पूजा करनी चाहिए . सूर्य को जलदान करना चाहिए .शुक्र की पूजा सफ़ेद फूल, व् इत्र के द्वारा दुर्गा जी की पूजा करनी चाहिए . शनि की पूजा काले फूल ,नीले फूल व् काली वस्तु का दान करके शनि देव की पूजा करनी चाहिए . गुरु हेतु पीले फूल से विष्णु देव की पूजा करनी चाहिए .बुध हेतु दूर्वा घास को गाय को खिलाएं .

गोचर फल

सभी ग्रह चलायमान हैं.सभी ग्रहों की अपनी रफ्तार है कोई ग्रह तेज चलने वाला है तो कोई मंद गति से चलता है.ग्रहों की इसी गति को गोचर कहते हैं .ग्रहों का गोचर ज्योतिषशास्त्र में बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान रखता है.ग्रहों के गोचर के आधार पर ही ज्योतिष विधि से फल का विश्लेषण किया जाता है.प्रत्येक ग्रह जब जन्म राशि में पहुंचता है अथवा जन्म राशि से दूसरे, तीसरे, चौथे, पांचवें, छठे, सातवें, आठवें, नवें,दशवें, ग्यारहवें या बारहवें स्थान पर होता है तब अपने गुण और दोषों के अनुसार व्यक्ति पर प्रभाव डालता है .गोचर में ग्रहों का यह प्रभाव गोचर का फल कहलता है.शनि, राहु, केतु और गुरू धीमी गति वाले ग्रह हैं अत: यह व्यक्ति के जीवन पर बहुत अधिक प्रभाव डालते हैं इसलिए गोचर में इनके फल का विशेष महत्व होता है.अन्य ग्रह की गति तेज होती है अत: वे अधिक समय तक प्रभाव नहीं डालते हैं .

Life Prediction

सूर्य का गोचर फल: गोचर में सूर्य जब तृतीय, षष्टम, दशम और एकादश भाव में आता है तब यह शुभ फलदायी होता है.इन भावों में सूर्य का गोचरफल सुखदायी होता है.इन भावों में सूर्य के आने पर स्वास्थ्य अनुकूल होता है.मित्रों से सहयोग, शत्रु का पराभव एवं धन का लाभ होता है.इस स्थिति में संतान और जीवन साथी से सुख मिलता है साथ ही राजकीय क्षेत्र से भी शुभ परिणाम मिलते हैं.सूर्य जब प्रथम, द्वितीय, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, अष्टम, नवम एवं द्वादश में पहुंचता है तो मानसिक अशांति, अस्वस्थता, गृह कलह, मित्रों से अनबन रहती है.इन भावों में सूर्य का गोचर राजकीय पक्ष की भी हानि करता है.

चन्द्र का गोचर फल:
गोचर में चन्द्रमा जब प्रथम, तृतीय, षष्टम, सप्तम, दशम एवं एकादश में आता है तब यह शुभ फलदेने वाला होता है .इन भावों में चन्द्रमा के आने पर व्यक्ति को स्त्री सुख, नवीन वस्त्र, उत्तम भोजन प्राप्त होता है.चन्द्र का इन भावों में गोचर होने पर स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है.इन भावों को छोड़कर अन्य भावों में चन्द्रमा का गोचर अशुभ फलदायी होता है.मानसिक क्लेश, अस्वस्थता, स्त्री पीड़ा व कार्य बाधित होते हैं.

मंगल का गोचर फल:
मंगल को अशुभ ग्रह कहा गया है लेकिन जब यह तृतीय या षष्टम भाव से गोचर करता है तब शुभ फल देता है .इन भावों में मंगल का गोचर पराक्रम को बढ़ाता है, व शत्रुओं का पराभव करता है.यह धन लाभ, यश कीर्ति व आन्नद देता है.इन दो भावों को छोड़कर अन्य भावो में मंगल पीड़ा दायक होता है.तृतीय और षष्टम के अलावा अन्य भावों में जब यह गोचर करता है तब बल की हानि होती है, शत्रु प्रबल होंते हैं.अस्वस्थता, नौकरी एवं कारोबार में बाधा एवं अशांति का वातावरण बनता है.

Married Life Report

बुध का गोचर फल:
गोचर वश जब बुध द्वितीय, चतुर्थ, षष्टम अथवा एकादश में आता है तब बुध का गोचर फल व्यक्ति के लिए सुखदायी होता है इस गोचर में बुध पठन पाठन में रूचि जगाता है, अन्न-धन वस्त्र का लाभ देता है.कुटुम्ब जनों से मधुर सम्बन्ध एवं नये नये लोगों से मित्रता करवाता है.अन्य भावों में बुध का गोचर शुभफलदायी नहीं होता है.गोचर में अशुभ बुध स्त्री से वियोग, कुटुम्बियों से अनबन, स्वास्थ्य की हानि, आर्थिक नुकसान, कार्यों में बाधक होता है.

बृहस्पति का गोचर फल:
बृहस्पति को शुभ ग्रह कहा गया है.यह देवताओं का गुरू है और सात्विक एवं उत्तम फल देने वाला लेकिन गोचर में जब यह द्वितीय, पंचम, सप्तम, नवम, एकादश भाव में आता है तभी यह ग्रह व्यक्ति को शुभ फल देता है अन्य भावों में बृहस्पति का गोचर अशुभ प्रभाव देता है .उपरोक्त भावों में जब बृहस्पति गोचर करता है तब मान प्रतिष्ठा, धन, उन्नति, राजकीय पक्ष से लाभ एवं सुख देता है.इन भावों में बृहस्पति का गोचर शत्रुओं का पराभव करता है.कुटुम्बियों एवं मित्रों का सहयोग एवं पदोन्नति भी शुभ बृहस्पति देता है.उपरोक्त पांच भावों को छोड़कर अन्य भावों में जब बृहस्पति का गोचर होता है तब व्यक्ति को मानसिक पीड़ा, शत्रुओं से कष्ट, अस्वस्थता व धन की हानि होती है.गोचर में अशुभ होने पर बृहस्पति सम्बन्धों में कटुता, रोजी रोजगार मे उलझन और गृहस्थी में बाधक बनता है.

शुक्र का गोचर में फल:
आकाश मंडल में शुक्र सबसे चमकीला ग्रह है जो भोग विलास एवं सुख का कारक ग्रह माना जाता है.शुक्र जब प्रथम, द्वितीय, पंचम, अष्टम, नवम एवं एकादश भाव से गोचर करता है तब यह शुभ फलदायी होता है .इन भावों में शुक्र का गोचर होने पर व्यक्ति को भौतिक एवं शारीरिक सुख मिलता है.पत्नी एवं स्त्री पक्ष से लाभ मिलता है.आरोग्य सुख एवं अन्न-धन वस्त्र व आभूषण का लाभ देता है.हलांकि प्रथम भाव में जब यह गोचर करता है तब अपने गुण के अनुसार यह सभी प्रकार का लाभ देता है परंतु अत्यधिक भोग विलास की ओर व्यक्ति को प्रेरित करता है.अन्य भावों में शुक्र का गोचर अशुभ फलदायी होता है.गोचर में अशुभकारी शुक्र होने पर यह स्वास्थ्य एवं धन की हानि करता है.स्त्री से पीड़ा, जननेन्द्रिय सम्बन्धी रोग, शत्रु बाधा रोजी रोजगार में कठिनाईयां गोचर में अशुभ शुक्र का फल होता है.द्वादश भाव में जब शुक्र गोचर करता है तब अशुभ होते हुए भी कुछ शुभ फल दे जाता है

Career Report : One Year

शनि का गोचर फल:
शनि को अशुभ ग्रह कहा गया है.यह व्यक्ति को कष्ट और परेशानी देता है लेकिन जब यह गोचर में षष्टम या एकादश भाव में होता है तब शुभ फल देता है .नवम भाव में शनि का गोचर मिला जुला फल देता है.अन्य भावों में शनि का गोचर पीड़ादायक होता है.गोचर में शुभ शनि अन्न, धन और सुख देता, गृह सुख की प्राप्ति एवं शत्रुओं का पराभव भी शनि के गोचर में होता है.संतान से सुख एवं उच्चाधिकारियों से सहयोग भी शनि का शुभ गोचर प्रदान करता है.शनि का अशुभ गोचर मानसिक कष्ट, आर्थिक कष्ट, रोजी-रोजगार एवं कारोबार में बाधा सहित स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डालता है.

राहु और केतु छाया ग्रह हैं जिन्हें शनि के समान ही अशुभकारी ग्रह माना गया है.ज्योतिषशास्त्र के अनुसार गोचर में राहु केतु उसी ग्रह का गोचर फल देते हैं जिस ग्रह के घर में जन्म के समय इनकी स्थिति होती है.तृतीय, षष्टम एवं एकादश भाव में इनका गोचर शुभ फलदायी होता है जो धन, सुख एवं
अष्टक वर्ग एवं गोचर
साधारणतया जन्मकालीन चंद्रमा से ग्रहों की गोचर स्थिति देखकर फलित की विधि है जैसे गोचरगत शनि जब चंद्रमा से तीसरे, छठे एवं ग्यारहवें स्थान पर होंगे तो शनि जातक को शुभफल देंगे परंतु प्रश्न यह उठता है कि शनि एक राशि में अढ़ाई वर्ष रहते हैं तो क्या पूरे अढ़ाई वर्ष शुभफल देंगेक् साथ ही यदि वह भाव जिसमें वह राशि स्थित है बलहीन है तो भी भाव संबंधी फलों की गुणवत्ता वही होगी जैसी तब कि जिस भाव से शनि गोचर कर रहे हैं, बली हैक् अथवा इस प्रकार कहें कि यदि संबंधित भाव में शुभ बिन्दुओं की संख्या कुछ भी हो बीस या चालीसक् तो क्या फल की शुभता वही होगीक् इन्हीं कारणों के कारण जो सामान्य रूप से गोचरफल पंचांग आदि में दिया रहता है, महान् विद्वानों के मत के अनुसार उसको गौण ही समझा जायेे। सूक्ष्म विचार के लिए अन्य विधियों में अष्टक वर्ग विधि सबसे श्रेष्ठ है। इस लेख में यह बताने का प्रयत्न किया जायेगा कि गोचरफल की न्यूनाधिक गणना किस प्रकार से की जायेक् पहले चर्चा कि जा चुकी है कि सात ग्रह व आठवाँ लग्न, इन सभी द्वारा शुभ-अशुभ बिन्दु देने की प्रणाली है। यदि सातों ग्रह व लग्न सभी एक-एक शुभ बिन्दु किसी भाव को प्रदान करते हैं तो कुल मिलाकर अधिकतम आठ शुभ बिन्दु किसी भाव को प्राप्त हो सकते हैं अर्थात् कोई अशुभ बिन्दु (अशुभ बिन्दु को कभी-कभी रेखा से भी दर्शाते हैं) नहीं अत: विचारणीय भाव संबंधी अधिकतम शुभफल प्राप्त होगा। यदि सात शुभ बिन्दु हैं तो शुभफल अधिकतम आठ का सातवां भाग होगा। इसी प्रकार क्रम से अनुपात के अनुसार शुभता को एक फल प्राçप्त के स्केल पर नाप सकते हैं व कितना प्राप्त होगा इसकी गणना कर सकते हैं। एक अन्य विधि फलित की है कि जन्मकालीन चंद्रमा या लग्न से गोचर का ग्रह उपचय स्थान में (3, 6, 10, 11वे) हो अथवा मित्र ग्रह हो अथवा स्वराशि में हो, उच्च का हो एवं उसमें चार से अधिक शुभ रेखायें हों तो शुभफल में और भी अधिकता आती है। इसके विपरीत यदि गोचर का विचाराधीन ग्रह चंद्रमा से या जन्मकालीन लग्न से उपचय स्थान (3, 6, 10, 11वें को छो़डकर सभी अन्य आठ स्थान) में हो तो उस राशि में शुभ बिन्दुओं की अधिकता भी हो तो भी अशुभ फल ही मिलता है। यदि उपचय स्थान में होकर ग्रह शत्रु क्षेत्री, नीच का अथवा अस्तंगत होवे व शुभ बिन्दु भी कम हों तो अशुभ फल की प्रबलता रहेगी। यह ग्रहों का गोचर हुआ जिसका विचार जन्मकालीन चंद्रमा अथवा जन्मकालीन लग्न से करना होता है। अब चंद्रमा के स्वयं के गोचर का विचार करें। चंद्रमा यदि उपचय स्थान में हों (अपनी जन्मकालीन स्थिति से) शुभ रेखा अधिक भी परंतु चंद्रमा स्वयं कमजोर हो (यहां गोचर में) तो फल अशुभ ही हो। लेकिन इस विधि में गोचर ग्रह का विचार ग्रह के राशि में विचरण के आधार पर करते हैं। प्रथम गोचर विधि में जो प्रश्न उठा था कि यदि शनि जैसे ग्रह का गोचर अध्ययन करना हो जो एक राशि में अढ़ाई वर्ष रहते हैं तो क्या इस ग्रह के फल शुभ या अशुभ अढ़ाई वर्ष रहेंगेक् यह प्रश्न इस विधि में उभरकर सामने आता है। अब अष्टक वर्ग आधार पर तीसरी विधि की चर्चा करते हैं। प्रत्येक राशि 300 की होती है। प्रत्येक राशि को आठ भागों में बांटते हैं। प्रत्येक भाग को “कक्ष्या” कहते हैं। जातक-पारिजात में दिए गए इस सिद्धात के अनुसार प्रत्येक कक्ष्या का स्वामी ग्रह होता है। जैसे सबसे बाहरी कक्ष्या का स्वामी ग्रह शनि, फिर क्रम में बृहस्पति, मंगल, सूर्य, शुक्र, बुध, चंद्रमा व लग्न – इस प्रकार आठ कक्ष्याओं के आठ स्वामी ग्रह हुए। यदि देखें तो इनका क्रम ग्रहों के सामान्य भू-मण्डल में परिक्रमा पथ पर आधारित है। पृथ्वी से सबसे दूर शनि फिर बृहस्पति आदि-आदि हैं। पृथ्वी को कक्ष्या पद्धति में जातक से दर्शाया है क्योंकि पृथ्वी पर प़डने वाले प्रभाव का अध्ययन किया जा रहा है। इस गोचर फलित की विधि का नाम प्रस्ताराष्टक विधि है। आगे बढ़ने से पहले प्रस्ताराष्टक वर्ग बनाने की विधि की चर्चा करते हैं। राशि व ग्रहों का एक संयुक्त चार्ट बनाते हैं। बांयें से दांयें बारह कोष्टक बनाते हैं, व आठ कोष्ठक ऊपर से नीचे। प्रत्येक कोष्ठक बांयें से दांयें एक राशि का द्योतक है व ऊपर से नीचे वाला एक ग्रह का। आठवाँ कोष्ठक लग्न का है। सही मायने में यह बृहस्पति का अष्टक वर्ग है बस ग्रह रखने का क्रम बदल गया है। यहां पर ग्रहों का क्रम (कक्ष्या) ग्रहों के वास्तविक परिभ्रमण के आधार पर रखा गया है। पृथ्वी से सबसे दूर व उसके बाद पृथ्वी से दूरी के क्रम में। जैसा कि ऊपर चर्चा कर चुके हैं कि एक राशि को आठ भाग मेे बांट लेते हैं तो प्रत्येक ग्रह का भाग 30/8 अर्थात् 3045″ हुआ अर्थात् मेष में शनि की कक्ष्या, राशि में 0-3045″ तक हुई। दूसरी कक्ष्या बृहस्पति की है जो 3045″ से 7030″ तक होगी आदि-आदि। अब यह देखना है कि बृहस्पति का गोचरफल जातक को कैसा होगाक् जून 2009 में बृहस्पति कुंभ राशि की पहली कक्ष्या में गोचर कर रहे हैं। यहाँ पर राशि स्वामी शनि प्रदत्त एक शुभ बिन्दु है अत: बृहस्पति का गोचर उपर्युक्त जातक को शुभफल देगा। इसी प्रकार बृहस्पति की कक्ष्या में कुंभ राशि को शुभ बिन्दु प्राप्त है अत: बृहस्पति के गोचर की शुभता का क्रम बृहस्पति को 3045″ से 7030″ कुंभ में गोचर करते समय जारी रहेगा। 7030″ से 11015″ तक मंगल की कक्ष्या है वहां भी मंगल द्वारा प्रदत्त एक शुभ बिन्दु है अत: कुंभ में 10030″ अंश तक गोचरगत बृहस्पति शुभफल देंगे। फिर चतुर्थ कक्ष्या में सूर्य द्वारा कोई शुभ बिन्दु कुंभ राशि को प्रदान नहीं किया गया है अत: शुभता का क्रम अचानक रूक जाएगा व गति विपरीत होती सी नजर आएगी पर इसके साथ पांचवीं कक्ष्या में फिर शुक्र द्वारा प्रदत्त शुभ बिन्दु है उसके उपरान्त बुध द्वारा शुभ बिन्दु है अत: बृहस्पति के 11015″ से 140 तक गोचर करते समय शुभ बिन्दु हैं अत: बृहस्पति के 11015″ से 140 तक गोचर करते समय शुभफल की गति धीमी होगी जो 140 पार करते-करते पुन: गति पक़ड लेगी। इसको यूं समझें कि कोई वाहन सामान्य गति से स़डक पर जा रहा है, सामने अवरोध आने पर स्पीड कम करनी प़डती है या रूकना भी प़डता है व उस अवरोध को पार कर पुन: स्पीड पक़ड लेते हैं। यहां यह बात भी ध्यान देने की है कि कुछ प्रतीक्षा करने से या तो गतिरोध हट जाता है, हम धैर्य से प्रतीक्षा करते हैं अथवा हम गतिरोध के दांयें-बांयें से ध्यान व समझदारी से निकल जाते हैं। वास्तव में यही स्थिति ग्रह के साथ है या तो हम सहनशीलता से धैर्य रखें, बुरा वक्त निकल जायेगा या फिर दायें-बांये से निकल जायें अर्थात् ग्रह का उपचार दान, जप आदि कर बाधाओं को पार कर जायें। अन्य ग्रहों का भी गोचर का विचार इसी विधि से करते हैं कौन ग्रह किस विषय का कारक है या किस भाव का स्वामी है उस भाव संबंधी विषयों के बारे में फलित करने हेतु ग्रह का चयन करते हैं। विचारणीय ग्रह के पथ में जो ग्रह शुभ बिन्दु प्रदान करते हैं व शुभ बिन्दु प्रदान करने वाले ग्रह से संबंधित विषय का (अर्थात् शुभ बिन्दु देने वाले ग्रह किस संबंध अथवा वस्तु को दर्शाते हैं) जातक को लाभ देने में सहायक होंगे। जैसे उपरोक्त उदाहरण में बृहस्पति कुंभ में गोचर करते समय शनि की कक्ष्या से गुजर रहे हैं, शनि ने यहां शुभ बिन्दु प्रदान किया है अत: इस समय बृहस्पति के गोचर को शुभफल प्रदान करने में नौकर-चाकर, निम्न जाति/श्रेणी के लोग, लोहे की वस्तुएं आदि जातक को लाभ देंगी। कुछ विद्वान राशि के स्थान पर भाव के आठ भाग कर कक्ष्या स्थापित करने की बात कहते हैं। यदि भाव का आधार ले तो भाव आरंभ संधि से भाव मध्य तक चार भाग व भाव-मध्य से भाव अंत तक चार भाग कर विचार करना होता है परंतु वर्तमान में व्यावहारिक रूप से राशि को आधार मानकर गणना करना ज्यादा उपयुक्त माना जाता है। ऎसी भी स्थिति हो सकती हैं कि जब गोचर में कई ग्रह एक ही कक्ष्या में आ जाएं व उस कक्ष्या को शुभ बिन्दु प्राप्त हो। इस स्थिति में शुभ फल उतना ही उत्तम होगा जितने ग्रह ज्यादा होंगे। अष्टक वर्ग में जब ग्रह गोचरवश ऎसी कक्ष्या से गुजर रहा है जहां शुभ बिन्दु हैं तो शुभफल, गोचर में चलने वाले ग्रह के कारकत्व के अनुसार होगा। दूसरे यह फल ग्रह के जीव मूल-धातु के अनुसार होगा। यह फल लग्न से (मूल कुण्डली से) गिनकर उस भाव के विषयों से संबंधित होगा जहां से ग्रह गुजर रहा है। आगे गोचर वाले ग्रह के शुभफल की गुणवत्ता इस पर भी आधारित होगी कि विचारणीय गोचरगत ग्रह कुण्डली की मूल स्थिति से कक्ष्या वाले ग्रह से किस भाव में गुजर रहा है जैसे यदि कक्ष्या ग्रह की मूल स्थिति से अशुभ स्थान (6, 8वें आदि) से गुजरें तो शुभफल की कमी होगी परंतु यदि शुभ स्थान जैसे पंचम-नवम से गुजरे तो फल की वृद्धि होगी। इसके साथ-साथ उस भाव से भी शुभ फल संबंधित होगा जो कि शुभ बिन्दु देने वाले ग्रह से (मूल जन्मपत्रिका में) गोचर वाले ग्रह का बनता है। जैसे उदाहरण कुण्डली में बृहस्पति, कुंभ राशि से गोचर कर रहे हैं व यह शनि की कक्ष्या है अत: फल बृहस्पति, शनि, कुंभ से संबंधित होगा। कुंभ पूर्णता का प्रतीक है व शनि, बृहस्पति धर्म, आध्यात्म, तप, संसार से अलग विषयों के प्रतीक भी हैं। अत: आध्यात्मिक विषयों में, सत्संग में समय लगेगा जो पूर्णता देने वाला होगा। बृहस्पति जीव के कारक हंै व शनि स्थायित्व के अत: अचल संपत्ति के सौन्दर्यकरण का लाभप्रद अवसर होगा। इस प्रकार तारतम्य से फलित करें लाभ मिलता है.इन भावों के अतिरिक्त जब अन्य भावों से राहु केतु गोचर करता है तब यह हानिप्रद होता है.

Prashna Kundli by Acharya Arya

क्या केवल गोचर से ही फलित कहा जा सकता है?
गोचर फलित का एक प्रभावशाली अंग होते हुए भी यह सब कुछ नहीं। हमारे महर्षियों ने यह स्पष्ट कहा है कि जो कुछ कुण्डली में नहीं वह गोचर नहीं दे सकता। गोचर में ग्रह चाहे कितना ही अच्छा योग बनाते हो यदि वह योग कुण्डली में नहीं तो वह गोचर नहीं दे सकता। उदाहरण गोचर तो दशा व अन्तर दशा के अधीन भी कार्य करता है। यदि दशा व अन्तर दशा ऐसे ग्रहों की चल रही हो तो जातक जो जातक के लिये अशुभ हो परन्तु गोचर शुभ हो तो गोचर का शुभ फल जातक को नहीं मिलता। क्योंकि गोचर में यह देखा जाता है कि जन्म कुण्डली की ग्रह स्थिति से वर्तमान गोचर कुण्डली में ग्रह स्थिति अच्छी या बुरी कैसी स्थिति में है। जो ग्रह जन्म कुण्डली में उत्तम स्थान में पड़ा हो वह गोचर में शुभ स्थान पर आते ही शुभ फल देगा। जो ग्रह जन्म कुण्डली में अशुभ हो वह यदि गोचर में शुभ भी होगा तो भी शुभ फल नहीं देगा। गोचर ग्रह जन्म के ग्रहों से जिस समय अंशात्मक या आसन्न योग करते हैं उस समय ही उनका ठीक फल प्रकट होता है। मान लो शुक्र वृष में 18 अंश पर है। गोचर में शुक्र जब वृष 18अंश से योग बनायेगा। तब ही शुक्र का अच्छा या बुरा फल प्रकट होगा। इस प्रकार गोचर ग्रह जन्म के ग्रह के अधीन हुआ। यदि गोचर का ग्रह अशुभ भाव में हो जन्म कुण्डली में वह ग्रह उच्च, स्वक्षेत्री हो तो गोचर में वह ग्रह अशुभ फल नहीं देता। अर्थात्‌ गोचर के नियमों के आधार पर हम कह सकते हैं कि गोचर का फल जन्म कुण्डली के ग्रह स्थिति पर निर्भर करता है। यदि गोचर के अन्य नियमों का अध्ययन करे तो हम पायेंगे कि गोचर दशा व अन्तर दशा के भी अधीन है। मूलतः गोचर विचार जन्मकुडली और गोचर कुण्डली दोनों पर निर्भर है। गोचर विचार करते समय ग्रहों की स्थिति का विचार सूर्य, चन्द्र एवं लग्न से करना चाहिए। यदि इनमें से जो सर्वाधिक बली हो तो उससे करना चाहिए। तीनों से ग्रहस्थिति का विचार करके व दशादि विचार कर समन्वय युक्त फल कहना चाहिए।

बुजुर्गों की सेवा… देव गुरु जीवन में शुभ फल देते है

दोस्तों आप सभी को एक बहुत ही सरल उपाय बता रहा हूँ ज्योतिष में गुरु को पितामह की उपाधि दी गई है ,और जिनके कुंडली में गुरु अशुभ हो वो सिर्फ धर्म स्थान और बुजुर्गों की सेवा करे गुरु कभी अशुभ फल नहीं देगा , ज्योतिष में बृहस्पति धनु और मीन राशी के स्वामी है और कर्क राशी में शुभ और मकर राशी में अशुभ फल देते है , गुरु के सूर्य, मंगल, चंद्र मित्र व शुक्र, बुध शत्रु तथा शनि, राहु, केतु सम हैं। कुण्डली में बृहस्पति से पंचम, सप्तम और नवम भावों पर इसकी पूर्ण दृष्टि होती है , देव गुरु बृहस्पति कर्क, धनु, मीन राशियों तथा केंद्र 1,4,7,10 या त्रिकोण 5,9 भावों में स्थित होने पर शुभ फल देने वाला और योगकारक कहा गया है .बृहस्पति का राशि फल :- जन्म कुंडली में गुरु का मेषादि राशियों में स्थित होने का फल इस प्रकार है :- मेष में – गुरु हो तो जातक तर्क वितर्क करने वाला , किसी से न दबने वाला ,सात्विक,धनी,कार्य क्षेत्र में विख्यात,क्षमाशील ,पुत्रवान,बलवान, प्रतिभाशाली,तेजस्वी,अधिक शत्रु वाला,बहु व्ययी ,दंडनायक व तीक्ष्ण स्वभाव का होता है | वृष में गुरु हो तो जातक वस्त्र अलंकार प्रेमी ,विशाल देह वाला ,देव –ब्राह्मण –गौ भक्त, प्रचारक ,सौभाग्यशाली,अपनी स्त्री में ही आसक्त ,सुन्दर कृषि व गौ धन युक्त, वैद्यक क्रिया में कुशल ,मनोहर वाणी-बुद्धि व गुणों से युक्त ,विनम्र तथा नीतिकुशल होता है मिथुन में गुरु हो तो जातक ,विज्ञान विशारद ,बुद्धिमान,सुनयनी,वक्ता,सरल,निपुण,धर्मात्मा ,मान्य ,गुरुजनों व बंधुओं से सत्कृत होता है | कर्क में गुरु हो तो जातक विद्वान,सुरूप देह युक्त ,ज्ञानवान ,धार्मिक, सत्य स्वभाव वाला,यशस्वी ,अन्न संग्रही ,कोषाध्यक्ष,स्थिर पुत्र वाला,संसार में पूज्य ,विशिष्ट कर्मा तथा मित्रों में आसक्त होता है | सिंह में गुरु हो तो जातक स्थिर शत्रुता वाला ,धीर ,विद्वान,शिष्ट परिजनों से युक्त,राजा या उसके तुल्य,पुरुषार्थी,सभा में लक्ष्य ,क्रोध से समस्त शत्रुओं को जीतने वाला ,सुदृढ़ शरीर का ,वन-पर्वत आदि के भ्रमण में रूचि रखने वाला होता है | कन्या में गुरु हो तो जातक मेधावी, धार्मिक ,कार्यकुशल ,गंध –पुष्प-वस्त्र प्रेमी ,कार्यों में स्थिर, शास्त्रज्ञान व शिल्प कार्य से धनी दानी ,सुशील चतुर ,अनेक भाषाओं का ज्ञाता तथा धनी होता है | तुला मे गुरु हो तो जातक मेधावी ,पुत्रवान,विदेश भ्रमण से धनी विनीत ,आभूषण प्रिय ,नृत्य व नाटक से धन संग्रह करने वाला ,सुन्दर ,अपने सह व्यापारियों में बड़ा,पंडित,देव अतिथि का पूजन करने वाला होता है | वृश्चिक में गुरु हो तो जातक अधिक शास्त्रों में चतुर , क्षमाशील, नृपति, ग्रंथों का भाष्य करने वाला ,निपुण ,देव मंदिर व नगर में कार्य करने वाला , सद्स्त्रीवान,अल्प पुत्र वाला ,रोग से पीड़ित ,अधिक श्रम करने वाला ,क्रोधी, धर्म में पाखण्ड करने वाला व निंद्य आचरण वाला होता है | धनु में गुरु हो तो जातक आचार्य ,स्थिर धनी ,दाता , मित्रों का शुभ करने वाला ,परोपकारी ,शास्त्र में तत्पर ,मंत्री या सचिव ,अनेक देशों का भ्रमण करने वाला तथा तीर्थ सेवन में रूचि रखने वाला होता है |मकर में गुरु हो तो जातक अल्प बलि ,अधिक मेहनत करने वाला ,क्लेश धारक,नीच आचरण करने वाला ,मूर्ख ,निर्धन , दूसरों की नौकरी करने वाला , दया –धर्म –प्रेम –पवित्रता –स्व बन्धु व मंगल से रहित ,दुर्बल देह वाला ,डरपोक,प्रवासी,व विषाद युक्त होता है | कुम्भ में गुरु हो तो जातक चुगलखोर ,असाधु ,निंद्य कार्यों में तत्पर ,नीच जन सेवी ,पापी,लोभी ,रोगी ,अपने वचनों के दोष से अपने धन का नाशक ,बुद्धिहीन व गुरु की स्त्री में आसक्त होता है | मीन में गुरु हो तो जातक वेदार्थ शास्त्र वेत्ता ,मित्र व सज्जनों द्वारा पूजनीय ,राज मंत्री ,प्रशंसा प्राप्त करने वाला ,धनी ,निडर ,गर्वीला, स्थिर कार्यारम्भ करने वाला ,शांतिप्रिय ,विख्यात ,नीति व व्यवहार को जानने वाला होता है | (गुरु पर किसी अन्य ग्रह कि युति या दृष्टि के प्रभाव से उपरोक्त राशि फल में परिवर्तन भी संभव है| ) गुरु का सामान्य दशा फल जन्म कुंडली में गुरु स्व ,मित्र ,उच्च राशि -नवांश का ,शुभ भावाधिपति ,षड्बली ,शुभ युक्त -दृष्ट हो तो गुरु की शुभ दशा में,यश प्राप्ति,वाणी में प्रभाव व अधिकार, बुध्धि कि प्रखरता,विद्या लाभ,परीक्षाओं में सफलता,सुख-सौभाग्य ,राज कृपा ,मनोरथ सिध्धि ,दान पुण्य –तीर्थ भ्रमण आदि धार्मिक कार्यों में रूचि ,प्रभुत्व प्राप्ति, विवाह ,संतान सुख , स्वर्ण आभूषण की प्राप्ति ,सत्संग सात्विक गुणों की वृद्धि,मिष्टान भोजन की प्राप्ति ,व्यापार में लाभ ,स्वाध्याय में रूचि,पद प्राप्ति व पदोन्नति होती है | अध्यापन ,न्याय सेवा ,बैंकिंग ,प्रबंधन व धार्मिक प्रवचनों से सम्बंधित क्षेत्रों में सफलता मिलती है |राजनीतिक व प्रशासनिक पद की प्राप्ति होती है |ईशान दिशा से लाभ होता है | शहद ,तगर ,जटामांसी ,मोम , घी व पीले रंग के पदार्थों के व्यापार में लाभ होता है | जिस भाव का स्वामी गुरु होता है उस भाव से विचारित कार्यों व पदार्थों में सफलता व लाभ होता है | यदि गुरु अस्त ,नीच शत्रु राशि नवांश का ,षड्बल विहीन ,अशुभभावाधिपति पाप युक्त दृष्ट हो तो गुरु दशा में शरीर में सूजन ,शोक ,कर्ण रोग ,गठिया ,राजा से भय ,स्थान हानि ,अपवित्रता ,विद्या प्राप्ति में बाधा ,स्मरणशक्ति में कमी ,गुरु जनों व ब्राह्मणों से द्वेष ,गुरु के कारकत्व वाले पदार्थों से हानि ,संतान प्राप्ति में बाधा या कष्ट ,मान हानि ,संचित धन की हानि होती है | जिस भाव का स्वामी गुरु होता है उस भाव से विचारित कार्यों व पदार्थों में असफलता व हानि होती है | गोचर में बृहस्पति जन्म या नाम राशि से 2,5,7,9, व 11 वें स्थान पर गुरु शुभ फल देता है |शेष स्थानों पर गुरु का भ्रमण अशुभ कारक होता है | जन्मकालीन चन्द्र से प्रथम स्थान पर गुरु का गोचर मान हानि ,व्यवसाय में बाधा,राजभय ,मानसिक व्यथा ,कार्यों में विलम्ब,सुख में कमी तथा भारी व्यय से आर्थिक स्थिति को कमजोर करता है | दूसरे स्थान पर गुरु का गोचर धन लाभ ,परिवार में सुख समृद्धि, विवाह ,संतान प्राप्ति , शत्रु को हानि ,दान व परोपकार में रूचि ,चल संपत्ति में वृद्धि करता है | तीसरे स्थान पर गुरु का गोचर शरीर पीड़ा ,सम्बन्धियों से झगडा ,राज्य से भय ,मित्र का अनिष्ट ,यात्रा में हानि तथा व्यवसाय में बाधा देता है | चौथे स्थान पर गुरु का गोचर मानसिक अशांति ,शत्रु से कष्ट, जमीन जायदाद की हानि ,माता को कष्ट तथा स्थान परिवर्तन करता है | पांचवें स्थान पर गुरु का गोचर शिक्षा में सफलता ,संतान सुख ,पद लाभ ,पदोन्नति ,हर काम में सफलता ,सट्टे या शेयर मार्किट में लाभ प्रदान करता है | छ्टे स्थान पर गुरु का गोचर रोग ,राज्य से विरोध,संतान से कष्ट ,दुर्घटना का भय तथा विवाद से हानि करता है | सातवें स्थान पर गुरु के गोचर से विवाह एवम दाम्पत्य सुख की प्राप्ति , आरोग्यता , दान पुण्य व तीर्थ यात्रा में रूचि ,व्यवसाय व्यापार में लाभ तथा यात्रा में लाभ होता है | आठवें स्थान पर गुरु के गोचर से रोग,बंधन ,चोर या राज्य से कष्ट ,धन हानि ,संतान को कष्ट तथा कफ विकार होता है | नवें स्थान पर गुरु के गोचर से भाग्य वृद्धि ,धार्मिक यात्रा ,संतान सुख ,यश मान की प्राप्ति ,सफलता .आर्थिक लाभ तथा आध्यात्मिक विचारों का श्रवण होता है | दसवें स्थान पर गुरु के गोचर से मान हानि ,दीनता ,व्यवसाय में बाधा व धन हानि होती है | ग्यारहवें स्थान पर गुरु के गोचर से धन व प्रतिष्ठा की वृद्धि ,विवाह,संतान सुख ,पद लाभ व पदोन्नति ,व्यापार में लाभ ,वाहन सुख ,भोग विलास के साधनों की वृद्धि व सभी कार्यों में सफलता मिलती है | बारहवें स्थान पर गुरु के गोचर से आर्थिक हानि ,व्यय में वृद्धि ,अस्वस्थता ,संतान कष्ट , मिथ्या आरोप लगने का भय होता है | ( गोचर में गुरु के उच्च ,स्व मित्र,शत्रु नीच आदि राशियों में स्थित होने पर , अन्य ग्रहों से युति ,दृष्टि के प्रभाव से , अष्टकवर्ग फल से या वेध स्थान पर शुभाशुभ ग्रह होने पर उपरोक्त गोचर फल में परिवर्तन संभव है | कुंडली में गुरु के अशुभ के लक्षण : – सिर पर चोटी के स्थान से बाल उड़ जाते हैं। गले में व्यक्ति माला पहनने की आदत डाल लेता है। सोना खो जाए या चोरी हो जाए। बिना कारण शिक्षा रुक जाए। व्यक्ति के संबंध में व्यर्थ की अफवाहें उड़ाई जाती हैं। आंखों में तकलीफ होना, मकान और मशीनों की खराबी, अनावश्यक दुश्मन पैदा होना, धोखा होना, सांप के सपने। सांस या फेफड़े की बीमारी, गले में दर्द। 2, 5, 9, 12वें भाव में बृहस्पति के शत्रु ग्रह हों या शत्रु ग्रह उसके साथ हों तो बृहस्पति मंदा होता है। जनम कुंडली में गुरु अस्त ,नीच या शत्रु राशि का ,छटे -आठवें -बारहवें भाव में स्थित हो ,पाप ग्रहों से युत या दृष्ट, षड्बल विहीन हो तो ऊँचाई से पतन , शरीर में चर्बी की वृद्धि ,कफ विकार ,मूर्च्छा ,हर्निया,कान के रोग ,स्मृति विकार , जिगर के रोग ,मानसिक तनाव , रक्त धमनी से सम्बंधित रोग करता है |शुभ के लक्षण:- व्यक्ति कभी झूठ नहीं बोलता। उनकी सच्चाई के लिए वह प्रसिद्ध होता है। आंखों में चमक और चेहरे पर तेज होता है। अपने ज्ञान के बल पर दुनिया को झुकाने की ताकत रखने वाले ऐसे व्यक्ति के प्रशंसक और हितैषी बहुत होते हैं। यदि बृहस्पति उसकी उच्च राशि के अलावा 2, 5, 9, 12 में हो तो शुभ। बृहस्पति शान्ति के उपाय जन्मकालीन गुरु निर्बल होने के कारण अशुभ फल देने वाला हो तो निम्नलिखित उपाय करने से बलवान हो कर शुभ फल दायक हो जाता है |

Signature Design

रत्न धारण – पीत रंग का पुखराज सोने या चांदी की अंगूठी मेंपुनर्वसु ,विशाखा ,पूर्व भाद्रपद नक्षत्रों में जड़वा कर गुरुवार को सूर्योदय के बाद पुरुष दायें हाथ की तथा स्त्री बाएं हाथ की तर्जनी अंगुली में धारण करें | धारण करने से पहले ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सःगुरुवे नमः मन्त्र के १०८ उच्चारण से इस में ग्रह प्रतिष्ठा करके धूप,दीप , पीले पुष्प, हल्दी ,अक्षत आदि से पूजन कर लें |पुखराज की सामर्थ्य न हो तो उपरत्न सुनैला या पीला जरकन भी धारण कर सकते हैं | केले की जड़ गुरु पुष्य योग में धारण करें | दान व्रत ,जाप – गुरूवार के नमक रहित व्रत रखें , ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सःगुरुवे नमः मन्त्र का १९००० की संख्या में जाप करें | गुरूवार को घी, हल्दी, चने की दाल ,बेसन पपीता ,पीत रंग का वस्त्र ,स्वर्ण, इत्यादि का दान करें | फलदार पेड़ सार्वजनिक स्थल पर लगाने से या ब्राह्मण विद्यार्थी को भोजन करा कर दक्षिणा देने से भी बृहस्पति प्रसन्न हो कर शुभ फल देते हैं |

Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya

इनकी शान्ति के लिये वैदिक मन्त्र- ‘ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु। यद्दीदयच्छवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्॥’,पौराणिक मन्त्र :- ‘देवानां च ऋषीणां च गुरुं कांचनसंनिभम्। बुद्धिभूतं
त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्॥’

बीज मन्त्र-’ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरवे नम:।

Acharya Arya

Astrology of My Life

+91 9999954145

Get Appointment

The post गोचर ग्रहों का फल – अष्टक वर्ग एवं गोचर appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
https://www.astrologyofmylife.com/gochar-grah/feed/ 0
Symptoms of Auspicious and Inauspicious Rahu https://www.astrologyofmylife.com/symptoms-of-auspicious-and-inauspicious-rahu/ https://www.astrologyofmylife.com/symptoms-of-auspicious-and-inauspicious-rahu/#respond Sat, 04 Jan 2020 09:32:42 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=12716 शुभ-अशुभ राहु के लक्षण ज्योतिष के जनक महर्षि पराशर के अनुसार राहु ग्रह को पितामह (दादा), समाज एवं जाती से अलग लोग (विद्रोही भी), सर्प, सामाजिक जहर का फैलाना, क्रानिक बीमारियां, भय, विधवा, दुर्वचन, तीर्थ यात्रायें, निष्ठुर वाणी, विदेश में जीवन, त्वचा पर दाग, सरीसृप, महामारी, किसी महिला से अनैतिक संबन्ध, नानी, व्यर्थ के तर्क, …
Continue reading Symptoms of Auspicious and Inauspicious Rahu

The post Symptoms of Auspicious and Inauspicious Rahu appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
शुभ-अशुभ राहु के लक्षण

ज्योतिष के जनक महर्षि पराशर के अनुसार राहु ग्रह को पितामह (दादा), समाज एवं जाती से अलग लोग (विद्रोही भी), सर्प, सामाजिक जहर का फैलाना, क्रानिक बीमारियां, भय, विधवा, दुर्वचन, तीर्थ यात्रायें, निष्ठुर वाणी, विदेश में जीवन, त्वचा पर दाग, सरीसृप, महामारी, किसी महिला से अनैतिक संबन्ध, नानी, व्यर्थ के तर्क, भडकाऊ भाषण, बनावटीपन, दर्द और सूजन, डूबना, अंधेरा, दु:ख पहुंचाने वाले शब्द, निम्न जाति, दुष्ट स्त्री, जुआरी, विधर्मी, चालाकी, संक्रीण सोच, पीठ पीछे बुराई करने वाले, पाखण्डी, बुरी आदतों के आदी, जहाज के साथ जलमग्न होना, डूबना, रोगी स्त्री के साथ आनन्द लेना, अंगच्छेदन होना, डूबना, पथरी, कोढ, बल, व्यय,आत्मसम्मान, शत्रु, मिलावट दुर्घटना, नितम्ब, देश निकाला, विकलांग, खोजकर्ता, शराब, झगडा, गैरकानूनी, तरकीब से सामान देश से अन्दर बाहर ले जाना, जासूसी करना, आत्महत्या, विषैला, विधवा, पहलवान, शिकारी, दासता, शीघ्र उत्तेजित होने इत्यादि का कारक होता है।

कौन कौन से दोष आ जाते हैं, राहु खराब होने पर :-

Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya

जैसे की कहा जाता है, पीपल की छाया में सोने वाले को किसी भी प्रकार का रोग नहीं होता परंतु यदि बबूल की छाया में सोते रहें तो श्वास रोग या चर्म रोग हो सकता है।

इसी प्रकार ग्रहों की छाया का भी हमारे जीवन पर प्रभाव पढ़ता है। नवग्रहों में राहु ग्रह हमारी बुद्धि भ्रमित करता है, लेकिन जो चतुराई हमारी बुद्धि में पैदा होती है, उसका कारक भी राहु ही है। ज्योतिष शास्त्र में राहु के दोषपूर्ण या खराब होने पर जातक चतुराई से घोटाले तो करता है, परंतु एक दिन अपने ही बुने जाल में बुरी तरह फंस जाता है।

क्यों होता है राहु खराब ? :-

Life Prediction

1 :- यदि कोई व्यक्ति अपने गुरु या फिर अपने धर्म का अपमान करता है, तो उस व्यक्ति का राहू ग्रह अवश्य बुरा फल देता है।

2 :- यदि कोई व्यक्ति शराब का सेवन नियमित करता है, या फिर पराई स्त्री के साथ सम्बन्ध बनाने की इच्छा रखता है, तो उसका राहू ग्रह अवश्य बुरा फल देता है।

3 :- यदि कोई व्यक्ति ब्याज वाले पैसों का प्रयोग घर में करता है तो, उस व्यक्ति का राहू ग्रह अवश्य बुरा फल देता है।

4 :- यदि कोई व्यक्ति चतुराई से किसी को धोखा देता है, और झूठ बोलने की आदत को नहीं छोड़ता तो उस व्यक्ति का राहू ग्रह बुरा फल देता है।

5 :- यदि कोई व्यक्ति हमेशा तामसिक भोजन करता है तो, उस व्यक्ति का राहू ग्रह बुरा फल देता है।

6 :- यदि कोई व्यक्ति खाना हमेशा घर से बाहर खाता है, या बाहर का खाना हमेशा खाता है तो, उस व्यक्ति का राहू ग्रह बुरा फल देने लगता है।

खराब राहु को कैसे पहचानेगे ? :-

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

1 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उसके ससुर, साले या साली से झगडा बढ़ने लगेगा।

2 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उसके सोचने की ताकत कम हो जायेगी।

3 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उसके जीवन में शत्रु बढ़ जायेंगे, और सोचने की क्षमता कम होने लगती है।

4 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उसके साथ दुर्घटना, पुलिस केस, या पत्नी के साथ लड़ाई झगडे में बढ़ोत्तरी हो जायेगी।

5 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो वो व्यक्ति छोटी छोटी बातों पर गुस्सा होने लगता है, और लोगों के साथ सही तालमेल नहीं बिठा पाता है।

6 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उस व्यक्ति का एक तरह से दिमाग खराब होने लगता है, और उस व्यक्ति के सर में फालतू में छोटी छोटी चोट लगने लगती है या चक्कर आते हैं।

7 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो वह व्यक्ति अधिक मदिरापान या फिर सम्भोग/हस्तमैथुन की तरफ भागने लगता है।

8 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो व्यक्ति नीच हरकते करने लगता है, और निर्दयी हो जाता है।

Career Report : One Year

राहु ग्रह खराब होने से होने वाले रोग :-

1 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो सबसे पहले उसको गैस से सम्बन्धित शिकायत बढ़ने लगती है।

2 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उसके बाल झड़ने लगते हैं, तथा बवासीर से सम्बन्धित भी समस्या होने लगती है।

3 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो वो जातक पागलों की तरह व्यवहार करेगा और लगातार मानसिक तनाव में रहेगा।

4 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उसके नाखून अपने आप ही टूटने लगते हैं और व्यक्ति के सर में पीड़ा या दर्द बनी रहती है।

5 :- किसी भी व्यक्ति का अगर राहू ग्रह खराब है तो उस व्यक्ति को अचानक पता चलेगा की मुझे कोई बीमारी है और उस पर पैसा भी खूब खर्चा होगा तथा व्यक्ति की मृत्यु भी हो सकती है।

राहु के शुभ होने पर

Married Life Report

व्यक्ति दौलतमंद होगा। कल्पना शक्ति तेज होगी। रहस्यमय या धार्मिक बातों में रुचि लेगा। राहु के अच्छा होने से व्यक्ति में श्रेष्ठ साहित्यकार, दार्शनिक, वैज्ञानिक या फिर रहस्यमय विद्याओं के गुणों का विकास होता है। इसका दूसरा पक्ष यह कि इसके अच्छा होने से राजयोग भी फलित हो सकता है। आमतौर पर पुलिस या प्रशासन में इसके लोग ज्यादा होते हैं।

राहु को प्रसन्न करने के उपाय

Prashna Kundli by Acharya Arya

राहु बीज मन्त्र: ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं स: राहवे नम: (108 बार)

पक्षियों को प्रतिदिन बाजरा खिलाएं.

एक नारियल ग्यारह साबुत बादाम काले वस्त्र में बांधकर बहते जल में प्रवाहित करें.

अपने घर के नैऋत्य कोण में पीले रंग के फूल अवश्य लगाएं.

तामसिक आहार व मदिरापान बिल्कुल न करें.

अपने पास सफेद चन्दन अवश्य रखना चाहिए. सफेद चन्दन की माला भी धारण की जा सकती है. प्रतिदिन

सुबह चन्दन का टीका भी लगाना चाहिए. अगर हो सके तो नहाने के पानी में चन्दन का इत्र डाल कर नहाएं.

हाथी को हरे पत्ते, नारियल गोले या गुड़ खिलाएं.

अधिक जानकारी के लिए आचार्य आर्य +91 99999 54145 पर सम्पर्क करें…

Get Appointment

The post Symptoms of Auspicious and Inauspicious Rahu appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
https://www.astrologyofmylife.com/symptoms-of-auspicious-and-inauspicious-rahu/feed/ 0
Know Your Personality According to Zodiac Sign https://www.astrologyofmylife.com/know-your-personality-according-to-zodiac-sign/ https://www.astrologyofmylife.com/know-your-personality-according-to-zodiac-sign/#respond Fri, 27 Dec 2019 07:40:48 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=12347 किस वार को आपका जन्म हुआ है? जानिए अपना व्यक्तित्व राशि के अनुसार …. आप अपने जन्म कुंडली और राशि के अनुसार जान सकते हैं अपना व्यक्तित्व और भविष्य की विशेष जानकारी और उससे जुड़ा हुआ खास योग . मेष – समझदारी से स्थिति को संभालिए, कार्यस्थल पर स्थिति प्रतिकूल हो सकती है। आपके अच्छे …
Continue reading Know Your Personality According to Zodiac Sign

The post Know Your Personality According to Zodiac Sign appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
किस वार को आपका जन्म हुआ है? जानिए अपना व्यक्तित्व राशि के अनुसार ….

आप अपने जन्म कुंडली और राशि के अनुसार जान सकते हैं अपना व्यक्तित्व और भविष्य की विशेष जानकारी और उससे जुड़ा हुआ खास योग .

मेष –

समझदारी से स्थिति को संभालिए, कार्यस्थल पर स्थिति प्रतिकूल हो सकती है। आपके अच्छे स्वभाव के कारण आपको अच्छी आमदनी होने वाली है।
संपत्ति विवाद को जल्दी से निपटा लें अन्यथा स्थिति बिगड़ सकती है।

घरेलू मोर्चे पर परिवर्तन से आपको खुशी मिलेगी।
कमाई के अन्य स्रोत से मोटी आमदनी आने वाली है। कार्यस्थल पर स्थिति आपके पक्ष में रहेगी। अच्छे स्वास्थ्य के लिए किया गया प्रयास सफल होगा।
शुभ अंक : 15 शुभ रंग : सफेद

Online Astrologer – Acharya Dr MSD Arya

वृषभ-
स्थिति से समझौता नहीं करने की वजह से कार्यक्षेत्र में आपको छटपटाहट हो सकती है। किसी मजबूरी की वजह से आप पारिवारिक समारोह में शामिल नहीं हो पाएंगे।

किसी बीमारी में घरेलू उपचार करना आपके लिए विशेष लाभदायी साबित होने वाला है। छुट्टी के दरमियान आपके जीवन में कोई आ सकता है। आपको प्यार होने वाला है, दिल थामकर बैठिए।
शुभ अंक : 8 शुभ रंग : बैंगनी

मिथुन –
कार्यस्थल पर आपके कामकाज की शैली पर सवाल उठाए जा सकते हैं इसलिए तैयार रहें। शैक्षणिक मोर्चे पर आपको अपना दिमाग शांत रखने की जरूरत है, नहीं तो आपका प्रदर्शन प्रभावित हो सकता है।

घर में तनाव रहेगा। घर का कोई सदस्य अस्वस्थ भी हो सकता है। जीवनसाथी के साथ वक्त गुजारने से तनाव कम हो सकता है। कुछ लोगों को नौकरी में तरक्की मिल सकती है। शुभ अंक : 9 शुभ रंग : भूरा

Horoscope

कर्क –
रुकावटों को दूर करने में आप सक्षम हो सकते हैं। शैक्षणिक मोर्चे पर बहुत शुभ रहने वाला है। किसी के द्वारा छोड़ी हुई परियोजना आपके कंधे पर आ सकती है। दोस्तों से मुलाकात की संभावना है।

आपकी खूबियों की वजह से आपको कई सारा काम मिल सकता है जिसकी बदौलत आपकी आमदनी बढ़ने की संभावना है। रोमांटिक मोर्चे पर थोड़ा तनाव हो सकता है। शुभ अंक : 22 शुभ रंग : नीला

सिंह-
कार्यस्थल पर स्थिति आपके विपरीत रहेगी। आपको कुछ कठोर कदम भी उठाना पड़ सकता है। शैक्षणिक मोर्चे पर आपको किसी के साथ समझौता करना पड़ सकता है। घर में किसी के साथ बहस होने के कारण तनाव की स्थिति रहने वाली है। किसी सामाजिक समारोह की वजह से आपका काफी समय बर्बाद हो सकता है।

आप में से कुछ लोग किसी अपने की कंपनी के लिए मदद कर सकते हैं। संपत्ति का मुद्दा बिगड़ सकता है, लेकिन उसे कानूनी पचड़े में जाने से रोकें।
शुभ अंक : 5 शुभ रंग : हरा

Varshphal Report

कन्या-
शैक्षणिक मोर्चे पर आपके जुनून का सकारात्मक परिणाम मिल सकता है। कार्यस्थल पर आपकी काबिलियत का डंका बजेगा। बड़ी परियोजना मिल सकती है जिसके लिए आपको विदेश जाने का मौका मिलेगा। आपको किसी से प्यार हो सकता है।

घर की तलाश में लगे लोगों को पसंद का घर मिल सकता है, जो आपके बजट में होगा। पैसे को लेकर आपको थोड़ा सख्त होना होगा। समाज को नजरअंदाज करना सही नहीं होगा। स्वास्थ्य को लेकर सजग रहें।
शुभ अंक : 3 शुभ रंग : गहरा पीला

तुला –
मेहनत और काम के प्रति समर्पण की बदौलत आपको अपने काम में कामयाबी मिल सकती है। शैक्षणिक स्तर पर किसी प्रोजेक्ट में आप व्यस्त रहेंगे। घर में किसी युवक की सफलता से घर के सदस्यों का सिर ऊंचा हो सकता है।

आर्थिक मोर्चे पर आप मजबूत स्थिति में होंगे।
आप रोमांटिक मूड में रहेंगे। संपत्ति खरीदने से बचें। स्वास्थ्य सामान्य बना रहेगा।
शुभ अंक : 17 शुभ रंग : हरा

Matchmaking – Acharya Dr MSD Arya

वृश्चिक-
आप में से कुछ लोग नए करियर की शुरुआत कर सकते हैं। कार्यस्थल पर आप कई काम एकसाथ पूरा कर सकते हैं। सामाजिक स्तर पर आपको बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इससे पहले कि आप बदनाम हों,
उसे खारिज कर देना सही होगा।

कुछ लोग ऑफिशियल काम से शहर से बाहर यात्रा पर जा सकते हैं। कोई नई संपत्ति खरीदे जाने के संकेत हैं। घरेलू मोर्चे पर आपको जिसके साथ की जरूरत है, वो आपकी मदद कर सकता है। स्वास्थ्य सामान्य बना रहेगा।
शुभ अंक : 17 शुभ रंग : गहरा मरकत

Career Report : One Year

धनु-
आप काफी व्यस्त रहने वाले हैं। शैक्षणिक स्तर पर किसी प्रोजेक्ट को पूरा करने में व्यस्त रह सकते हैं। पेशेवर मोर्चे पर निर्णय देने से पहले सारे तथ्य इकट्ठा कर लें।

प्रेमी चिंतित रह सकते हैं। मनोदशा बदलने की कोशिश करें। कोई बड़ा घरेलू उपकरण खरीदने का मन बना सकते हैं, खरीदने से पहले सावधानी रखना हितकर होगा। शुभ अंक : 10 शुभ रंग : नीला

मकर –
घर खरीदने के लिए लोन लेने की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं। आपके ऊपर वो काम करने के लिए जोर दिया जा सकता है जिसे लेकर आप आशंकित हैं,
लेकिन ठंडे दिमाग से सोचने पर आप कदम बढ़ा सकते हैं। शुभ अंक : 11 शुभ रंग : दूधिया

कुंभ –
आपके लिए बहुत अच्छा रहने वाला है। पेशेवर मोर्चे पर जिस सफलता का आपको इंतजार था, वो संभव हो सकता है। शैक्षणिक मोर्चे पर आपकी असाधारण उपलब्धि आपकी प्रतिष्ठा बढ़ा सकती है।

आपको विरासत में धन या पैसा मिल सकता है। शादीयोग्य लोगों की जल्दी ही शादी हो सकती है। आपको किसी के प्रति प्यार का एहसास हो सकता है। किसी शहर का दौरा आपके लिए मजेदार होने वाला है।
शुभ अंक : 4 शुभ रंग : नीला

Gemstone Suggestion

मीन
स्वयं के हित के लिए आप घर का माहौल बिगाड़ सकते हैं। कुछ लोगों का प्यार धीरे-धीरे परवान चढ़ रहा है। विदेश जाने का आपका सपना पूरा होने वाला है।

संपत्ति खरीदने के लिए आप सभी औपचारिकता पूरी कर सकते हैं। पेशेवर स्तर पर आप जो भी फैसला लेते हैं,
उसकी जानकारी अपने वरिष्ठ को देना हितकर होगा। पैसा निवेश करने से पहले सबसे राय ले सकते हैं, पर फैसला अपने मन से ही करेंगे।
शुभ अंक : 3 शुभ रंग : गहरा पीला

Signature Design

The post Know Your Personality According to Zodiac Sign appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
https://www.astrologyofmylife.com/know-your-personality-according-to-zodiac-sign/feed/ 0
Manglik Person Nature (Manglik Dosh) https://www.astrologyofmylife.com/manglik-person-nature/ https://www.astrologyofmylife.com/manglik-person-nature/#respond Fri, 27 Dec 2019 07:20:42 +0000 http://www.astrologyofmylife.com/?p=12340 मांगलिक जातक का स्वभाव (Manglik person Nature) कोई जातक चाहे वह स्‍त्री हो या पुरुष उसके मांगलिक होने का अर्थ है कि उसकी कुण्‍डली में मंगल अपनी प्रभावी स्थिति में है. Horoscope शादी के लिए मंगल को जिन स्‍थानों पर देखा जाता है वे 1,4,7,8 और 12 भाव हैं.इनमें से केवल आठवां और बारहवां भाव …
Continue reading Manglik Person Nature (Manglik Dosh)

The post Manglik Person Nature (Manglik Dosh) appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
मांगलिक जातक का स्वभाव (Manglik person Nature)

कोई जातक चाहे वह स्त्री हो या पुरुष उसके मांगलिक होने का अर्थ है कि उसकी कुण्डली में मंगल अपनी प्रभावी स्थिति में है.

Horoscope

शादी के लिए मंगल को जिन स्थानों पर देखा जाता है वे 1,4,7,8 और 12 भाव हैं.इनमें से केवल आठवां और बारहवां भाव सामान्य तौर पर खराब माना जाता है.सामान्य तौर का अर्थ है कि विशेष परिस्थितियों में इन स्थानों पर बैठा मंगल भी अच्छे परिणाम दे सकता है.

मांगलिक होने का विशेष गुण यह होता है कि मांगलिक कुंडली वाला व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी को पूर्ण निष्ठा से निभाता है,कठिन से कठिन कार्य वह समय से पूर्व ही कर लेते हैं,नेतृत्व की क्षमता,उनमें जन्मजात होती है,ये लोग जल्दी किसी से घुलते-मिलते नहीं परन्तु जब मिलते हैं तो पूर्णतः संबंध को निभाते हैं. (Manglik Person Nature)

Life Prediction

मांगलिक जातक कठोर निर्णय लेने वाला,कठोर वचन बोलने वाला,लगातार काम करने वाला,विपरीत लिंग के प्रति कम आकर्षित होने वाला,प्लान बनाकर काम करने वाला,कठोर अनुशासन बनाने और उसे फॉलो करने वाला,एक बार जिस काम में जुटे उसे अंत तक करने वाला,नए अनजाने कामों को शीघ्रता से हाथ में लेने वाला और किसी भी लड़ाई से नहीं घबराने वाला होता है.

Get Appointment

 

अति महत्वकांक्षी होने से इनके स्वभाव में क्रोध पाया जाता है परन्तु यह बहुत दयालु,क्षमा करने वाले तथा मानवतावादी होते है, गलत के आगे झुकना इनकी पसंद नहीं होता और खुद भी गलती नहीं करते.इन्हीं विशेषताओं के कारण गैर मांगलिक व्यक्ति अधिक देर तक मांगलिक के सानिध्य में नहीं रह पाता.

Shubh Muhurat

 

लग्न का मंगल व्यक्ति की व्यक्तित्व को बहुत अधिक तीक्ष्ण बना देता है,चौथे का मंगल जातक को कड़ी पारिवारिक पृष्ठभूमि देता है.सातवें स्थान का मंगल जातक को साथी या सहयोगी के प्रति कठोर बनाता है.

आठवें और बारहवें स्थान का मंगल आयु और शारीरिक क्षमताओं को प्रभावित करता है.इन स्थानों पर बैठा मंगल यदि अच्छे प्रभाव में है तो जातक के व्यवहार में मंगल के अच्छे गुण आएंगे और खराब प्रभाव होने पर खराब गुण आएंगे.जयोतीष परामर्श अवश्य लें

Gemstone Suggestion

(Manglik Person Nature)

The post Manglik Person Nature (Manglik Dosh) appeared first on Best Astrologer at Delhi INDIA - Numerology and Palmistry Expert - Vastu Consultant - Horoscope, Kundli Milan, Varsha phal Report and Gems Suggestion by Acharya Dr MSD Arya - Astrology of My life - Moksha Mukti Jyotish and Vastu Sansthan Delhi India.

]]>
https://www.astrologyofmylife.com/manglik-person-nature/feed/ 0